कहा जा रहा था कि मानसून विदाई की ओर है, कहा जा रहा था कि अब पहाड़ शांत हो रहे हैं, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों से तबाही की जो तस्वीरें आज सामने आई हैं, वो आपकी रूह कंपा देंगी! आज सीधे आपदा प्रबंधन विभाग के बड़े अधिकारियों के बयानों के साथ आपको दिखाएंगे पहाड़ों का खौफनाक सच! नमस्कार पैलाग मै पंकज रौतेला आप देख रहे हैं उत्तराखंड न्यूज.. दोस्तो आपने वो कुछ तस्वीरें तो देखी हीं होंगी बाबा केदारनाथ के पावन पैदल मार्ग पर, चिरबासा हेलीपैड के पास अचानक ऐसा लगा मानो आसमान से पत्थरों की बारिश हो गई हो। भारी भूस्खलन और लगातार गिरते बोल्डरों के बीच यात्रा को आनन-फानन में रोकना पड़ा है। जान हथेली पर लेकर दौड़ते यात्री और साए की तरह उनकी रक्षा करती आपदा प्रबंधन की टीमें। पहाड़ों में मानसून भले ही अपने अंतिम दौर में हो, लेकिन जाते-जाते भी यह आफत बनकर बरस रहा है। पिछले दो दिनों से रुद्रप्रयाग जिले से बेहद डरावनी खबरें सामने आ रही हैं। मै आपको इस खबर पूरा बताउं उससे पहले आपको एक हैरान करने वाली तस्वीर दिखाना चाहता हूं। दोस्तो जैसा की आप सब जातने हैं नदियां ऊफान पर हैं ऐसी ही एक रोंगटे खड़ा करनी वाली तस्वीर ये है।
दोस्तो चमोली जिले के कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी में तैरने के बाद एक व्यक्ति बह गया। व्यक्ति के बहने की सूचना पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस का नदी में सर्च ऑपरेशन जारी है। व्यक्ति के परिजनों का कहना है कि व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान था। इधर दोस्तो श्री केदारनाथ धाम के मुख्य पैदल मार्ग पर स्थित चिरबासा हेलीपैड के पास अचानक पहाड़ी दरक गई है। ऊपरी चोटी से लगातार बड़े-बड़े पत्थर और मलबे का गिरना जारी है, जिसने यात्रियों के रास्ते को पूरी तरह रोक दिया। दोस्तो पहाड़ी से पत्थर गिरने की इस लाइव खौफनाक घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए सुरक्षा के लिहाज से यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया है। यात्रियों को बेहद सुरक्षित तरीके से, बंकरों और चट्टानों की आड़ लेकर इस डेंजर जोन से पार कराया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, और स्थानीय पुलिस की टीमें दिन-रात अपनी जान दांव पर लगाकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रही हैं। दोस्तो इस पूरी घटना पर शासन और आपदा प्रबंधन विभाग अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विभाग पल-पल की रिपोर्ट ले रहा है और संवेदनशील रास्तों पर अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक पहाड़ी से पत्थरों का गिरना पूरी तरह बंद नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों को सोनप्रयाग और गौरीकुंड जैसे सुरक्षित स्थानों पर ही रोका जाए। दोस्तो आफत सिर्फ केदारनाथ में ही नहीं है। उत्तराखंड के अन्य पहाड़ी जिलों, जैसे पिथौरागढ़ और चमोली में भी हालात चिंताजनक हैं। पिथौरागढ़ में कई मुख्य मार्ग बंद पड़े हैं और मौसम विभाग ने अभी भी पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली का येलो अलर्ट जारी रखा है। विदाई की तरफ बढ़ता मानसून इस बार ज्यादा आक्रामक रुख दिखा रहा है, जिससे चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं की मुश्किलें चरम पर पहुंच गई हैं। दोस्तो प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रकृति के इस रौद्र रूप के आगे इंसान बेबस नजर आता है। अगर आप या आपके जान-पहचान वाले इस समय केदारनाथ धाम या उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो रुक जाइए! पहले स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की गाइडलाइंस को जरूर चेक कर लें। जान है तो जहान है, बाबा केदार के दर्शन फिर भी हो जाएंगे। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर एक यात्री तक यह जरूरी अलर्ट पहुंच सके।