Dehradun में नया मुकदमा Urmila Sanawar पर शिकंजा क्यों? | Ankita Bhandari | VIP | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो, उर्मिला सनावर पर शिकंजा कसता जा रहा है, देहरादून में एक और मुकदमा दर्ज और नार्को टेस्ट पर कोर्ट में पेशी से ठीक पहले जेल! आखिर आधी रात को ऐसा क्या हुआ कि पुलिस ने अचानक कार्रवाई तेज कर दी? 2025 में सुस्ती और 2026 में इतनी तेजी क्यों? क्या ये महज कानूनी कार्रवाई है या अंकिता केस के कथित VIP विवाद से भी कोई सवाल जुड़ता है? पांच करोड़ की रंगदारी के आरोप से लेकर गिरफ्तारी तक इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल हैं, जिनके जवाब सामने आने बाकी हैं, लेकिन आप खबर देखिए आखिर देहरादून में दर्ज इस नए मुकदमें क्या कहा गया और अब तक उर्मिला सनावर पर कितने मुकदमे हो गए दर्ज। दोस्तो अपनी देवभूमि का वो सबसे बड़ा और अनसुलझा सवाल—ऐसे कैसे अंकिता भंडारी को न्याय मिलेगा? दोस्तो अंकिता भंडारी मर्डर केस में ‘VIP’ के नाम का तथाकथित ‘ऑडियो बम’ फोड़ने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर पर शिकंजा इस कदर कस गया है कि कहानी किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म जैसी लगने लगी है! हरिद्वार पुलिस उन्हें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार करती है और अभी वो जेल की सलाखों के पीछे पहुंचती भी नहीं कि देहरादून के डालनवाला थाने में उनके खिलाफ एक और नया मुकदमा ठोक दिया जाता है! दोस्तो यहां थोड़ा रुक कर सोचिए.. इस पूरी स्क्रिप्ट की टाइमिंग को देखिए। जब 23 अक्टूबर को देहरादून की विशेष सीबीआई कोर्ट में उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर नार्को टेस्ट के लिए सहमति दे देते हैं, जब सोमवार यानी 26 अक्टूबर को नार्को टेस्ट की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कोर्ट में पेशी होनी थी। ठीक उससे एक दिन पहले पुलिस इतनी हड़बड़ी में क्यों दिखाई दी?

दोस्तो रात को मुकदमा दर्ज, दिन निकलते ही गिरफ्तारी, शाम को मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और रात होते-होते सीधे जेल! सवाल उठना लाजिमी है—जब 2025 में इसी शिकायत पर पुलिस सुस्त थी, उर्मिला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) होने के बावजूद वो खुलेआम घूम रही थीं, तो फिर 2026 में ऐसा कौन सा डर लग गया कि पुलिस ने सुपरफास्ट रफ्तार पकड़ ली? आखिर उर्मिला के नार्को टेस्ट से कौन खौफजदा है? किसे बचाने का यह मेगा प्लान है? दोस्तो इन तस्वीरों को देख रहे हैं। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े इस सबसे बड़े विवाद में हर पल एक नया मोड़ आ रहा है। पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पुत्री दीपिका राठौर की जिस एफआईआर पर पुलिस ने उर्मिला सनावर को आधी रात को दबोचा, उसकी इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है। दरअसल, यह कोई नया आरोप नहीं है। ठीक ऐसा ही एक मुकदमा वर्ष 2025 में भी इसी दीपिका राठौर ने इसी आरोपी उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज कराया था! दोनों मुकदमों में वादी एक, आरोपी एक और आरोप भी बिल्कुल एक यानी ब्लैकमेलिंग और मानहानि! साल 2025 उर्मिला के खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी हुआ, लेकिन वो महीनों बाहर घूमती रहीं, पुलिस शांत बैठी रही। साल 2026, 24 अक्टूबर की रात शिकायत मिलती है और महज 12 घंटे के भीतर पुलिस की टीम यूपी के सहारनपुर पहुंचकर उर्मिला को सलाखों के पीछे डाल देती है!

दोस्तो पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी ने शिकायत दी है कि उर्मिला सनावर ने उनके परिवार पर सोशल मीडिया के जरिए अश्लील टिप्पणियां कीं और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। इतना ही नहीं, आरोप है कि व्हाट्सएप कॉल के जरिए रविदास धाम की करोड़ों की संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया गया और इसके एवज में 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी गई! लेकिन जनता सोशल मीडिया पर पूछ रही है कि क्या पुलिस की यह हैरतअंगेज फुर्ती सिर्फ इस 5 करोड़ के मामले की वजह से है या इसके पीछे अंकिता भंडारी केस का कोई बड़ा राज छिपा है? दोस्तो चर्चाओं का बाजार गर्म है और उर्मिला के समर्थक इस पूरी क्रोनोलॉजी को अंकिता भंडारी केस से जोड़ रहे हैं। याद कीजिए, 23 अक्टूबर को ही देहरादून की विशेष सीबीआई कोर्ट में उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने नार्को टेस्ट के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी थी। उर्मिला ने तो यहां तक चुनौती दे दी थी कि उनका नार्को टेस्ट लाइव कैमरों और मीडिया के सामने हो, ताकि वो उस वीआईपी का सच दुनिया को दिखा सकें जिसका नाम उन्होंने ऑडियो क्लिप में लिया था! 26 अक्टूबर को इस कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ना था, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले उर्मिला को जेल भेजकर इस पूरी कवायद पर ब्रेक लगा दिया गया! दोस्तो उर्मिला सनावर पर कानून का शिकंजा यहीं नहीं थमा। जैसे ही वो हरिद्वार पुलिस की गिरफ्त में आईं, देहरादून के डालनवाला थाने में सागर नाम के शख्स की शिकायत पर उनके खिलाफ एक और नया मुकदमा दर्ज कर लिया गया। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम और अन्य नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। एक के बाद एक मुकदमों की इस झड़ी ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस पूछ रही है कि क्या नार्को टेस्ट से सच में कोई बहुत शक्तिशाली चेहरा डरा हुआ है, जिसके इशारे पर यह पूरा खेल रचा गया? दोस्तो आरोप बेहद गंभीर हैं और कानून अपना काम कर रहा है। उर्मिला सनावर पर लगे रंगदारी के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए। लेकिन देश और उत्तराखंड की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस कानूनी नूराकुश्ती के बीच अंकिता भंडारी हत्याकांड का वो ‘VIP’ राज हमेशा के लिए दब जाएगा? जिस नार्को टेस्ट से दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद थी, क्या उर्मिला के जेल जाने के बाद उस पर ग्रहण लग गया है? क्या वाकई किसी रसूखदार को बचाने के लिए पूरी पुलिस मशीनरी इतनी जल्दी में दिखाई दी? सवाल बड़े हैं और जवाब सिर्फ वक्त के पास है, आप क्या कहेंगे बताना जरूर।