Rishikesh, Joshimath में किसने की बड़ी साजिश? । Religious Conversion । uttarakhandnews

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देवभूमि उत्तराखंड में एक के बाद एक सामने आ रहे दो अलग-अलग मामलों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। टिहरी में सत्संग की आड़ में कथित धर्मांतरण के आरोप लग रहे हैं, तो वहीं ऋषिकेश में घर के अंदर नमाज़ को लेकर हंगामा और विरोध के मामले ने माहौल गरमा दिया है।आखिर क्या यह केवल स्थानीय विवाद हैं या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश रची जा रही है? क्या देवभूमि में सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है? और सबसे बड़ा सवाल—इन घटनाओं के पीछे असल सच्चाई क्या है? दोस्तो मै आपको उत्तराखंड में चौकाने वाले षणयंत्र के भारे में विस्तार से बताउं उससे पहले मै आपको कुछ तस्वीरें दिखाना चाहता हूं, कि कैसे एक बड़ी साजिश के तहत देवभूमि की पूरी-पूरी की परिभाषा को बड़ा डैंट देने की कोशिश हो रही है, क्या टिहरी, क्या ऋिषिकेश, क्या जोशिमठ. दोस्तो अपने उत्तराखंड के कौने कौने में ऐसा लगता है कि कोई गुपचुप खेल चल रहा है और बड़ा चल रहा है और हम सब हमारा सिस्टम इससे कोसों दूर हैं, कोई कुछ नहीं जानता है, लेकिन खबर कुछ ऐसी हैं, दो आपको दंग कर देंगी।

आपभी सोच में पड़ने वाले में कि आखिर हो क्या रहा है देवभूमि उत्तराखंड में दोस्तो टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार ब्लॉक के कैंथोली गांव में ग्रामीणों ने सत्संग के नाम पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी लोग हिंदू समुदाय के लोगों को सत्संग की आड़ में धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे। दोस्तो टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार ब्लॉक के कैंथोली गांव से सामने आए इन आरोपों ने इलाके में हलचल मचा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सत्संग के नाम पर कुछ बाहरी लोग हिंदू समुदाय के लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आखिर क्या वाकई आस्था के नाम पर कोई गतिविधि चल रही है? क्या यह सिर्फ ग्रामीणों की आशंका है या इसके पीछे कोई संगठित प्रयास छिपा है? और सबसे बड़ा सवाल—प्रशासन इस पूरे मामले को किस नजर से देख रहा है?

ऋषिकेश से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इलाके में हलचल मचा दी है। गूजर प्लॉट क्षेत्र के एक घर में कथित तौर पर सामूहिक नमाज़ अदा किए जाने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया और मौके पर पहुंचकर आपत्ति जताई..आरोप यह भी है कि संबंधित परिवार बाहरी लोगों को मोहल्ले में बुलाकर नमाज़ अदा करवा रहा है और धीरे-धीरे उन्हें क्षेत्र में बसाने की कोशिश की जा रही है। क्या यह सिर्फ एक धार्मिक गतिविधि का मामला है या इसके पीछे स्थानीय स्तर पर बढ़ता विवाद है? और क्या ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका पर्याप्त रही है? तो दोस्तो, टिहरी से लेकर ऋषिकेश और जोशीमठ तक सामने आए ये अलग-अलग मामले अब कई बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या ये सिर्फ स्थानीय विवाद हैं जो बढ़ा-चढ़ाकर सामने आ रहे हैं, या फिर सच में कहीं न कहीं सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है?क्या आस्था और धार्मिक गतिविधियों के नाम पर चल रहे ये विवाद वाकई उतने ही सरल हैं, जितने दिख रहे हैं? या फिर इनके पीछे कोई गहरी वजह और संगठित सोच काम कर रही है? और सबसे अहम सवाल—ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन और सिस्टम की भूमिका कितनी प्रभावी है?फिलहाल इन सभी मामलों पर बहस तेज है, आरोप भी हैं और सवाल भी, लेकिन जवाब अभी जांच और समय के गर्भ में हैं।देवभूमि की शांति और सौहार्द के बीच उठ रहे इन सवालों के जवाब क्या होंग, यह देखना बाकी है।