Chamoli THDC Tunnel अचानक पानी आया फिर मच गई चीख-पुकार! | Workers | Peepalkoti | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या आपने कभी मौत को इतने करीब से देखा है कि आपके पास सांस लेने के लिए सिर्फ कुछ सेकंड बचे हों? चमोली के पीपलकोटी टनल हादसे से सुरक्षित बाहर निकले मजदूरों की जुबानी जब आप अंदर का खौफनाक सच सुनेंगे, तो आपकी रूह कांप जाएगी। कैसे अचानक आए पानी दी चीख पुकार। Chamoli Tunnel Accident बताउंगा आपको मौत के मुंह से बाहर आए मजदूर ने क्या कहा। जी हां दोस्तो 13 अगस्त की शाम जब टनल के अंदर ड्रिलिंग और वेल्डिंग का काम चल रहा था, तब अचानक एक ऐसी गड़गड़ाहट हुई जिसने टनल को पाताल लोक बना दिया। डेढ़ किलोमीटर अंदर अचानक पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि मजदूरों को भागने तक का रास्ता नहीं मिला। कैसे घुटनों तक गहरे कीचड़ और जानलेवा दलदल के बीच 19 जिंदगियां मौत के मुंह से वापस लौटकर आईं! दोस्तो, हादसा बिरही नदी के पास टनल के मुहाने से करीब 1.5 किलोमीटर अंदर हुआ। पहाड़ी धंसने की वजह से लाखों गैलन पानी और मलबा सीधे टनल के भीतर घुस गया। देखते ही देखते पूरी सुरंग एक नदी में तब्दील हो गई, जो मजदूर जहाँ काम कर रहे थे, पानी का तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहाकर टनल के एग्जिट पॉइंट की तरफ फेंकने लगा। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और घुप्प अंधेरा था। टनल के अंदर मौजूद हैवी मशीनें और लोहे के गर्डर ताश के पत्तों की तरह बहने लगे।

दोस्तो जो बच गए वो बता रहे हैं कैसे बची जान उनको भी नहीं पता। कहते हैं कि, हम लोग सरिया वेल्डिंग कर रहे थे, तभी अचानक बहुत जोरदार धमाका हुआ। हमें लगा कि कोई सामान्य ब्लास्टिंग है, लेकिन अगले ही पल काला पानी और भारी कीचड़ हमारी तरफ बढ़ा। बहाव इतना तेज था कि मैं करीब 3 मिनट तक पूरी तरह पानी के अंदर डूबा रहा। जब पानी थोड़ा कम हुआ, तो मैंने पहले अपने हाथ-पैर हिलाकर चेक किया कि मैं जिंदा हूँ या मर गया! जब होश आया, तो मैंने मदद के लिए चिल्लाना शुरू किया। चारों तरफ मेरे साथी मलबे में दबे हुए थे। दोस्तो कैसे रहा होगा वो मंजर जब लोगों को सांस तक लेने में दिक्कतें आ रही होंगी। इधर हादसे की खबर मिलते ही सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं। रात के अंधेरे और लगातार हो रही बारिश के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर जमा घुटनों तक गहरा वो दलदल था, जिसमें पैर रखते ही जवान धंस रहे थे। इसके बावजूद, जवानों ने टनल के पाइपों और कंक्रीट के बीच फंसे 19 मजदूरों को रात भर चले ऑपरेशन में सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, इस भीषण तबाही में 7 मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी और उनके शव रिकवर कर लिए गए हैं, जबकि 3 अब भी लापता बताए गए। दोस्तो पीपलकोटी टनल से सही-सलामत लौटे मजदूरों के लिए ये किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। लेकिन जो 7 मजदूर इस हादसे का शिकार हो गए, उनके परिवारों के आंसू कौन पोछेगा? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद नजर बनाए हुए हैं और घायलों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। मगर सवाल वही है—आखिर इन टनल प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले से क्यों नहीं किए जाते? क्यों बार-बार मजदूरों की जान को दांव पर लगाया जाता है? इस हादसे पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।