दोस्तो उत्तराखंड की सियासत खलबली मची है और अब लगने लगा है कि चुनावी माहौल बन रहा है। BJP एक ऐसे दिग्गज नेता, जिन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को खुली चुनौती देते हुए हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ दी है BJP! जी हां, जहाँ भाजपा खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, उसी पार्टी के भीतर एक पुराने और वफादार सिपाही का गुस्सा ऐसा फूटा है कि देहरादून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है। आगामी चुनाव से ठीक पहले पौड़ी-गढ़वाल में BJP को यह सबसे बड़ा और महा-झटका लगा है! दोस्तो इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा तेज है कि आखिर पौड़ी में क्यों लगा BJP को इतना बड़ा झटका? 32 साल तक जिस नेता ने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया, दरी और चटाई बिछाई, नारे लगाए। आज उसने भरे मंच से बीजेपी आलाकमान से पूछ लिया है कि ‘दरी बिछवा ली, नारे लगवा लिए, तो क्या अब मुझसे बर्तन मंजवाओगे?’ दोस्तो 32 साल तक जिस पार्टी को खून-पसीने से सींचा, जिसके लिए तीन दशकों तक दरी और चटाई बिछाई, नारे लगाए। जब उस पार्टी के बड़े नेताओं ने कद्र करना छोड़ दिया, तो वरिष्ठ नेता का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा! पौड़ी गढ़वाल के दिग्गज नेता भुवनेश खर्कवाल के बयान की बात हो रही है जो आपने सुना। जिन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सामने एक ऐसा तीखा सवाल दाग दिया है जिसने उत्तराखंड बीजेपी की चूलें हिला दी हैं!
खर्कवाल ने सीधे पूछा—’32 साल तक मुझसे दरी चटाई बिछवाई, नारे लगवाए, अब क्या मुझसे बर्तन मंजवाओगे?’ आखिर क्यों एक पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता को पार्टी के भीतर इस कदर जलील होना पड़ा कि उन्होंने सीधे बीजेपी को लात मारकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया? दोस्तो वैसे तो कई ऐसे नेता हैं बीजेपी में लेकिन वो कहते हैं और कुछ ऐसा करते भी नहीं, लेकिन कुछ नेता है जिनका स्वाभिमान डोल रहा है। उत्तराखंड में आगामी चुनावों को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बिसात के बीच बीजेपी को अपने ही पुराने और वफादार सिपाहियों की नाराजगी भारी पड़ने लगी है। दुगड्डा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और साल 2002 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके दिग्गज नेता भुवनेश खर्कवाल ने देहरादून में कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस मुख्यालय में जब प्रदेश बीजेपी के नेता पार्टी की सदस्यता दिलाई, तब खर्कवाल के भीतर सालों से दबा गुस्सा मीडिया के सामने बाहर आ गया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा अब पुराने कार्यकर्ताओं की कब्रगाह बनती जा रही है।
दोस्तो भुवनेश खर्कवाल का यह दर्द कोई आम राजनीतिक बयान नहीं है। यह उस जमीनी कार्यकर्ता की आवाज है जो दशकों तक पार्टी का झंडा उठाकर चलता रहा। खर्कवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संगठन के मुखिया महेंद्र भट्ट को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, ‘पार्टी ने 32 साल तक मुझसे सिर्फ दरी और चटाई बिछवाई, अपनी रैलियों में भीड़ जुटाकर नारे लगवाए। जब सम्मान देने और जिम्मेदारी सौंपने की बारी आई, तो बाहर से आए पैराशूट नेताओं को आगे कर दिया गया। तो क्या अब मैं बीजेपी में सिर्फ बर्तन मांजने के लिए बचा था? दोस्तो यह झटका भाजपा के लिए इसलिए बड़ा है क्योंकि हाल ही में भाजपा कोर कमेटी की बैठकों में कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने और पुराने चेहरों को साधे रखने की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थीं। लेकिन धरातल पर सच कुछ और ही है।
खर्कवाल के कांग्रेस में जाने से पौड़ी गढ़वाल और कोटद्वार-दुगड्डा बेल्ट में भाजपा के कैडर वोट बैंक में बड़ी सेंध लगनी तय मानी जा रही है। कांग्रेस इसे अपनी एक बड़ी रणनीतिक जीत मान रही है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह का दावा है कि भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह और असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि कई और बड़े चेहरे बहुत जल्द कांग्रेस के पाले में दिखने वाले हैं.. दोस्तो भुवनेश खर्कवाल का यह ‘दरी-चटाई और बर्तन’ वाला बयान सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि हर उस राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा सबक है जो अपने पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल सत्ता के रसूखदारों को तवज्जो देते हैं। क्या आपको लगता है कि सीएम धामी और महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में पुराने भाजपाइयों की अनदेखी हो रही है? क्या खर्कवाल का कांग्रेस में जाना गढ़वाल में भाजपा के समीकरण बिगाड़ देगा? अपनी बेबाक राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।