Chamoli Pipalkoti केस मुआवजे पर मजदूरों का फूटा गुस्सा! | THDC | Workers Protest | Uttarakhand News

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क्या गरीब और मजदूर वर्ग की जान की कीमत इतनी सस्ती हो चुकी है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां चंद रुपयों का टुकड़ा फेंककर अपना पल्ला झाड़ लें? उत्तराखंड के चमोली में हुए पीपलकोटी टनल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, लेकिन दुखद बात यह है कि इस भयावह त्रासदी के बाद भी कंपनी संवेदनहीन बनी हुई है! महज 5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान सुनकर टनल के बाहर श्रमिकों का गुस्सा बारूद की तरह फट पड़ा। मजदूरों ने कंपनी का घेराव कर सीधे अल्टीमेटम दे दिया है—’मुआवजा 1 करोड़ होना चाहिए और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कंपनी उठाए, वरना काम ठप रहेगा! दूसरी तरफ, टनल के भीतर रेस्क्यू ऑपरेशन का क्या स्टेटस है और जिले के प्रभारी मंत्री भरत चौधरी ने इस पर क्या बड़ा बयान दिया है? चलिए आपको दिखाते हैं इस बेहद आक्रामक और झकझोर देने वाली खबर को बताता हूं।

दोस्तो चमोली जनपद के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में हुए खौफनाक हादसे के बाद अब ग्राउंड जीरो पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। हादसे में जान गंवाने वाले गरीब मजदूरों के लिए जब निर्माण कंपनी ने महज 5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया, तो वहां मौजूद सैकड़ों श्रमिकों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित मजदूरों ने कंपनी के मुख्यालय का घेराव कर दिया और जमकर नारेबाजी की। मजदूरों की साफ और दोटूक मांग है कि मृतकों के परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और उनके अनाथ हुए बच्चों की पूरी पढ़ाई का खर्च कंपनी वहन करे। मजदूरों का कहना है कि वे अपनी जान हथेली पर रखकर टनल के अंदर काम करते हैं, और उनकी जान इतनी सस्ती नहीं है। इधर दोस्तो इस पूरे मामले पर सरकार और जिला प्रशासन की टीमें भी पूरी तरह मुस्तैद हैं। चमोली जिले के प्रभारी मंत्री भरत चौधरी ने इस भीषण टनल हादसे को लेकर आधिकारिक आंकड़े जारी किए हैं। मंत्री भरत चौधरी के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद जिला प्रशासन और SDRF की टीमों ने टनल के भीतर युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टनल के मलबे और पानी के बीच से अब तक कुल 20 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से 12 श्रमिकों को बेहद मुश्किल हालातों से सकुशल जिंदा बाहर निकाला गया और तुरंत उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। लेकिन बेहद दुखद बात यह है कि इस हादसे में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है।

दोसतो मंत्री भरत चौधरी के बयान के मुताबिक, टनल के भीतर अभी भी दो मजदूर फंसे हुए हैं, जो लापता हैं। समय बीतने के साथ ही उनके परिजनों की सांसें अटक रही हैं। बचाव दल पूरी तत्परता के साथ दोनों लापता लोगों की तलाश में टनल के आखिरी छोर तक सर्च ऑपरेशन चला रहा है। पूरा उत्तराखंड आज इन दोनों जिंदगियों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा है। लेकिन इस प्रार्थना के बीच यह बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि पहाड़ों में टनल निर्माण के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आखिर क्यों नहीं किए जाते? क्यों हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटती है? दोस्तो पीपलकोटी का यह हादसा एक बहुत बड़ा सबक है। कंपनी को 5 लाख के इस मजाक को छोड़कर मजदूरों की जायज मांगों को तुरंत सुनना चाहिए और मृतकों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देना चाहिए। साथ ही, प्रार्थना करें कि टनल में फंसे वो दो भाई भी जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर आ जाएं। इस खबर पर और कंपनी के इस रवैये पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें। इन गरीब मजदूरों के हक की आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए इस वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर सबसे ज्यादा शेयर करें। हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।