चमोली में 70 नाली अवैध भांग नष्ट!सवाल—भांग नहीं, रोजगार की फसल क्यों नहीं? | Uttarakhand News

Spread the love

“ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान के तहत चमोली जिले के देवाल क्षेत्र (रामपुर तोक) में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक बड़े एक्शन में 70 नाली भूमि पर लहलहा रही अवैध भांग की खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। पुलिस अधीक्षक चमोली के निर्देश पर चलाई गई इस संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में नशे के नेटवर्क को तोड़ना है। हालांकि, इस कार्रवाई ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में एक बार फिर उस पुरानी और गंभीर बहस को हवा दे दी है कि आखिर जिस प्राकृतिक संसाधन को पुलिसिया डंडे से नष्ट किया जा रहा है, उसे ठोस नीतियों के जरिए स्थानीय युवाओं और किसानों के लिए रोजगार व आजीविका की मुख्यधारा की फसल क्यों नहीं बनाया जा रहा है?

विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड 2018 में औद्योगिक भांग (Industrial Hemp) की खेती को कानूनी मान्यता देने वाला देश का पहला राज्य बना था, लेकिन जटिल लाइसेंसिंग प्रक्रिया और प्रमाणित बीजों की कमी के कारण आम पहाड़ी किसानों को आज तक इसका सीधा लाभ नहीं मिल सका है। यदि सरकार कम टीएचसी (THC) वाले बीजों की उपलब्धता को आसान बनाए और आबकारी विभाग के कड़े नियमों का सरलीकरण करे, तो यही भांग टेक्सटाइल, हर्बल दवाओं और पारंपरिक स्थानीय उत्पादों के जरिए पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। जब तक नीतिगत स्तर पर इस ‘कैश क्रॉप’ को आम ग्रामीणों की पहुंच में नहीं लाया जाता, तब तक यह बहुमूल्य संसाधन आजीविका की फसल बनने के बजाय केवल ‘नशे और अपराध’ के दायरे में सिमटकर नष्ट होता रहेगा।