दोस्तो, उत्तराखंड BJP में ऐसा क्या हुआ कि चुनाव से ठीक पहले चकराता के दिग्गज नेता रामशरण नौटियाल ने पार्टी से किनारा कर लिया?क्या सियासी उपेक्षा और अंदरूनी खींचतान बनी इस्तीफे की वजह?और सबसे बड़ा सवाल—देर रात कांग्रेस विधायक के घर 4 घंटे चली वोसीक्रेट मीटिंग आखिर किस बात का इशारा है?क्या रामशरण नौटियाल फिर कांग्रेस का हाथ थामने की तैयारी में हैं?क्या मिशन 2027 से पहले उत्तराखंड की सियासत में होने वाला है बड़ा उलटफेर?देखिए, पूरी कहानी, इस बड़ी सियासी हलचल के पीछे आखिर क्या है? दोस्तो खबर ये है कि विधानसभा चुनाव 2027 के ठीक पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को एक ऐसा झटका लगा है, जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है। जी हां, दोस्तो सुरों के बेताज बादशाह और मशहूर बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है! चकराता विधानसभा से बीजेपी के कद्दावर चेहरा रहे रामशरण नौटियाल ने आखिर अचानक चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा क्यों दिया? इस इस्तीफे के पीछे क्या कोई बड़ी सियासी इनसाइड स्टोरी है या फिर जौनसार-बावर क्षेत्र में कोई नया समीकरण तैयार हो रहा है? इन सवालों के जवाब अब तलासे जाने लगे हैं।
दोस्तो ऐसा सियासी तूफान उठा है, जिसने पूरी बीजेपी को बैकफुट पर ला खड़ा किया है। जौनसार-बावर क्षेत्र के कद्दावर नेता रामशरण नौटियाल ने मंगलवार को बीजेपी को अलविदा कह दिया। उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने पार्टी आलाकमान को हैरान कर दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने आधिकारिक पत्र में इस्तीफे की स्पष्ट वजह का खुलासा नहीं किया, लेकिन सियासी गलियारों की मानें तो वह लंबे समय से स्थानीय नेताओं की आपसी राजनीतिक खींचतान और अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे थे, दोस्तो अब बीजेपी वालों को कोई जानकारी नहीं है, लेकिन जिस नेता को लेकर खबर है वो रामशरण नौटियाल कोई आम नाम नहीं हैं। वह देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और जौनसार-बावर के जनजातीय इलाके में उनका खासा रसूख है। साल 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें चकराता सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रीतम सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा था। उस चुनाव में रामशरण नौटियाल को 27 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और वे दूसरे नंबर पर रहे थे। खुद बॉलीवुड स्टार जुबिन नौटियाल ने अपने पिता के लिए पहाड़ों में घूम-घूमकर वोट मांगे थे। लेकिन आज, आगामी चुनाव से महज कुछ महीने पहले उनका पार्टी छोड़ना बीजेपी के लिए चकराता और गढ़वाल क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्षति माना जा रहा है। इधर दोस्तो इस इस्तीफे की टाइमिंग ने उत्तराखंड की राजनीतिक सस्पेंस को बढाया है।
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्तीफा देने से ठीक पहले रामशरण नौटियाल देर शाम करीब 4 घंटे तक एक कांग्रेस विधायक के घर पर बैठे रहे। दोस्तो इस गुप्त बैठक के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रामशरण नौटियाल का पुराना इतिहास भी कांग्रेस से जुड़ा रहा है। वह साल 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ऐसे में अब यह पूरी संभावना जताई जा रही है कि वे बहुत जल्द वापस कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं और चकराता के सियासी समीकरण को पूरी तरह से बदल सकते हैं। दोस्तो रामशरण नौटियाल के इस कदम ने बीजेपी संगठन के भीतर के असंतोष को भी उजागर कर दिया है। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के भीतर कुछ स्थानीय नेताओं की मनमानी और गुटबाजी से बेहद खफा थे और साल 2023 से ही उनके सुर पार्टी नीतियों के खिलाफ सुनाई दे रहे थे। हालांकि, बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट इस पूरे मामले पर आधिकारिक जानकारी न होने की बात कहकर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि चुनाव से ठीक पहले एक बड़े चेहरे का जाना पार्टी के “मिशन 2027” के चुनावी रथ को डगमगा सकता है। दोस्तो अब पूरे उत्तराखंड की नजरें रामशरण नौटियाल के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या वे कांग्रेस में घर वापसी करेंगे, या फिर कोई नया मोर्चा खोलकर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात साफ है कि जुबिन नौटियाल के पिता के इस ‘सियासी सुर’ ने उत्तराखंड बीजेपी की तान जरूर बिगाड़ दी है। दोस्तो तो क्या अब उत्तराखंड की राजनीति को हिला देने वाली खबरें आने की शुरुआत हो चुकी है। रामशरण नौटियाल के इस इस्तीफे के बाद चकराता से लेकर पूरी देवभूमि की राजनीति में क्या नए बदलाव आते हैं, हालांकि खबर ये भी है कि बहुत जल्द खुद रामशरण नौटियाल प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं देखना होगा कि वो क्या कहते हैं लेकिन आप क्या कहेंगे वो कमेंट के जरिए बताना।