दोस्तो, उत्तराखंड की सियासत में ऐसा भूचाल आया है कि सवाल सीधे धामी सरकार पर उठ रहे हैं! 210 करोड़ के कथित घोटाले के आरोप, पति के सनसनीखेज दावे और कांग्रेस की CBI जांच की मांग! ऊपर से सांसद अजय भट्ट का बयान— पति-पत्नी का झगड़ा और सुबह की बारिश का क्या भरोसा! आखिर ये सिर्फ घरेलू विवाद है या आरोपों के पीछे कोई बड़ा मामला? आरोपों की पूरी कहानी क्या है और जांच के सवाल पर सरकार का रुख क्या है? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा महा-घोटाले का शोर गूंज रहा है, जिसने सचिवालय से लेकर दिल्ली दरबार तक की चूलें हिला दी हैं! जो लड़ाई चार दिन पहले सिर्फ एक पति-पत्नी के घरेलू क्लेश और मर्डर की साज़िश के लीक ऑडियो तक सीमित थी। आज वो उत्तराखंड के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के कुरुक्षेत्र में बदल चुकी है! कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छाती पर तीखे सवालों के बाण दागते हुए पूछ डाला है कि—‘जब आरोप लगाने वाला कोई ऐरा-गैरा नहीं, बल्कि खुद कैबिनेट मंत्री का पति है, तो सरकार इस 210 करोड़ के काले साम्राज्य की निष्पक्ष जांच कराने से पीछे क्यों भाग रही है?’ और हुक्मरानों का हाल देखिए… पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट इस महा-घोटाले के शोर को महज़ ‘सुबह की बारिश’ बताकर हल्के में उड़ा रहे हैं! क्या वाकई यह सिर्फ एक मियां-बीवी की लड़ाई है, या फिर जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर बनाया गया 210 करोड़ का अकूत महल?
दोस्तो पहाड़ की सियासत में जब आरोपों का बारूद फटता है, तो उसकी गूंज दूर तक जाती है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी द्वारा अपनी ही पत्नी पर 200 से 210 करोड़ रुपये की अकूत बेनामी संपत्ति और भ्रष्टाचार के सनसनीखेज आरोप लगाने के बाद, विपक्ष ने सरकार के खिलाफ चौतरफा चक्रव्यूह रच दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल ने मीडिया के सामने आकर धामी सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ वाली नीति की धज्जियां उड़ा दीं। गोदियाल ने सीधे शब्दों में कहा कि यह कोई मामूली राजनीतिक आरोप नहीं है। जब आरोप लगाने वाला शख्स खुद मंत्री का पति है, जिसने 17 साल तक उनके साथ जीवन बिताया है, तो उसे एक-एक पैसे का सच पता होगा। सरकार को तुरंत आगे आकर बताना चाहिए कि एक कैबिनेट मंत्री के पास 210 करोड़ रुपये की यह अकूत दौलत कहाँ से आई और कैसे आई? दोस्तो गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा सवाल दागा कि आखिर सरकार इस मामले में उच्च स्तरीय या सीबीआई (CBI) जांच बैठाने से पीछे क्यों हट रही है? गोदियाल का साफ़ तर्क है कि जब एक सिटिंग कैबिनेट मंत्री पर उनका अपना ही परिवार इतने बड़े वित्तीय साम्राज्य और काली कमाई के गंभीर आरोप मढ़ रहा हो, तो पूरी सरकार की साख दांव पर लग जाती है। लेकिन दोस्तो एक तरफ जहां सूबे में 210 करोड़ के इस महा-घोटाले का शोर मचा है, वहीं सत्ता पक्ष के एक बेहद कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट का एक ऐसा हैरान करने वाला और अजीबोगरीब बयान सामने आया है, जिसने जनता का सिर चकरा दिया है। जब पत्रकारों ने इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद पर अजय भट्ट से सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही कैजुअल अंदाज़ में मुस्कुराते हुए एक कहावत कह डाली।
भट्ट ने कहा—‘पति-पत्नी की लड़ाई और सुबह की बारिश। कब एक हो जाए या कब बंद हो जाए, इसका कुछ पता नहीं होता!’ वाह साहिब वाह! क्या गज़ब का विज़न है! एक सूबे की महिला मंत्री अपनी जान का खतरा बताकर अस्पताल में भर्ती हैं, उनका पति उन पर 210 करोड़ के घोटाले के सबूत देने की हुंकार भर रहा है, और आपके लिए यह महज़ ‘सुबह की हल्की फुहार’ है जो कभी भी बंद हो सकती है। दोस्तो अजय भट्ट के इस बयान ने इस पूरे मामले को एक नया सियासी और सामाजिक मोड़ दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेता इस पूरे महा-घोटाले को एक ‘घरेलू झगड़ा’ बताकर रफा-दफा करने की साज़िश रच रहे हैं। वे इस इंतज़ार में हैं कि कब दोनों पक्षों के बीच कोई बैक-चैनल समझौता हो जाए, सुबह की बारिश की तरह यह विवाद थम जाए और 210 करोड़ के इस काले साम्राज्य का सच हमेशा-हमेशा के लिए फाइलों में दफन हो जाए। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने भी इसे सीमाएं पार करने वाला पारिवारिक मामला बताया है। लेकिन सवाल वही खड़ा है—क्या 210 करोड़ का यह भ्रष्टाचार सिर्फ एक पारिवारिक मामला है? क्या पति-पत्नी के राजीनामे से यह काली कमाई वैध हो जाएगी? दोस्ोत 210 करोड़ के इस महा-घोटाले के शोर और अजय भट्ट के इस ‘बारिश वाले ज्ञान’ ने यह साफ़ कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिन बेहद विस्फोटक होने वाले हैं। अब देखना होगा कि क्या मुख्यमंत्री धामी अपनी ही मंत्री के खिलाफ खुली जांच कराने की हिम्मत दिखाते हैं, या फिर अजय भट्ट की भविष्यवाणी सच होती है और यह मामला बंद हो जाता है। गणेश गोदियाल की इस कड़े जांच की मांग और अजय भट्ट के इस अजीबोगरीब बयान पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में बेबाकी से बताएं। देवभूमि के इस सबसे बड़े राजनीतिक ड्रामे को पूरे प्रदेश में शेयर करें