Justice For Ankita Bhandari एक ही गूंज… न्याज दो! । Protest । Dushyant Gautam। Uttarakhand News

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दोस्तो, देहरादून की सड़कों पर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर गूंज उठी! ISBT से घंटाघर तक कांग्रेस की बाइक रैली और अब 18 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय मार्च का ऐलान—आखिर इस आंदोलन की अगली रणनीति क्या है? दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध से लेकर अंकिता के माता-पिता के साथ हुए व्यवहार तक, कांग्रेस ने कई सवाल उठाए हैं। क्या दिल्ली तक पहुंचेगी इस आंदोलन की आवाज़? देखिए पूरी रिपोर्ट! “जब इंसाफ का गला घोंटने के लिए सत्ता और खाकी अपनी पूरी ताकत झोंक दें, तो फिर जनता को सड़कों पर उतरकर व्यवस्था के खिलाफ महा-क्रांति का बिगुल फूंकना ही पड़ता है! जी हां! राजधानी देहरादून आज अंकिता भंडारी न्याय युद्ध के एक अभूतपूर्व सियासी बवंडर का गवाह बनी है! कांग्रेस ने आईएसबीटी से लेकर घंटाघर तक एक ऐसी आक्रामक और विशाल बाइक रैली निकाली, जिसने पूरी धामी सरकार की नीद उड़ा दी है! अंकिता के रोते माता-पिता के आंसू और सिक्किम के नए राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध की ये गूंज अब सीधे देश के सर्वोच्च सदन राष्ट्रपति भवन तक जा पहुंची है! हुक्मरान सुन लें… क्योंकि 18 तारीख को दिल्ली के इंडिया गेट पर एक ऐसा महा-न्याय मार्च निकलने जा रहा है, जो सत्ता के घमंड को घुटनों पर ला देगा! दोस्तो पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की मांग अब एक ऐसी दावानल बन चुकी है जिसे दबाना नामुमकिन है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में आज देहरादून की सड़कों पर युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

आईएसबीटी (ISBT) से शुरू हुई यह विशाल बाइक रैली जैसे-जैसे शहर के मुख्य चौराहों से गुजरी, पूरी राजधानी अंकिता के नारों से गूंज उठी। कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ़ था कि रसूखदारों को बचाने के लिए जो खेल खेला जा रहा है, देवभूमि की जनता उसे अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। इस रैली के कारण भयंकर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, जिसने साबित कर दिया कि जनता का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है.. इस सवाल और वार है– बाइट कुमारी शैलजा— दोस्तो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए यह जन-सैलान सीधे देहरादून के ऐतिहासिक घंटाघर पहुंचा। जहाँ इस महा-आंदोलन का समापन ‘पहाड़ के गांधी’ कहे जाने वाले अमर शहीद इंद्रमणि बडोनी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ हुआ। दोस्तो अमर शहीद इंद्रमणि बडोनी जी की प्रतिमा के सामने खड़े होकर कांग्रेस नेताओं ने कसम खाई कि जिस देवभूमि के वजूद के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी, आज उसी देवभूमि की बेटी अस्मिता की रक्षा के लिए वे अंतिम सांस तक लड़ेंगे। करन माहरा ने हुंकार भरते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान को बचाने की जंग है। दोस्तो यह मामला अब सिर्फ उत्तराखंड की घाटियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की महामहिम राष्ट्रपति के दरबार तक पहुंच गया है! कांग्रेस और पीड़ित परिवार ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के खिलाफ सीधे राष्ट्रपति भवन में अपनी गुहार लगाई है। मांग बेहद सख्त है कि जब तक इस हत्याकांड की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संदिग्धों को राजभवन का संवैधानिक कवच न दिया जाए।

दिल्ली में न्याय मांग रहे बुजुर्ग माता-पिता को आधी रात को हिरासत में लिए जाने के शर्मनाक कृत्य ने इस आग में घी का काम किया है, जिससे अब यह लड़ाई सीधे देश की सर्वोच्च सत्ता के खिलाफ खड़ी हो गई है। दोस्तो तो लोग ये कह रहे हैं कि देहरादून का यह महा-प्रदर्शन तो महज़ एक झांकी है, असली फिल्म तो देश की राजधानी दिल्ली में रिलीज़ होने वाली है! आगामी 18 तारीख को दिल्ली के इंडिया गेट पर देशव्यापी ‘महा-न्याय मार्च’ का ऐलान कर दिया गया है! दोस्तो इस मार्च में न सिर्फ उत्तराखंड की जनता, बल्कि दिल्ली के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों के छात्र संगठन, महिला आयोग और देश के शीर्ष विपक्षी नेता एक साथ फुटपाथ पर उतरने जा रहे हैं। ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ के नारे के साथ 18 तारीख को इंडिया गेट पर उमड़ने वाली यह भीड़ सरकार के लिए आखिरी अल्टीमेटम होगी कि वे अंकिता के हत्यारों के आकाओं को बचाना बंद करें, वरना युवा पीढ़ी चुप नहीं बैठेगी। तो दोस्तो देहरादून की सड़कों से उठी यह गूंज अब दिल्ली के सिंहासन को हिलाने के लिए तैयार है। 18 तारीख का यह न्याय मार्च देश की बेटियों की सुरक्षा का नया इतिहास लिखेगा। देहरादून के इस प्रचंड प्रदर्शन और 18 तारीख को दिल्ली में होने वाले इस महा-मार्च पर आपकी क्या राय है? क्या आप भी इस न्याय युद्ध का हिस्सा बनेंगे? हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं। इस वीडियो को पूरे देश में इतना शेयर करें कि हर आंख जाग जाए।