कांग्रेस को लेकर बड़े-बड़े दावे, लेकिन अब कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट! जी हां दोस्तो जहां कांग्रेस के एक बड़े नेता का वो सुर्खियों वाला बयान अभी थमा भी नहीं था कि बीजेपी के कई बड़े नेता जल्द कांग्रेस का दामन थामने वाले हैं, वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उत्तराखंड आए शंखनाद किया और चले भी गए, लेकिन कांग्रेस में किसी बड़े बीजेपी नेता की जॉइनिंग तो नहीं हुई। उल्टा कांग्रेस का ही एक बड़ा और महत्वपूर्ण विकेट गिर गया, आखिर कुंजवाल ने क्यों छोड़ी पार्टी UKD में जाने के पीछे क्या वजह? बताउँगा आपको पूरी खबर। तो दोस्तो वैसे तो चुनाव से पहले कई ऐसी खबर आएंगी, दलबदल की, लेकिन यहां कांग्रेस के सत्ता में आने का सवाल है, जिसका जिक्र कांग्रेस करती आ रही है, लेकिन कांग्रेस में सबकुछ ठीक ठाक है भी या फिर वो ही कहानी कांग्रेस गढ़ रही है शेर आया शेर आया होएगा जाएगा कुछ नहीं। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अल्मोड़ा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और पांच बार विधायक रहे गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस का साथ छोड़कर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके इस फैसले को क्षेत्र की राजनीति में अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। दोस्तो अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर जैंती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिनेश सिंह कुंजवाल ने हजारों समर्थकों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उत्तराखंड क्रांति दल की सदस्यता ली।
यहां दोस्तो गौर करने वाली बात ये है कि वो वर्तमान में कांग्रेस में किसी संगठनात्मक पद पर नहीं थे, लेकिन वर्ष 2002 से 2007 तक प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा हरीश रावत सरकार के दौरान उन्हें दर्जा मंत्री का दायित्व भी मिला था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उक्रांद के संस्थापक सदस्य काशी सिंह ऐरी ने कहा कि प्रदेश में इस बार उत्तराखंड क्रांति दल के पक्ष में माहौल बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि, राष्ट्रीय दलों ने वर्षों तक उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन के संसाधनों का दोहन किया, जबकि स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में उक्रांद सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इधर दोस्तो बड़ा महत्वपूर्ण ये देखना था कि उक्रांद में शामिल होने के बाद दिनेश सिंह कुंजवाल क्या कहते हैं। जी हां दोस्तो उत्तराखंड आज रोजगार, पलायन और मूलभूत सुविधाओं जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। दिनेश सिंह कुंजवाल कहना था कि पहाड़ के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा और जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मूल उद्देश्य और राज्य आंदोलन की भावना को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय सोच को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की भी वकालत की और कहा कि उत्तराखंड के भविष्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके अवाला दोस्तो एक बड़ा घटना क्रम तब सामने आया जब दिनेश सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस और बीजेपी को घेरते-घेरते अपने चाचा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल पर विधायक निधि के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उनके इस बयान ने क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि इस आरोप पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं दोस्तो ये तस्वीर तब सामने आई हैं जब दो तीन रोज कांग्रेस का ये बयान दे रहे थे और उत्तराखंड की सियासत में किसी बड़े खेल का अंदाजा लगाया जाने लगा था, लेकिन दोस्तो इधर तो कुछ और खेल हो रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिनेश सिंह कुंजवाल का कांग्रेस छोड़कर उक्रांद में जाना जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर पर असर डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब सभी दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अब कितना असर डालेगा ये तो चुनाव बताएगा, लेकिन आप इस खबर को कैसे देखेते हैं कांग्रेस के सत्ता सिहांसन के सपने कैसे सार्थक हो सकते हैं. क्या कांग्रेस सत्ता में लावसी कर पाएगी, वहीं दूसरा सवाल ये है कि उत्तराखंड क्राति दल भी इस 70 की 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर चुका है, तो कितना मौका यूकेडी के लिए है या फिर कुछ।