Rishabh Pant उत्तराखंड में जमीन का क्या है पेच? | CM Dhami | Roorkee | Uttarakhand News

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उत्तराखंड में जमीन खरीदना, आखिर इतना मुश्किल क्यों है?क्रिकेटर ऋषभ पंत के एक ट्वीट ने इसी सवाल को फिर सुर्खियों में ला दिया है।मामला ऐसा कि पंत को भी अपनी जमीन से जुड़े काम के लिए सीधे मुख्यमंत्री से मदद मांगनी पड़ी। तो आखिर उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर क्या है नियमों का पेच? बाहरी लोगों के लिए जमीन खरीदने पर कौन-कौन सी पाबंदियां हैं? और पंत के ट्वीट के बाद अब इस पूरे मामले पर क्या चर्चा शुरू हो गई है? बताउंगा आपको उत्तराखंड में जमीन खरीदने का पूरा पेच! दोस्तो भारत के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का एक ट्वीट सुर्खियों में है. ऋषभ पंत ने अपने ट्वीट में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद मांगी है। ऋषभ पंत ने अपने ट्वीट में लिखा कि उन्हें अपने होमटाउन उत्तराखंड में रहने लायक जगह नहीं मिल पा रही है। पिछले 3 साल से वह जगह की तलाश कर रहे हैं। उत्तराखंड के रुड़की में जन्में ऋषभ पंत ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा है कि वह उत्तराखंड में अपना पहला घर बनाना चाहते हैं और राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अपने मुताबिक रहने के लिए कोई सुविधाजनक और बड़ी जगह नहीं मिल पाई है। दोस्तो फिलहाल, ऋषभ इस वक्त भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट मैचों के लिए श्रीलंका के दौरे पर हैं। ऋषभ पंत, घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन अपने होमटाउन उत्तराखंड के साथ उनका जुड़ाव बना हुआ है। हाल ही में वह 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए उत्तराखंड के सबसे ज़्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति बने हैं। ऋषभ पंत की पोस्ट पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रिप्लाई किया है। उन्होंने लिखा है कि प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखण्ड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे। लेकिन दोस्तो इधर बहस इस बात को लेकर शुरू हो गई कि क्या उत्तराखंड में जमीन खरीदना इतना मुश्किल है कि ऋषभ पंत को सीधे मुख्यमंत्री को आधी रात को एक्स पोस्ट करना पडा। इसको जवाल ये है देखिए उत्तराखंड में जमीन खरीदने के लिए नियम क्या हैं? बताता हूं गौर कीजिएगा। क्योंकि जमीन खरीदने के नियम क्या हैं? (ये सब में रहेगा एक लाइन एक बार में देनी है)

उत्तराखंड में नए भू-कानून नियम 2025 के तहत बाहरी लोगों के लिए कृषि भूमि खरीदने पर रोक है। सिर्फ 250 वर्ग मीटर, यानी 300 गज तक की रेसिडेंशियल जमीन खरीद सकते हैं. इसके लिए एफिडेविट देना अनिवार्य है। हरिद्वार और उधमसिंह नगर को छोड़कर, बाकी 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी लोग खेती या बागवानी की जमीन नहीं खरीद सकते हैं। जमीन खरीदने वाले दूसरे राज्यों के नागरिकों को अपना उद्देश्य बताते हुए एक आधिकारिक शपथ पत्र देना होता है। जिलाधिकारियों के पुराने अधिकार सीमित कर दिए गए हैं। अब सभी डील्स की निगरानी एक तय ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है। इस भू कानून में भी टाउन एंड कंट्री एक्ट 1973 प्रभावी है, जो घर में रिनोवेशन और एक्सटेंशन और कुछ बदलाव को लेकर है। अगर आपको रिनोवेशन और एक्सटेंशन कराना है तो संबंधित अधिकारी से परमिशन लेनी होगी। इसके अलावा दोस्तो उत्तराखंड के भू कानूनों में में कई बार बदलाव भी हो चुके हैं जैसे उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद जमीन खरीदने को लेकर सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती बदलाव 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार के दौरान हुआ। उस समय बाहरी राज्यों के लोगों के लिए राज्य में जमीन खरीदने की सीमा 500 वर्ग मीटर तय की गई। इसके करीब चार साल बाद 2007 में बीसी खंडूड़ी सरकार ने भूमि खरीद के नियमों को और सख्त किया। बाहरी राज्यों के लोगों के लिए आवासीय जमीन खरीदने की सीमा 500 वर्ग मीटर से घटाकर 250 वर्ग मीटर कर दी गई.यानी जहां 2003 में कोई बाहरी व्यक्ति अधिकतम 500 वर्ग मीटर जमीन खरीद सकता था, वहीं 2007 के बाद यह सीमा आधी होकर 250 वर्ग मीटर रह गई।

2017-18 में तत्कालीन त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के दौरान भूमि कानून में बड़ा बदलाव किया गया। भू कानून को लेकर एक नया अध्यादेश ‘उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम,1950 में संशोधन का विधेयक’ पारित किया गया। इसमें धारा 143 (क), धारा 154(2) जोड़ी गई। इससके चलते पहाड़ों में भूमि खरीद की अधिकतम सीमा को समाप्त कर दिया गया। इसके अलावा, उत्तराखंड के मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर में भूमि की चकबंदी (सीलिंग) को भी खत्म कर दिया. यह ढील उत्तराखंड में पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया था। और दोस्तो इधर 2025 आते-आते मौजूदा धामी सरकर ने फिर से कई नियमों में बदलाव किया जिसमें धामी सरकार ने उत्तराखंड में भू-कानून को फिर से सख्त करने के लिए संशोधन किया। नए प्रावधानों के तहत राज्य के 11 पहाड़ी जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों के कृषि और बागवानी भूमि खरीदने पर रोक लगा दी गई। हालांकि, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को यहां पहले से मौजूद अलग परिस्थितियों और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए को इस प्रावधान से बाहर रखा गया। तो सवाल ये है कि क्या उत्तराखंड में बाहरी व्यक्ति आवासीय जमीन भी नहीं खरीद सकता? ऐसा नहीं है। आवासीय जमीन के लिए नियम अलग हैं और 250 वर्ग मीटर तक जमीन खरीदने का प्रावधान है, हालांकि इसके लिए कई शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। सरकार का कहना है कि पहाड़ी राज्य में जमीन सीमित है, इसलिए स्थानीय लोगों के जमीन के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए भू-कानूनों में सख्ती की गई है। वहीं ऋषभ पंत के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। पंत पर बाहरी लोगों वाले नए भू-कानून लागू नहीं होते। उनकी परेशानी जमीन खरीदने की नहीं, बल्कि अपनी जरूरत के मुताबिक बड़ा और सुविधाजनक घर या जमीन उपलब्ध न होने की है।