Dayara Bugyal से बड़ी खबर! | Babita Pandey | Uttarkashi | Forest Department | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो एक खबर दयारा बुग्याल से आई है, वही दयारा बुग्याल जहां से रामनगर की बेटी बबीता पांडे एक महीने से गायब है, लेकिन जो खबर अब निकल कर आई है वो बेहद खूबसूरत दिखाई देने वाले बुग्याल के लिए बड़ा सवाल है और खतरे की घंटी भी बजा रहा है। मै बताउंगा आपको कैसे दयारा से आई इस नई बड़ी खबर ने सबको चौका दिया है और तमाम ट्रैकर्स और पहाड़ प्रेमियों कि चिंताओं को बढा दिया है बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तों, उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से बबीता पांडे के लापता होने का मामला लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच उसी इलाके से एक नया घटनाक्रम सामने आया है, वो में बताने के लिए आया हूं। क्या उत्तराखंड का खूबसूरत दयारा बुग्याल किसी बड़े पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ रहा है? क्या मखमली घास के मैदान अब धीरे-धीरे गहरी खाइयों में बदलते जा रहे हैं? और अगर ऐसा ही चलता रहा, तो क्या आने वाले समय में इस विश्व प्रसिद्ध बुग्याल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है? दोस्तों, उत्तरकाशी का दयारा बुग्याल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मखमली घास के मैदानों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन अब यही बुग्याल लगातार हो रहे भूस्खलन की वजह से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कई स्थानों पर घास के मैदान टूटकर गहरी खाइयों में तब्दील हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ-साथ वन विभाग की भी चिंता बढ़ गई है और और इस खुबसूरती के के पीछे अभी भी बबीता पांडे की गुमशुदगी का राज छिपा है।

दोस्तो अब खबर ये कि विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल लगातार बढ़ते भू-धंसाव और भूस्खलन की चपेट में है। करीब 406 हेक्टेयर में फैले इस हिमालयी घास के मैदान में जगह-जगह गहरी खाइयां बनने लगी हैं, जिससे न केवल बुग्याल की जैव विविधता और प्राकृतिक स्वरूप पर संकट गहरा गया है, बल्कि हर वर्ष पापड़गाड घाटी में मलबा पहुंचने से निचले क्षेत्रों में भी आपदा का खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक संरक्षण योजना लागू करने की मांग उठाई है। दोस्तो यहां स्थानी जन प्रतिनिधि कहते हैं कि साल 2012-13 की आपदा के बाद से भू-धंसाव होने के कारण खतरा बना हुआ था, लेकिन पिछले दो तीन वर्षों से बुग्याल के धियाणा बुग्याल के पास नहेटा और चिलपाड़ा में भूक्षरण के कारण खाईयां बननी शुरू हो गई है। यहां से निकलने वाला मलबा हर वर्ष पापड़गाड में आपदा का रूप बनकर आ रहा है। दोस्तो दयारा बुग्याल समुद्रतल से करीब ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पिछले कुछ वर्षों में बुग्याल के निचले इलाकों धियाणा, बरनाला, गोई समेत नहेटा और चिलपाड़ा आदि क्षेत्र में तेजी से भू-धंसाव होने के कारण वहां पर बड़ी-बड़ी खाईयां तैयार हो रही हैं। इसके अलावा लोग ये कहतेहैं कि बुग्याल क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव का असर रैथल और क्यारक गांव समेत गंगोत्री हाईवे तक देखने को मिल रहा है. कई संपत्तियां इस कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

दोस्तो इससे दयारा बुग्याल के जैव विधिधता पर भी असर पड़ रहा है. हालांकि वन विभाग की ओर से साल 2020 में वहां पर भारतीय वन्यजीव संस्थान और यूसैक की ओर से इको फ्रेंडली तरीके से करीब छह सौ मीटर क्षेत्र में जूट व नारियल के रेसों से बने केयर नेट व पिरूल के चेक डैम बनाकर रोकने की कोशिश की गई। यह उस क्षेत्र में सफल भी रहा, लेकिन साल 2024 और 25 में बुग्याल के अन्य क्षेत्रों नहेटा सहित चिलपाड़ा आदि में सबसे अधिक भूस्खलन और भू-धंसाव देखने को मिला है। वन विभाग वाले कहते हैं कि वन विभाग की ओर से लगातार जूट केयर नेट आदि के माध्यम से बुग्याल संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है. पूर्व में किए गए सुरक्षात्मक कार्य सफल रहा था। इसी तर्ज पर पर भारतीय वन्य जीव संस्थान और विशेषज्ञों के साथ मिलकर दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। दोस्तो लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण बुग्याल क्षेत्र में बन रही खाईयों से बहने वाली मिट्टी पापड़गाड नदी में बह रही है। नहेटा में घने जंगलों में भी भू-धंसाव व भूस्खलन के कारण वन संपदा क्षतिग्रस्त हो रही है। दूसरी ओर दयारा बुग्याल ट्रैक के मुख्य पड़ाव धियाणा, बरनाला, गोई आदि तोक के बुग्यालों में खले मैदानों ने बड़ी खाईयों का रूप ले लिया है। वहीं बार्सू प्रधान दीपा रावत का कहना है कि बरनाला क्षेत्र में भी भू-धंसाव व भूस्खलन तेजी से दिख रहा है। इसके लिए वन विभाग से दूरगामी योजना बनाने की मांग की गई है। एक तरफ दोस्तो दयारा बुग्याल से बबीता पांडे गायब हो गई। वहीं अब दयारा की खूबसूरती को भी नुकसान हो रहा है। दोस्तो अपने उत्तराखंड के बुग्याल हमारी धरोहर है। इनको संभाल पाने में हमारा आज का सिस्टम हमारी आज की पीड़ी कितनी सक्षम है अप अपनी राय खबपर को लेकर जूर दीजिएगा।