दोस्तो, वीकेंड पर कैंची धाम जाने का प्लान है तो जरा रुकिए! नैनीताल पुलिस की सख्ती, रेंटल बाइक और टैक्सियों पर रोक और भीमताल-भवाली से शटल सेवा—यानी सफर से पहले नियम जानना बेहद जरूरी है! आखिर कैंची धाम में ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को सख्त एडवाइजरी जारी करनी पड़ी? और क्या पहाड़ों में बढ़ता पर्यटकों का दबाव अब बड़ी चुनौती बन रहा है? देखिए पूरी खबर! दोस्तो अगर आप इस वीकेंड बाबा नीम करोली के दर्शन के लिए कैंची धाम, भवाली या भीमताल जाने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी गाड़ी स्टार्ट करने से पहले रुक जाइए! क्योंकि उत्तराखंड पुलिस ने वीकेंड से ठीक पहले एक ऐसी हाई-अलर्ट ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी है, जिसे जाने बिना अगर आप घर से निकले, तो आपको रास्ते से ही बैरंग वापस लौटा दिया जाएगा! पिछले वीकेंड पर कैंची धाम में जो 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा था, उसके बाद नैनीताल पुलिस ने अब पूरे क्षेत्र को एक तरह से ‘नो-एंट्री ज़ोन’ में तब्दील कर दिया है! चौपहिया वाहनों से लेकर रेंटल बाइक्स तक पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। लेकिन कहानी सिर्फ कैंची धाम की नहीं है—चारधाम यात्रा से लेकर आदि कैलाश तक आज जिस तरह अनियंत्रित पर्यटकों की भीड़ से पहाड़ कराह रहे हैं, वो देवभूमि के अस्तित्व के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है! दोस्तो, पहाड़ों की खूबसूरती देखने के लिए उमड़ती भारी भीड़ और उसी खूबसूरती को बर्बाद करती ये तस्वीरें, दिल को झकझोर देती हैं। मैकलोडगंज हो या हमारे उत्तराखंड के पर्यटन स्थल, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ गंदगी और अव्यवस्था की समस्या भी लगातार चिंता बढ़ा रही है। नियम-कायदे अपनी जगह हैं, लेकिन सवाल ये है कि आखिर जिम्मेदारी कौन समझेगा? जिन पहाड़ों को हम स्विट्जरलैंड जैसा खूबसूरत कहते हैं, उन्हीं पहाड़ों पर प्लास्टिक और कचरा फैलाकर हम उनकी पहचान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। याद रखिए, पहाड़ सिर्फ घूमने की जगह नहीं, हमारी प्राकृतिक विरासत हैं। घूमने आइए, खूबसूरती का आनंद लीजिए, लेकिन अपना कचरा वहीं छोड़कर मत जाइए। क्योंकि पहाड़ साफ रहेंगे, तभी उनकी खूबसूरती आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहेगी। क्या है पुलिस का नया रूट प्लान और क्यों पहाड़ों पर मंडरा रहा है यह संकट?
दोस्तो श्रद्धा और आस्था का केंद्र बाबा नीम करोली का कैंची धाम इस वक्त भारी यातायात दबाव से जूझ रहा है. पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए नैनीताल पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 के लिए एक बेहद सख्त डायवर्जन और ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, सभी प्रकार के भारी वाहनों का आवागमन प्रातः 03:00 बजे से रात्रि 23:00 बजे तक पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. वहीं, बसों और चौपहिया वाहनों के लिए सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित डायवर्जन रूट लागू किया गया है। यानी अगर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से सीधे मंदिर के मुख्य गेट तक पहुंचने की सोच रहे हैं, तो प्रशासन आपके इस इरादे पर पानी फेरने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। दोस्तो पुलिस की इस नई एडवाइजरी का सबसे कड़ा और बड़ा हिस्सा रेंटल स्कूटर्स और टैक्सियों के लिए है। वीकेंड के दौरान कैंची धाम क्षेत्र और नैनीताल में कमर्शियल टैक्सियों व दुपहिया (टू-व्हीलर) वाहनों का आवागमन पूरी तरह बैन रहेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस ने भीमताल विकास भवन एवं भवाली सैनिटोरियम पार्किंग से कैंची धाम के लिए विशेष शटल सेवा की व्यवस्था की है. पर्यटकों को अपनी गाड़ियां इन्हीं निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़ी करनी होंगी और वहां से सरकारी या अनुबंधित शटल बसों के जरिए ही मंदिर तक जाने की अनुमति होगी।
पुलिस ने साफ अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले रूट और पार्किंग की सही जानकारी जरूर लें, वरना सड़कों पर ही आपका वीकेंड बर्बाद हो सकता है। दोस्तो लेकिन सुलगता हुआ सवाल यह है कि आखिर उत्तराखंड को ऐसे सख्त और आपातकालीन ट्रैफिक प्लान क्यों लागू करने पड़ रहे हैं? दरअसल, यह कहानी सिर्फ कैंची धाम की नहीं है। पिछले कुछ सालों में मैदानों से पहाड़ों की ओर उमड़ने वाली अनियंत्रित गाड़ियों के सैलाब ने पूरे उत्तराखंड का दम घोंट दिया है। अभी हाल ही में 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सीमांत क्षेत्र आदि कैलाश में पर्यटकों की भारी भीड़ के चलते चार-चार घंटे का भयानक जाम लग गया था. वहीं केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसी पवित्र चारधाम यात्रा का हाल तो यह है कि यात्रा सीजन शुरू होते ही सोनप्रयाग और ऋषिकेश से ऊपर वाहनों का अंतहीन रेला लग जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कनेक्टिविटी बढ़ी, सड़कें चौड़ी हुईं, लेकिन इसके साथ ही पहाड़ों की संवेदनशीलता को पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया गया। दोस्तो पहाड़ों की अपनी एक भौगोलिक क्षमता होती है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (Carrying Capacity) कहा जाता है। लेकिन आज न तो पर्यटकों को इस क्षमता का ख्याल है और न ही हमारे कमर्शियल सिस्टम को। जैसे ही कोई लंबा वीकेंड आता है, दिल्ली, नोएडा, पंजाब और हरियाणा से हजारों गाड़ियां पहाड़ों की संकरी छाती को कुचलने के लिए दौड़ पड़ती हैं। लगातार बजते तीखे हॉर्न, गाड़ियों से निकलता ज़हरीला धुआं, धूल, प्लास्टिक का कचरा और पर्यटकों का हुड़दंग—मानो शांत देवभूमि चीख-चीखकर कह रही हो कि ‘अब बस करो, अब और झेला नहीं जाता।’ पर्यावरणविदों की चेतावनी है कि अगर कैंची धाम और चारधाम में पर्यटकों की प्रतिदिन की संख्या को अमरनाथ या वैष्णो देवी की तर्ज पर सीमित (कैप) नहीं किया गया, तो जोशीमठ जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदाएं हमारे पहाड़ों को लीलने के लिए तैयार बैठी हैं। दोस्तो पुलिस की यह नई एडवाइजरी एक बहुत बड़ा अलर्ट है कि पहाड़ों को अब सिर्फ एक ‘टूरिस्ट स्पॉट’ की तरह देखना बंद करना होगा। बाबा नीम करोली के दर्शन के लिए जरूर जाएं, लेकिन पहाड़ों की मर्यादा, मर्यादा और पुलिस के इस ट्रैफिक प्लान का सम्मान करते हुए ही घर से निकलें। क्या आपको भी लगता है कि उत्तराखंड सरकार को पहाड़ों में आने वाली गाड़ियों की संख्या पर एक परमानेंट कैप या सीमा लगा देनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं।