इस वक्त की एक बेहद बड़ी और परेशान करने वाली खबर उत्तराखंड के चमोली जिले से आ रही है। देवभूमि में एक बार फिर एक बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा होने की खबर से हड़कंप मच गया है। बद्रीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर देहरादून आ रहा एक हेलीकॉप्टर अचानक लापता हो गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बद्रीनाथ और जोशीमठ के बीच हवा में ही हेलीकॉप्टर का एटीसी और रडार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। दोस्तो चमोली के आसमान में अचानक क्या हुआ? बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा एक हेलीकॉप्टर लापता होने की खबर से हड़कंप मच गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे और जोशीमठ के पास चाई गांव के पहाड़ी इलाके में उससे संपर्क टूटने की सूचना है। क्या हेलीकॉप्टर की सुरक्षित लैंडिंग हुई है या किसी अनहोनी की आशंका है? खराब मौसम के बीच प्रशासन और राहत एजेंसियां जानकारी जुटाने में लगी हैं। आखिर कहां है हेलीकॉप्टर और छहों लोगों का क्या अपडेट है? इन सब सवालों के बीच शुरुआती तस्वीर सिर्फ इतनी है। दोपहर करीब 2:15 बजे बद्रीनाथ से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद, भारी बर्फबारी और खराब मौसम के बीच इस हेलीकॉप्टर का रडार से संपर्क टूट गया था। दोस्तो हादसे की भयावहता को देखते हुए भारतीय सेना की स्थानीय यूनिट ने तुरंत चमोली के जिला प्रशासन और डीएम को इसकी सूचना दी है। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत कुल छह लोग सवार थे, और अभी तक पायलट से कोई संपर्क नहीं हो सका है। आखिर इतने खराब मौसम और बर्फबारी के बावजूद इस हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति किसने दी? क्या यह सीधे-सीधे लापरवाही का मामला है? देवभूमि उत्तराखंड की वादियों से दोपहर होते-होते एक ऐसी खबर आई जिसने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया। तारीख 30 अक्टूबर, समय दोपहर के ठीक 2 बजकर 15 मिनट।
बद्रीनाथ धाम से छह जिंदगियों को समेटे एक हेलीकॉप्टर जोशीमठ की तरफ उड़ान भरता है। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद, आसमान में छाए घने कोहरे और अचानक शुरू हुई भारी बर्फबारी के बीच इस बदकिस्मत हेलीकॉप्टर का एटीसी और रडार से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। दोस्तो हेलीकॉप्टर के लापता होने की खबर जैसे ही फैली, चमोली जिले में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर बाद, सीमा पर तैनात भारतीय सेना की यूनिट ने एक बेहद डरावनी सूचना चमोली के जिलाधिकारी को दी। सेना की तरफ से बताया गया कि हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास दुर्गम पर्वतीय इलाके ‘चाई गांव’ में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।। यहां देखिए प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम धामी ने एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, पोस्ट लगाना(चाई गांव, जोशीमठ के निकट हेलीकॉप्टर क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण सूचना प्राप्त हुई है। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।स्वयं भी पूरे घटनाक्रम की निरंतर निगरानी कर रहा हूं। गंभीर रूप से घायलों को तत्काल एयरलिफ्ट कर बेहतर उपचार हेतु हायर सेंटर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।ईश्वर से यात्रियों के सकुशल होने की कामना करता हूं। दोस्तो इधर सेना की इस सूचना के बाद चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने तुरंत आपदा प्रबंधन की टीमों, स्थानीय पुलिस और मेडिकल रेस्क्यू रिलीफ को चाई गांव की तरफ रवाना कर दिया। लेकिन रास्ता बेहद संकरा और पहाड़ी होने के कारण रेस्क्यू टीमों को मौके पर पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दोस्तो प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस हेलीकॉप्टर में एक पायलट और 5 यात्री, यानी कुल छह लोग सवार थे। ये सभी यात्री बद्रीनाथ धाम में भगवान विशाल के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। सेना और स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, क्रैश की स्थिति बेहद गंभीर है। सबसे ज्यादा चिंता हेलीकॉप्टर के पायलट को लेकर बनी हुई है, क्योंकि क्रैश के बाद से पायलट से किसी भी माध्यम से संपर्क नहीं साधा जा सका है। चमोली के डीएम गौरव कुमार खुद पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं और सेना के साथ मिलकर एक जॉइंट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि मलबे तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। लेकिन दोस्तो इस भयंकर हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान चल रहे एविएशन सर्विस के सुरक्षा मानकों पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आज सुबह से ही बद्रीनाथ और केदारनाथ के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बेहद खराब था और लगातार बर्फबारी की चेतावनियां जारी की जा रही थीं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब मौसम उड़ान के अनुकूल नहीं था, विजिबिलिटी शून्य के करीब थी, तो फिर किस आधार पर इस प्राइवेट हेलीकॉप्टर को टेक-ऑफ करने का क्लियरेंस दिया गया? क्या चंद रुपयों के मुनाफे के लिए हर बार यात्रियों की जान को दांव पर लगाया जाता रहेगा? सावल कई हैं लेकिन कुछ ऐसे है। सवाल 1, जब मौसम विभाग ने पहले ही बर्फबारी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया था, तो उड़ान की अनुमति क्यों दी गई? सवाल 2, क्या चाई गांव जैसे संवेदनशील और संकरे रूट पर सेफ्टी ऑडिट की अनदेखी की गई? सवाल 3 उत्तराखंड के पर्वतीय रूटों पर नेविगेशन और एंटी-क्रैश सिस्टम को अपग्रेड क्यों नहीं किया जाता? दोस्तो फिलहाल, ग्राउंड जीरो यानी चाई गांव में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बर्फबारी और तेज हवाओं के चलते रेस्क्यू हेलीकॉप्टर्स का वहां पहुंच पाना नामुमकिन है, इसलिए सेना और प्रशासन के जवान पैदल ही मलबे और घायलों की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं। पूरा देश इस वक्त दुआ कर रहा है कि हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह जिंदगियां सुरक्षित हों। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देवभूमि के आसमान में उड़ने वाले इन उड़नखटोलों पर जब तक सख्त नियम लागू नहीं होंगे, तब तक आस्था का यह सफर इसी तरह जोखिम भरा बना रहेगा। दोस्तो जोशीमठ के चाई गांव से आ रही ये तस्वीरें वाकई डराने वाली हैं। मौसम की खराबी ने एक हंसते-खेलते सफर को बड़ी त्रासदी में बदल दिया है। भारतीय सेना और जिला प्रशासन की टीमें इस वक्त कड़कड़ाती ठंड में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। इस हादसे से जुड़ी पल-पल की अपडेट, यात्रियों की स्थिति और ब्लैक बॉक्स से जुड़े हर एक खुलासे को हम आप तक सबसे पहले पहुंचाते रहेंगे, लेकिन दोस्तो इस खबर को आप कैसे देखते हैं कमेंट कर जरूर बताएँ।