Kunjapuri Mela में दलेर विवाद! Subodh Uniyal से माफी की मांग!| Daler Mehndi | BJP | Uttarakhand News

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दोस्तो, मां कुंजापुरी मेले के मंच से शुरू हुआ दलेर मेहंदी विवाद अब बीजेपी और सिख संगठन के आमने-सामने आने तक पहुंच गया है! एक तरफ बीजेपी के सवाल, तो दूसरी तरफ मंत्री सुबोध उनियाल से माफी की मांग! आखिर मंच पर ऐसा क्या हुआ कि कलाकार के सम्मान और धार्मिक आस्था पर छिड़ गई बहस? क्या ये विवाद अब और बढ़ेगा? देखिए पूरी रिपोर्ट! दोस्तो श्रद्धा के पावन मंच पर जब सुरों की तान टूटती है और अहंकार का टकराव शुरू होता है, तो विवाद सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहता। देवभूमि उत्तराखंड के एक बेहद पवित्र धार्मिक मेले से शुरू हुई जंग अब सीधे तौर पर आस्था के अपमान और सिख समुदाय के स्वाभिमान की लड़ाई में तब्दील हो चुकी है! एक तरफ जहां सूबे के सत्तारूढ़ दल ने दलेर मेहंदी की पेशेवर ईमानदारी पर सीधे सवाल दागते हुए पूछा है कि ‘अगर तबीयत खराब थी तो सच क्यों छुपाया?’ वहीं दूसरी तरफ यूनाइटेड सिख फेडरेशन ने बेहद कड़े और तल्ख शब्दों में कैबिनेट मंत्री को चुनौती दे डाली है कि ‘अगर थोड़ी भी शर्म बची है, तो तुरंत सार्वजनिक माफी मांगें।’ क्या वाकई यह विवाद दलेर मेहंदी की तबीयत और लिप-सिंक का है, या फिर मां कुंजापुरी के दरबार में भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है? दोस्तो नवरात्रि का पावन अवसर, मां कुंजापुरी का पवित्र दरबार और वहां उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का समंदर। लेकिन इस बार यह पावन मंच सुरों की भक्ति के लिए नहीं, बल्कि राजनीति और संस्कृति के सबसे बड़े महासंग्राम का गवाह बन चुका है। मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच भड़का यह विवाद अब एक ऐसे चौराहे पर आकर खड़ा हो गया है, जहां एक तरफ आस्था की मर्यादा का सवाल है, तो दूसरी तरफ एक लेजेंड कलाकार के सम्मान की लड़ाई।

दोस्तो इस पूरे मामले पर अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बीजेपी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विनय गोयल ने इस विवाद पर पार्टी और भक्तों का पक्ष रखते हुए सीधे दलेर मेहंदी को कटघरे में खड़ा किया है। विनय गोयल ने साफ शब्दों में कहा कि वह खुद दलेर मेहंदी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन नवरात्रि के पावन दिनों में मां कुंजापुरी के इस पवित्र धार्मिक आयोजन में जो कुछ भी दृश्य सामने आए हैं, उसने देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने बेहद तीखा सवाल पूछते हुए कहा—”यदि दलेर मेहंदी की तबीयत वाकई ठीक नहीं थी, तो इसकी जानकारी उन्होंने आयोजकों को पहले क्यों नहीं दी? गुमराह क्यों किया गया?” विनय गोयल ने स्पष्ट कर दिया कि मां कुंजापुरी के सम्मान के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। इधर दोस्तो बीजेपी के इस कड़े हमले के बाद यह विवाद तब और ज्यादा गरमा गया, जब इसमें सिख संगठनों की बेहद आक्रामक एंट्री हो गई। यूनाइटेड सिख फेडरेशन के उत्तराखंड अध्यक्ष सरदार अमरजीत सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरदार अमरजीत सिंह ने बेहद तल्ख और तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, “अगर मंत्री में थोड़ी भी शर्म बची हो, तो वे दलेर मेहंदी से तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।” सिख फेडरेशन का आरोप है कि मंच पर एक प्रतिष्ठित और लेजेंड कलाकार के साथ किया गया व्यवहार बेहद अपमानजनक था, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब दोस्तो यह लड़ाई पूरी तरह दो फाड़ हो चुकी है। एक तरफ वो खेमा है जिसमें बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव और सिख संगठन हैं, जो इसे एक महान कलाकार की कला और उसकी पगड़ी के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि मंत्री ने मर्यादा की सीमा लांघी है। वहीं दूसरी तरफ खुद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सिंगर सोना मोहपात्रा और अब सत्तारूढ़ बीजेपी है, जिनका साफ कहना है कि किसी लेजेंड का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन जब जनता का पैसा और मां के दरबार की साख दांव पर हो, तो पेशेवर लापरवाही को ‘तबीयत खराब’ होने की आड़ में छुपाया नहीं जा सकता। दोस्तो सवाल अब केवल एक परफॉर्मेंस का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या धार्मिक मंचों पर आने वाले बड़े कलाकारों की यह नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे दर्शकों और आयोजकों के प्रति पूरी तरह पारदर्शी रहें? और दूसरा बड़ा सवाल यह भी कि क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठे मंत्री को मंच पर अपना आपा खोने के बजाय इस मामले को शालीनता से नहीं सुलझाना चाहिए था? बहरहाल, मां कुंजापुरी के दरबार से उठी यह चिंगारी अब धर्म, कला और सियासत के गलियारों में एक भीषण आग का रूप ले चुकी है, जिसका शांत होना फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है। दोस्तो मां कुंजापुरी के सम्मान से कोई समझौता नहीं—यह कहना है बीजेपी का। वहीं दूसरी तरफ सिख फेडरेशन इसे मंत्री के अहंकार और कलाकार के अपमान के रूप में देख रहा है। इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि जब बात आस्था और आत्मसम्मान की आती है, तो बहस बहुत लंबी खिंच जाती है। इस पूरे विवाद पर, मंत्री के स्टैंड पर और दलेर मेहंदी के इस पूरे घटनाक्रम पर आप क्या सोचते हैं? क्या मंत्री को माफी मांगनी चाहिए, या फिर दलेर मेहंदी को अपनी स्थिति पहले साफ करनी चाहिए थी?