देखिए Babita Pandey क्यों नहीं मिल रही?| Uttarkashi | Dayara Bugyal | Uttarakhand News

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दोस्तो 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इसी बीच एक बार फिर परिवार उत्तरकाशी पहुंच गया है और अब उनके सवाल पहले से ज्यादा तीखे हो गए हैं। आखिर बबीता पांडे की गुमशुदगी को लेकर सच क्या है? कौन है जो परिवार को गुमराह कर रहा है और क्यों हर दिन के साथ बढ़ती जा रही है अनहोनी की आशंका? परिवार का कहना है कि अगर सर्च ऑपरेशन इतने बड़े स्तर पर चल रहा है तो फिर अब तक कोई सुराग क्यों नहीं मिला?क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है या फिर इस रहस्य की कुछ अहम कड़ियां अब भी छिपी हुई हैं? या छिपाई जा रही हैं। दोस्तो बबीता की तलाश में जुटी एजेंसियों के दावों और परिवार के सवालों के बीच आखिर सच क्या है? आपके एक एक सवाल का जवाब शायद मेरी इस रिपोर्ट में मिल जाए। पहला सवाल ये है कि बबीता पांडे को लापता हुए कितने दिन हो चुके हैं और अब तक क्या पता चला है? दोस्तो इस सवाल का जवाब कुछ है जो बबीता पांडे का परिवार भी कहता है वो ये कि बबीता पांडे को दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुए 13 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अब तक उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और वन विभाग लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। अब दूसरा सवाल ये कि बबीता के परिवार को सबसे ज्यादा किस बात पर संदेह है? इस सवाल के जवाब में बबीता पांडे के भाई परिवार के लोग कहते हैं कि ट्रेकिंग स्थल पर करीब 80 से 90 लोग मौजूद थे। ऐसे में किसी को भी बबीता के बारे में कुछ पता न होना कई सवाल खड़े करता है। परिवार का मानना है कि वहां मौजूद सभी लोगों से गहन पूछताछ होनी चाहिए।

दोस्तो अब सवाल ये कि बबीता के साथ ट्रेक पर कौन-कौन गया था? दोस्तो इस सवाल का जवाब है कि बबीता दो युवकों के साथ ट्रेक पर गई थी, जिनमें हरमनप्रीत और हरमनपाल शामिल बताए जा रहे हैं। परिवार का कहना है कि बबीता इन लोगों को ज्यादा समय से नहीं जानती थी और अचानक ट्रिप का प्लान बना था। दोस्स्तो इसके बाद एक सवाल ये आता है कि आखिरी बार बबीता की अपने परिवार से कब बात हुई थी? दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि बबीता की आखिरी बार 29 मई को अपनी मां से बात हुई थी। उस दौरान उसने कहा था कि मौसम खराब है और अगले दिन घर लौट आएगी। इसके बाद परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद एक सवाल ये उठ रहा है कि दोस्तों के अनुसार आखिरी बार बबीता को कब देखा गया था? दोस्तों का दावा है कि रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर चली गई थी। वह पेड़ के नीचे बैठकर मोबाइल पर गाने सुन रही थी। सुबह जब उन्होंने उसे फोन किया तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ मिला और वह वहां मौजूद नहीं थी। अब दोस्तो आपको बताता हूं कि परिवार को दोस्तों की कहानी पर क्यों शक है?

दोस्तो इसके जवाब पर गौर कीजिएगा क्योंकि बबीता पांडे के परिवार का कहना है कि जिस स्थान पर बबीता बैठी थी, वहां नेटवर्क भी था और उसके फोन में पर्याप्त बैटरी भी थी। ऐसे में अचानक फोन बंद हो जाना और उसका बिना कोई निशान छोड़े गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है। फिर वो सवाल आताहै कि क्या किसी हादसे या जंगली जानवर के हमले की आशंका है? दोस्तो स्थानीय लोगों और पुलिस की शुरुआती जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो जंगली जानवर के हमले की पुष्टि करता हो। न मोबाइल मिला, न कपड़े, न कोई अन्य सामान। यही वजह है कि परिवार अपहरण समेत अन्य संभावनाओं पर भी सवाल उठा रहा है, लेकिन जब बबीता का पता नहीं चला तो फिर परिवार आखिर क्या मांग कर रहा है? दोस्तो परिवार का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस सुराग नहीं मिलता है तो पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि अब इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए उच्च स्तरीय जांच जरूरी है और दोस्तो फिलहाल सबसे बड़ा सवाल क्या है? वो ये कि बबीता पांडे कहां चली गई। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 13 दिन पहले दयारा बुग्याल में उस रात क्या हुआ था? बबीता कहां गई, किसके साथ गई या उसके साथ कोई हादसा हुआ? इन सवालों के जवाब का इंतजार परिवार ही नहीं, पूरा उत्तराखंड कर रहा है।