दोस्तो, अंकिता भंडारी केस को लेकर उठ रहे सवाल अब उत्तराखंड की सीमाओं से बाहर भी चर्चा में हैं! सिक्किम यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन ने दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में प्रेस नोट जारी किया है।लेकिन सवाल है—छात्र संगठन ने इस नियुक्ति का विरोध क्यों किया? दोस्तो, अंकिता भंडारी केस की गूंज अब देहरादून से गंगटोक तक पहुंच गई है! दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सिक्किम में भी सवाल उठने लगे हैं। SDF ने पूछा— आखिर जांच पूरी होने से पहले इतनी जल्दबाजी क्यों? अब देखना होगा, इन सवालों पर केंद्र सरकार क्या जवाब देती है! दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड की वो सुलगती हुई आग, जिसे हुक्मरान दिल्ली की सड़कों पर पुलिस के बूटों से कुचलने की कोशिश कर रहे थे, आज वो आग की लपटें बनकर सीधे पूर्वोत्तर के शांत राज्य सिक्किम तक जा पहुंची हैं! जी हां! अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग का समर्थन करने के लिए सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) और सिक्किम की जनता का हार्दिक आभार। यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि मानवता, जवाबदेही और सच्चाई की है। अंकिता को न्याय मिलना चाहिए और इस मांग में हमारा साथ देने वाले हर व्यक्ति की आवाज हमारे लिए मायने रखती है। दोस्तो जो लड़ाई अब तक देवभूमि उत्तराखंड और दिल्ली के इंडिया गेट तक सीमित थी, उसने अब एक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन का रूप ले लिया है! सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संगठन यानी ‘सुसा’ (SUSA) ने 15 अक्टूबर 2026 को एक ऐसा ऐतिहासिक और कड़ा आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर दिया है, जिसने राजभवन से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है!
छात्रों ने साफ़ कह दिया है कि अंकिता मर्डर केस के जिस ‘कथित वीआईपी’ चेहरे पर दाग लगे हैं, उसे वो अपने राज्य का संवैधानिक मुखिया स्वीकार नहीं करेंगे! जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस नियुक्ति को रोको! दोस्तो उत्तरकाशी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी मामले को लेकर कहा कि कांग्रेस के पास आज कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह बेटी अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीति कर रही है.. लेकिन वहीं दूसरी तरफ अंकिता की न्याय की आग देश में फैसलती दिखाई दे रही है। दोस्तोयह देवभूमि की उस अभागी बेटी के न्याय की ताकत है, जिसके सामने अब पूरे देश का छात्र संगठन एकजुट होने लगा है। दोस्तो, अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की आवाज अब सिर्फ उत्तराखंड की सड़कों तक सीमित नहीं है। यह आवाज अब सिक्किम तक पहुंच गई है! दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर अब सिक्किम में भी सवाल उठने लगे हैं। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी SDF ने वीडियो जारी कर इस नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। जब अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP एंगल की जांच अभी पूरी नहीं हुई, तो नियुक्ति को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों? हालांकि, गौतम इन आरोपों से इनकार करते हैं। ऐसे में सवालों के जवाब जांच और तथ्यों के आधार पर सामने आना जरूरी है। दोस्तो अंकिता भंडारी, उत्तराखंड की वह बेटी, जिसके मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। अब इस मामले से जुड़ा राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है।
दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने वीडियो जारी कर अपनी आपत्ति और सवाल सामने रखे हैं। SDF की महिला विंग की प्रभारी उपाध्यक्ष कोमल चामलिंग ने सवाल उठाया है कि इस मुद्दे पर सिक्किम के अपने नेता कहां खड़े हैं? उन्होंने राज्य में राज्यपाल पद पर बार-बार होने वाले बदलावों और नियुक्ति से पहले सिक्किम के लोगों की भावनाओं पर विचार किए जाने को लेकर भी सवाल पूछे हैं। दोस्तो इस पूरे विवाद का केंद्र है अंकिता भंडारी के माता-पिता की ओर से उठाया गया कथित VIP का मुद्दा। दोस्तो अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत गौतम का नाम इस मामले में VIP के तौर पर लिया है। गौतम इन आरोपों को खारिज करते हैं, जबकि इस पहलू को लेकर CBI की जांच पूरी होने की बात सामने नहीं आई है। दोस्तो ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है— क्या इस मामले की जांच पूरी होने तक नियुक्ति को लेकर उठ रही चिंताओं पर सरकार को स्पष्ट जवाब नहीं देना चाहिए? यहां यह साफ करना भी जरूरी है कि किसी का नाम आरोपों में लिए जाने भर से अपराध साबित नहीं होता। लेकिन पीड़ित परिवार की आशंकाओं का जवाब देना और जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करना व्यवस्था की जिम्मेदारी है। दोस्तो अब सवाल सिर्फ देहरादून या दिल्ली का नहीं रहा। सिक्किम से भी आवाज उठ रही है। SDF ने स्थानीय नेतृत्व से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। आखिर सिक्किम के लोगों की भावनाओं को कितना महत्व दिया गया? राज्यपाल पद पर लगातार बदलावों की वजह क्या है? और अंकिता मामले से जुड़े सवालों के बीच इस नियुक्ति को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र सरकार क्या कहेगी?इन सवालों पर सरकार और संबंधित पक्षों का स्पष्ट पक्ष सामने आना जरूरी है।इंडिया गेट से गंगटोक तक अब सवाल एक ही है— अंकिता को न्याय कब मिलेगा और कथित VIP एंगल की जांच का पूरा सच कब सामने आएगा?यह लड़ाई सिर्फ सियासत की नहीं, बल्कि एक परिवार को जवाब मिलने और जांच पर भरोसा कायम रहने की भी है।अंकिता को न्याय मिले— यही मांग है। अब देखना होगा कि उठ रहे इन सवालों पर जिम्मेदार पक्ष क्या जवाब देते हैं।