तीर्थनगरी में वन भूमि को लेकर फिर तनाव!| Uttarakhand News | Rishikesh News | Viral Video

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तीर्थनगरी ऋषिकेश में एक बार फिर वन भूमि को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हो रहे वन भूमि सर्वे और तारबाड़ की कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। जनता का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है और वन विभाग की टीम के सामने हालात संभालना मुश्किल होता नजर आ रहा है। दोस्तो तीर्थनगरी ऋषिकेस में वन भूमि को लेकर फिर क्यों बढ़ा तनाव, क्या वन भूमि सर्वे के नाम पर लोगों की जमीनों पर कब्जे की आशंका बढ़ रही है? और क्या प्रशासन जनता के विश्वास में लिए बिना कार्रवाई कर रहा है? इन्हीं सवालों के बीच आज ऋषिकेश में माहौल एक बार फिर गर्मा गया है। दरअसल दोस्तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग ने सर्वे में शामिल वन भूमि पर तार बाड़ करना शुरू कर दिया है। इस बीच वन विभाग की कार्रवाई का विरोध तेज हो गया है। फिलहाल तार बाड़ का काम शुरू होते ही विरोध के कारण रुका हुआ है। यहां अमित ग्राम गली नंबर 25 में वन विभाग की टीम जैसे ही दलबल के साथ वन भूमि पर ताड़ बाड़ करने पहुंची, वैसे ही भूमि से संबंधित लोग विरोध करने के लिए पहुंच गए। विरोध के आगे वन विभाग की टीम बेबस नजर आई। दोस्तो वन विभाग की टीम विरोध करने वालों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर समझाने का काम कर रही है। लेकिन लोग विरोध करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। विरोध करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक है, जो वन विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करने में भी कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने मेहनत की कमाई से यह जमीन खरीदी है। वह संबंधित भूमि पर पांच दशक से भी अधिक समय से खेती कर रहे हैं। इन जमीनों पर वह वन विभाग को कब्जा लेने नहीं देंगे। फिलहाल तार बाड़ का काम शुरू होते ही विरोध के कारण रुका हुआ है। दोस्तो इस पूरे मामले पर एसडीओ का कहना है कि एक दिन पहले जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहयोग मांगा गया था। उन्हें बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है। इसमें किसी भी प्रकार का विरोध करना ठीक नहीं है. लेकिन फिर लोग विरोध कर रहे हैं। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड वन विभाग को आदेश देते हुए 5 जनवरी को रिपोर्ट सौंपने का आदेश जारी किया था। जिसके बाद 27 दिसंबर को वन विभाग के सर्वे के कार्य के दौरान लोगों ने विरोध किया था। दोस्तो यही विरोध 28 दिसंबर को बड़े रूप में देखा गया था। लोगों ने रेल मार्ग अवरुद्ध करने के साथ ही पुलिस पर पथराव भी किया था। इस मामले पर पुलिस ने रेल मार्ग रोकने, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर पथराव करने और महिला रेंजर से बदसलूकी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने पूरे मामले में कुछ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज के साथ कुछ अज्ञातों को भी शामिल है तो कुल मिलाकर तीर्थनगरी ऋषिकेश में वन भूमि को लेकर हालात एक बार फिर तनावपूर्ण बने हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हो रही कार्रवाई को वन विभाग कानूनी दायरे में बता रहा है, लेकिन ज़मीन पर रह रहे लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग इसे अपनी पुश्तैनी और मेहनत की कमाई से खरीदी ज़मीन बता रहे हैं, जिस पर वे दशकों से खेती करते आ रहे हैं। महिलाओं की बड़ी भागीदारी के साथ हो रहे इस विरोध ने प्रशासन की चुनौती और बढ़ा दी है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ जनता का गुस्सा और विश्वास का संकट।पिछले दिनों सर्वे के दौरान हुए विरोध, रेल मार्ग अवरोध, पथराव और पुलिस कार्रवाई के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। अब तारबाड़ का काम भी विरोध के चलते फिलहाल रोकना पड़ा है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और जनता के बीच संवाद की कमी इस टकराव को और बढ़ा रही है? और क्या इस पूरे मामले का कोई ऐसा समाधान निकल पाएगा, जिससे कानून का पालन भी हो और लोगों का विश्वास भी कायम रह सके?फिलहाल ऋषिकेश में वन भूमि को लेकर सियासी, प्रशासनिक और सामाजिक तापमान ऊंचा बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन क्या रास्ता निकालता है, इसी पर सबकी नजरें टिकी हैं।