उत्तराखंड में महिलाओं के Periods में पुरुषों के लिए क्या होते हैं नियम ? | Uttarakhand News

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उत्तराखंड में पीरियड्स आना लड़कियों और महिलाओं के लिए है अभिशाप, जानवरों जैसा होता है सुलूक!
पीरियड्स में पुरुषों के लिए भी होते हैं पहाड़ों में अलग नियम… सुनेंगे तो होंगे हैरान !

देश-दुनिया में पीरियड्स के दौरान महिलाएं प्रीकॉशन के साथ सामान्य तरीके से रहती हैं… पुरुषों के लिए कुछ भी किसी भी तरह के नियम नहीं होते हैं… लेकिन उत्तराखंड में स्थितियां कुछ और है… यहां इस दौरान महिलाएं तो छोड़िए पुरुषों को भी नियम कायदों में रहना पड़ता है… नियमों के साथ छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं है… हालांकि आधुनिकता का प्रभाव उत्तराखंड के लोगों पर भी पड़ा है… लेकिन आज भी कुछ महिलाएं और पुरुष हैं…. जो शदियों से पीरियड्स को लेकर चली आ रही मान्यताओं को मानते हैं… कहा जाता है… उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पहले के समय में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए काफी सख्त नियम होते थे… मसलन, उन्हें एक कमरे में ही रहना होता था, जमीन पर सोना होता था और आदि कठोर नियम होते थे…. वर्तमान में नई पीढ़ी कुछ हद तक इस रूढ़िवादी सोच पर आगे जरूर बढ़ी है लेकिन कई लोग इन नियमों का पालन आज भी कर रहे हैं.,,,
पीरियड्स को मासिक धर्म कहा जाता है… उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पीरियड्स के दौरान पतियों के लिए भी अलग नियम होते हैं…. इस दौरान पति पत्नी के कमरे में नहीं जा सकते, यदि चले भी गया तो उसे गाय का गोमूत्र अपने ऊपर छिड़कना पड़ता है. इस दौरान कई लोग मंदिर भी नहीं जाते हैं और तिलक भी नहीं लगते हैं…. महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान कुछ नियम होते हैं… पहाड़ों में आज भी कुछ महिलाएं इनका पालन कर रही हैं. महिलाओं के पीरियड्स के दौरान पुरुष को भी कई नियमों का पालन करना पड़ता है… महीने में होने वाले पीरियड्स के दौरान पति-पत्नी के साथ नहीं रह सकता है… और ना ही पत्नी के द्वारा बनाया गया खाना खा सकता है… अगर वो इस कृत को करता है तो वो अशुद्ध माना जाता है… हां यदि, वह इन सभी चीजों का पालन करता है तो वह शुद्ध माना गया है…परंपराओं के अनुसार इन 5 दिनों के लिए पति भी अशुद्ध माना गया है….पुजारी हरिदास ने बताया कि पहाड़ों में कुछ हद तक लोग इनका पालन कर रहे हैं… महिलाओं को होने वाले पीरियड्स के दौरान पुरुष भी इसका पालन करते हैं…
ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ उत्तराखंड में ही है… पड़ोसी देश नेपाल में भी पीरियड्स को लेकर काफी सख्त नियम और प्रथाएं है…. जिसे वहां की महिलाओं को मानना ही पड़ता है. जिसे वो अंधविश्वास से भी जोड़ते हैं… नेपाल में इस दौरान महिलाओं पर लागू किए जाने वाले नियम को ‘चौपाड़ी प्रथा’ कहते हैं…. जिसमें उन्हें घर-परिवार से अलग-थलग कर दिया जाता है…इस नियम के तहत पीरियड्स के दौरान लड़की या महिला को घर के भीतर ना रहकर बाहर बनी झोपड़ी या लकड़ी के बाड़े में रहना पड़ता है… अंधविश्वास का चरम तो ये हहै कि वहां के लोग मानते हैं कि पीरियड्स के दौरान अगर महिला अपने परिवारजनों के साथ रहती है तो उनकी किस्मत उनसे रूठ जाती है और उन पर आफत का पहाड़ टूट सकता है… और तो और माना ये भी जाता है कि अगर इस दौरान महिला ने किसी पेड़ पौधे को छू लिया तो वो झट से सूख जाएंगे… मंदिर जाने और पूजा पाठ पर भी रोक होती है… हालांकि यह रोक बहुत सी जगहों पर लागू होते हैं…. चौपाड़ी प्रथा के दौरान महिला का किसी भी पुरुष से मिलना या आमना सामना होना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है… इसके पीछे वहां के लोगों का मानना है कि यह इंद्रदेव का महिलाओं को श्राप है लिहाज़ा उन्हें अलग-थलग ही रहना होगा. ..हालांकि इस प्रथा पर 2005 में बैन लगाया गया था. जिसके तहत पीरियड में महिलाओं को परेशान करने पर तीन महीने की जेल और 3000 नेपाली रुपये का जुर्माना लग सकता है…