उत्तराखंड में बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहे ट्रांस भारत एविएशन के दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के क्रैश का रहस्य सुलझाने के लिए जांच टीमों ने मलबे में मौजूद ऑन-बोर्ड कैमरे की तलाश तेज कर दी है। सिंगल-इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर में ब्लैक बॉक्स नहीं होने के कारण पायलट सीट के पीछे लगा कैमरा ही आखिरी पलों की स्थिति स्पष्ट करने का सबसे अहम सुराग माना जा रहा है। जोशीमठ के चाय गांव और हाथी पर्वत के पास बेहद दुर्गम व खड़ी ढलानों वाले इलाके में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) की टीमों को मौके तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते अब जांच अधिकारियों की मदद के लिए पेशेवर पर्वतारोहियों (माउंटेनियरों) को तैनात करने की तैयारी की जा रही है।
हादसे के कारणों की पड़ताल में मौसम और तकनीकी पहलुओं पर गहरा संदेह जताया जा रहा है, क्योंकि 30 अक्टूबर को चमोली क्षेत्र में भारी बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी था। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि दुर्घटना से ठीक पहले पायलट की ओर से कोई भी ‘Mayday’ या डिस्ट्रेस सिग्नल प्रसारित नहीं किया गया और न ही रेडियो टेलीफोनी पर कम दृश्यता की कोई सूचना दी गई। इसके अलावा क्रैश हुए हेलीकॉप्टर के ठीक 8 मिनट बाद उसी रूट से उड़े दूसरे विमान ने सुरक्षित लैंडिंग की थी। ऐसे में पायलट, बेंगलुरु के पांच यात्रियों की जान लेने वाले इस हादसे की असली वजह कॉकपिट वीडियो और फॉरेंसिक सबूतों की बरामदगी के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।