दोस्तो, श्रीनगर-पौड़ी में सियासी समीकरणों को लेकर सवाल उठे ही थे कि अब BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अपने गढ़ में छात्रसंघ चुनाव ने नया संदेश दे दिया!आखिर भट्ट के पैतृक ब्लॉक पोखरी में ABVP को शिकस्त कैसे मिली? क्या युवाओं के बीच बदल रहा है सियासी मूड?क्या 2027 से पहले एक के बाद एक नतीजे BJP के लिए नई चुनौती का संकेत दे रहे हैं?श्रीनगर-पौड़ी के बाद अब भट्ट के घर में सेंध। आखिर ये सिर्फ छात्रसंघ चुनाव है या आने वाले सियासी तूफान की आहट? दोस्तो सूबे में हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है, लेकिन सबसे बड़ा उलटफेर हुआ है चमोली जिले के नागनाथ पोखरी में! जी हां, दोस्तो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के गृह क्षेत्र में एबीवीपी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. यहां ‘आर्यन’ छात्र संगठन ने ऐसा सियासी दांव चला कि एबीवीपी का किला पूरी तरह ढह गया। प्रदेश अध्यक्ष के अपने ही ब्लॉक और क्षेत्र में छात्र संगठन की यह हार बीजेपी आलाकमान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। आखिर कैसे छात्र राजनीति के इस गढ़ में पासा पलट गया? इसका जवाब बीजेपी वाले खोज रहे हैं। दोस्तो पीजी कॉलेज नागनाथ पोखरी के छात्र संघ चुनाव में आर्यन ग्रुप का दबदबा रहा । इसको कुछ इस तरह से समझिए- पीजी कॉलेज नागनाथ पोखरी के छात्रसंघ चुनाव परिणाम में अध्यक्ष पद पर आर्यन ग्रुप के राहुल सिंह ने ABVP के शिवम पंत को 38 मतों से पराजित कर जीत दर्ज की। राहुल सिंह को 176, जबकि शिवम पंत को 138 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर आर्यन ग्रुप की दिव्या ने ABVP की रितिका को 74 मतों से हराया। दिव्या को 186 और रितिका को 112 मत मिले। सात मत नोटा और 14 मत अवैध पाए गए। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद पर आर्यन ग्रुप के प्रियांशु नेगी विजयी हुए। उन्हें 181 मत मिले, जबकि ABVP के अखिल सिंह को 125 मत प्राप्त हुए। ऐसा ही हाल कुछ और पदों पर भी रहा है।
दोस्तो उत्तराखंड के महाविद्यालयों में हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने सूबे की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. जहां एक तरफ पूरे प्रदेश में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी के सबसे बड़े संगठनकर्ता और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अपने ही घर में एबीवीपी को तगड़ा झटका लगा है। चमोली जिले के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में छात्रसंघ चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं, उसने बीजेपी खेमे में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यहां स्थानीय स्तर पर दबदबा रखने वाले आर्यन छात्र संगठन ने एबीवीपी को चारों खाने चित कर दिया है। दोस्तो नागनाथ पोखरी पीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प था। मुख्य लड़ाई एबीवीपी और आर्यन ग्रुप के बीच मानी जा रही थी, लेकिन जब मतपेटियां खुलीं तो पासा पूरी तरह पलट चुका था. आर्यन ग्रुप के राहुल सिंह ने अध्यक्ष पद पर एकतरफा और शानदार जीत हासिल की। राहुल सिंह की इस जीत के साथ ही आर्यन संगठन ने कॉलेज के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी अपना परचम लहरा दिया और एबीवीपी का सूपड़ा साफ कर दिया। दोस्तो इस हार के मायने इसलिए बड़े हैं क्योंकि पोखरी ब्लॉक खुद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का पैतृक क्षेत्र है। महेंद्र भट्ट का जन्म इसी पोखरी ब्लॉक के ब्राह्मणथला गांव में हुआ था और उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत भी साल 1991 में इसी एबीवीपी संगठन से की थी। और दोस्तो महेंद्र भट्ट खुद एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री और जिला संगठन मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके हैं। ऐसे में छात्र राजनीति के माहिर खिलाड़ी के अपने ही गृह क्षेत्र में विद्यार्थी परिषद का इस तरह चुनाव हार जाना, स्थानीय बीजेपी संगठन के तालमेल और पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इधर दोस्तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नागनाथ पोखरी की यह हार केवल एक कॉलेज का चुनाव नहीं है। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं के इस रुख को भांपना बेहद जरूरी है। चमोली जैसे पहाड़ी जिलों में स्थानीय युवाओं के भीतर रोजगार, कॉलेजों में फैकल्टी की कमी और स्थानीय मुद्दों को लेकर जो नाराजगी थी, उसे भुनाने में आर्यन संगठन पूरी तरह कामयाब रहा। विपक्ष भी अब इस मुद्दे को लेकर हमलावर है और उसका कहना है कि जब प्रदेश अध्यक्ष अपने ही क्षेत्र के युवाओं का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं, तो पूरे प्रदेश का युवा उनके साथ कैसे खड़ा होगा? बहरहाल, पोखरी पीजी कॉलेज में आर्यन संगठन की इस जीत ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है. वहीं, एबीवीपी और बीजेपी के लिए यह आत्ममंथन का समय है कि आखिर प्रदेश अध्यक्ष के ही प्रभाव वाले क्षेत्र में उनसे कहां चूक हो गई।