तीन-तीन पुलिस नोटिस, एसआईटी के सामने पेश होने का अल्टीमेटम और फिर भी गिरधारी लाल साहू का कोई अता-पता नहीं! उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी साहू के बीच विवाद अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस की दबिश के बीच साहू के नेपाल जाने की आशंका भी जताई जा रही है। अब पुलिस की चेतावनी है कि जांच में शामिल नहीं हुए तो आगे सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सवाल है—क्या एसआईटी के सामने पेश होंगे साहू या अब शुरू होगी कुर्की और वारंट की कार्रवाई? देखिए पूरी रिपोर्ट! दोस्तो एक बड़ी सनसनीखेज और घरेलू घमासान से जुड़ी महा-विस्फोटक खबर! उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच छिड़ी जंग अब पूरी तरह से ‘आर-पार’ के कानूनी अखाड़े में तब्दील हो चुकी है! वो पति जो कभी मंत्री पत्नी के रसूख के पीछे खड़ा दिखाई देता था, आज उसी पति के खिलाफ देहरादून पुलिस ने एक ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है जिससे निकल पाना नामुमकिन है! दोस्तो मामला बेहद संगीन है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर पुलिस ने उनके पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ मारपीट, प्रताड़ना, और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन चौंकाने वाला ट्विस्ट यह है कि मामले की जांच कर रही एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व वाली एसआईटी (SIT) के सामने गिरधारी लाल साहू भगोड़े साबित हो रहे हैं!
देहरादून से लेकर बरेली और हल्द्वानी तक पुलिस ने साहू के ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी, लेकिन साहू अंडरग्राउंड हैं। दोस्तो हद तो तब हो गई जब पुलिस द्वारा एक के बाद एक तीन-तीन कानूनी नोटिस तामील कराए जाने के बावजूद गिरधारी लाल साहू बयान दर्ज कराने एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए! इस बीच खुफिया सूत्रों से एक और बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है कि गिरफ्तारी के डर से साहू उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के बॉर्डर से नेपाल फरार हो चुके हैं! अब देहरादून पुलिस ने दो टूक चेतावनी दे दी है कि अगर इस आखिरी अल्टीमेटम पर भी साहू हाजिर नहीं हुए, तो उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर से लेकर कोर्ट के जरिए कुर्की और वारंट की बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी! दोस्तो आखिर 210 करोड़ की कथित बेनामी संपत्ति और पारिवारिक कलह का यह असली सच क्या है? क्यों पुलिस की जांच से भाग रहे हैं गिरधारी लाल साहू? दोस्तो सियासत, रसूख और घरेलू कलह के इस कॉकटेल ने पूरी धामी सरकार और उत्तराखंड पुलिस महकमे में हड़कंप मचा रखा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा अपने ही पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी का गठन किया, लेकिन आरोपी गिरधारी लाल साहू लगातार पुलिस के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं। हल्द्वानी से लेकर यूपी के बरेली स्थित उनके आलीशान साम्राज्य तक पुलिस की टीमें खाक छान चुकी हैं, लेकिन साहू का कोई अता-पता नहीं है।
इधर दोस्तो पुलिस का कहना है कि आरोपी गिरधारी लाल साहू को अपनी बात रखने और बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस की तरफ से लगातार तीन बार कानूनी नोटिस भेजे जा चुके हैं. कानून सबके लिए बराबर है। अगर वो तीन नोटिस मिलने के बाद भी जांच में शामिल नहीं होते हैं और बयान देने नहीं आते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने और कोर्ट के माध्यम से वारंट व कुर्की जैसी बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह बाध्य होगी। दोस्तो इस बीच पुलिस और खुफिया तंत्र के गलियारों से आ रही खबरों ने एसआईटी के भी कान खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू के उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रास्ते भारत की सीमा लांघकर नेपाल भागने की प्रबल आशंका जताई जा रही है, जहां उनके कुछ अस्थायी ठिकाने बताए जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे घमासान पर जब मीडिया ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या को घेरा, तो उन्होंने बेहद सधे हुए शब्दों में अपनी बात रखी। दोस्तो लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर गिरधारी लाल साहू पूरी तरह बेगुनाह हैं, जैसा कि उन्होंने अपने पुराने वीडियो में दावा किया था, तो फिर वो पुलिस के नोटिसों का सामना करने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या नेपाल भागने की खबरें महज एक अफवाह हैं या फिर कानून के लंबे हाथों से बचने की कोई बड़ी रणनीतिक चाल? अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हुई हैं। दोस्तो उत्तराखंड की इस सबसे हाई-प्रोफाइल ‘रेखा-साहू रार’ में अब क्लाइमेक्स का वक्त आ चुका है। पुलिस के तीन-तीन नोटिसों को ठेंगे पर रखने वाले गिरधारी लाल साहू के लिए अब कानून का फंदा बेहद कस चुका है। यदि वे जल्द ही एसआईटी के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज नहीं कराते, तो देवभूमि की खाकी उन्हें भगोड़ा घोषित कर सलाखों के पीछे भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।