FSSI प्रमाणित करेगा कैंची के नीम करौली बाबा के मालपुवे, दो लाख भक्त ग्रहण करते हैं प्रसाद, इस तरह मिलता है प्रमाणपत्र

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अल्मोड़ा भवाली हाईवे स्थित कैंची में विश्वविख्यात नीम करौली महाराज का महाप्रसाद मालपुआ भारतीय खाद्य सुरक्षा, मानक प्राधिकरण एफएसएसएआई से प्रमाणित होगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग प्रमाणीकरण की पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद महाप्रसाद को प्रमाणित करेगा।

उत्तराखंड में अब तक हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर, गीता कुटीर तपोवन के प्रसाद को एफएसएसएआई की मान्यता मिली है। एफएसएसएआई की ओर से भगवान को पसंद स्वच्छ प्रसाद अभियान के लिए प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के भोग भंडारे के विशेष प्रसाद को प्रमाणित किया जा रहा है। यहां विश्वविख्यात कैंची धाम प्रबंधन से विभागीय अधिकारियों की शुरुआती बातचीत हो चुकी है।

कैंची धाम में मालपुओं का भोग 15 जून को मंदिर के स्थापना दिवस पर लगता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस पर 15 दिन पहले से मालपुवे बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। देश के हर राज्य व विदेशों से करीब 2 लाख भक्त प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।

कैसे करती है टीम प्रसाद को प्रमाणित

भारतीय खाद्य सुरक्षा टीम प्रसाद बनाने की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण कर प्रसाद स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित व स्वच्छ बन रहा है या नहीं देखती है। इसमें किचन, गुणवत्तायुक्त सामग्री की उपलब्धता, उपयोग होने वाली सामग्री आदि देखी जाती है। इसके लिए कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षित किया जाएगा। हर साल इसका भौतिक सत्यापन होगा। कोई कमी मिलने पर उसे दूर किया जाएगा। कमी मिलने पर प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता।