जी हां दोस्तो दयारा बुग्याल से बबीता पांडे के अचानक लापता होने के मामले में एक ऐसी खबर सामने आई है, जिस कहने वाले कह रहे हैं कि सर्च एंजेसियों के हाथ लग गया पहला और अहम सुराग। कैसे बबीता पांडे का फोन खोलने लगा है बबीता पांडे की गुमशुदगी के राज। दोस्तो पहली बार आई ये खबर की 200 मीटर दूर तक मोबाइल चला रही थी बबीता, तो फिर अचानक कहां हो गई हवा। दोस्तो दयारा बुग्याल से लापता बबीता पांडे मामले में अब एक ऐसा सुराग सामने आया है, जो इस पूरे रहस्य की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकता है। दोस्तो पुलिस जांच में पता चला है कि जिस रात बबीता गायब हुई, वह अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी और करीब 200 मीटर दूर तक उसकी मोबाइल गतिविधि दर्ज हुई हैं लेकिन लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उस 200 मीटर के बाद क्या हुआ? अगर बबीता फोन चला रही थी, तो फिर अचानक उसका मोबाइल स्विच ऑफ कैसे हो गया? क्या फोन की आखिरी लोकेशन बबीता के गायब होने का राज खोलेगी। कैसे दयारा बुग्याल की उस रात की कहानी में मोबाइल फोन अब सबसे अहम गवाह बनकर उभरा है। दोस्तो जैसा की हम सब जानते हैं उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर की एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश अब उत्तराखंड के हालिया सबसे जटिल सर्च ऑपरेशनों में बदलती दिखाई दे रही है. अब दो हफ्ता होने को है सैकड़ों किलोमीटर क्षेत्र में तलाशी ली जा चुकी है, लेकिन सवाल अभी भी वहीं खड़ा है- आखिर बबीता गई तो गई कहां? पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बबीता के मोबाइल की अंतिम सक्रिय लोकेशन दयारा ट्रेक के पड़ाव गोई क्षेत्र से लगभग 200 मीटर नीचे की ओर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह लोकेशन मोबाइल एप के रात करीब डेढ़ बजे तक सक्रिय रहने के आधार पर ट्रेस की गई यानी तब तक वह अपना मोबाइल चला रही थी। दोस्तो तकनीकी टीमों ने कथित रूप से एल्फा, बीटा और गामा जैसी तकनीकों के आधार पर अंतिम डिजिटल संकेतों का अध्ययन किया है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से इस तकनीकी विश्लेषण का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन फोन अब एक अहम कड़ी होने जा रहा है वो इसलिए क्योंकि परिवार इस बात को लेकर सवाल कर रहा है कि फोन, लोकेशन कॉल डिटेल का क्या हुआ। दोस्तो खबरों के मुताबिक 29 तारीख की रात बबीता अपने साथियों के साथ गोई बेस कैंप में रुकी थी। बताया जा रहा है कि कैंप में उस रात 15 से 16 टेंट और करीब 60-70 लोग मौजूद थे। और दोस्तो चर्चा यह भी है कि किसी बात को लेकर वह साथियों से अलग होकर कुछ दूरी पर चली गई थी। हालांकि इस घटनाक्रम की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इधर, मंगलवार और बुद्धवार को खोज अभियान युद्धस्तर पर जारी रहा. सीओ उत्तरकाशी और बड़कोट पुलिस के नेतृत्व में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, वन विभाग, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, आपदा प्रबंधन क्यूआरटी, डॉग स्क्वाइड, स्थानीय लोगों और गाइडों की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला. तीन अलग-अलग टीमों ने तीन अलग-अलग मार्गों से सर्च ऑपरेशन चलाया, जबकि तीन ड्रोन टीमें ऊपर से लगातार निगरानी करती रहीं। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि करीब 120 से अधिक सदस्य ट्रेक मार्गों, जंगलों, गहरी खाइयों, गदेरों और झाड़ियों में घंटों तक कॉम्बिंग करते रहे। इससे पहले हेली सर्च तक किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ऐसा सुराग नहीं मिला जो जांच को निर्णायक दिशा दे सके। दोस्तो सबसे भावुक तस्वीर रैथल से सामने आई- जहां कई दिनों तक उम्मीद लगाए बैठे परिजन तीन रोज पहले भारी मन से घर लौट चुके हैं, लेकिन सवाल अब भी पहाड़ की चुप्पी में गूंज रहा है। अगर मोबाइल की आखिरी लोकेशन मिल चुकी है। इतने बड़े स्तर पर सर्च हो चुका है तो फिर बबीता अब तक कहां है? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है और खोज अभियान जारी है और परिवार एक बार फिर उत्तरकाशी जा रहा है इस उम्मीद के साथ की बबीता पांडे का कुछ पता चल सके कोई सुराग हाथ लग सके।