Congress Yatra आज Badrinath से गोल्ज्यू दरबार तक।Ankita Bhandari। Dushyant Gautam।Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड में आज सियासत गरम है! अंकिता भंडारी केस से लेकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति तक, कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए अब न्याय यात्रा का ऐलान कर दिया है। 22 अक्टूबर से बद्रीनाथ और गोल्ज्यू दरबार से उठेगी कांग्रेस की हुंकार! लेकिन सवाल ये है—क्या इस यात्रा से अंकिता को न्याय दिलाने की आवाज और बुलंद होगी, या 2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड में एक नए सियासी संग्राम की शुरुआत होने जा रही है? देखिए, पूरी खबर! दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रणभेरी आज बज चुकी है! विपक्ष के तमाम उग्र प्रदर्शनों, इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता के धरने और जनता के भारी आक्रोश के बावजूद केंद्र सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला और दुष्यंत कुमार गौतम आखिरकार सिक्किम के नए राज्यपाल बन गए हैं! दोस्तो इस नियुक्ति के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर गुस्से का वो ज्वालामुखी फटा है जिसकी तपन दिल्ली तक महसूस की जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीधे केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए बेहद भावुक और तीखा बयान दाग दिया है। गोदियाल ने कहा है कि यह देवभूमि के इतिहास का सबसे बड़ा दुखद दिन है कि जनता न्याय के लिए सड़कों पर रो रही है और सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है! लेकिन कांग्रेस अब खामोश नहीं बैठेगी। कांग्रेस ने अपनी महा-रणनीति ‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ का पूरा शेड्यूल घोषित कर दिया है, जो कल यानी 22 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है! क्या है इस न्याय यात्रा का पूरा चक्रव्यूह और कैसे कांग्रेस चारों कोनों से सरकार को घेरने जा रही है? दोस्तो कहते हैं सत्ता का वो मद जहां जनभावनाओं की कोई कद्र नहीं होती। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस नाम को लेकर पूरे पहाड़ का खून उबल रहा है, उस दुष्यंत कुमार गौतम को तमाम विरोधों के बाद भी सिक्किम का राज्यपाल बना दिया गया। केंद्र सरकार के इस फैसले ने उत्तराखंड के घावों पर ऐसा तेजाब छिड़का है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का दर्द और आक्रोश कैमरे के सामने फूट पड़ा है। गोदियाल ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की नीयत पर सवाल उठाते हुए साफ कह दिया है कि इतिहास इस वादाखिलाफी को कभी माफ नहीं करेगा।

दोस्तो क्या एक बार फिर सड़क पर होगा महाबवाल, क्योंकि दोस्तो दुष्यंत गौतम की इस विवादित ताजपोशी के जवाब में और धामी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े ब्रह्मास्त्र का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव अमरेंद्र बिष्ट ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ के पूरे शेड्यूल और रूट मैप की आधिकारिक घोषणा कर दी है। दोस्तो ये यात्रा 22 अक्टूबर 2026 यानि आज से शुरू होकर 30 अक्टूबर 2026 तक पूरे राज्य में एक राजनीतिक तूफान लाने के लिए तैयार है। कांग्रेस इस यात्रा के जरिए अंकिता भंडारी हत्याकांड के वीआईपी को बेनकाब करने, पहाड़ों में भू-कानून, मूल निवास, बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर सीधे जनता के बीच जा रही है। दोस्तो चलिए इस न्याय यात्रा के उस अचूक सांगठनिक चक्रव्यूह को समझते हैं, जिसने 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के रणनीतिकारों की रातों की नींद उड़ा दी है। कांग्रेस ने इस यात्रा की शुरुआत के लिए देवभूमि के दो सबसे बड़े आस्था के केंद्रों को चुना है। गढ़वाल मंडल की शुरुआत, 22 अक्टूबर को भगवान बद्रीविशाल के पावन धाम बद्रीनाथ से होगी। गढ़वाल में इस यात्रा की कमान खुद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और कद्दावर नेता प्रीतम सिंह संयुक्त रूप से संभालेंगे, जो पूरे गढ़वाल के पहाड़ी रास्तों पर सरकार की नाकामियों को उजागर करेंगे। कुमाऊं मंडल की शुरुआत न्याय के देवता कहे जाने वाले चितई गोल्ज्यू महाराज के दरबार से कांग्रेस इस यात्रा का शंखनाद करेगी। कुमाऊं में मोर्चा खुद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश संगठन के बड़े चेहरे करण माहरा संभालेंगे। दोस्तो न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज के चरणों में अर्जी लगाकर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि जब इंसानी सरकारें बहरी हो जाएं, तो न्याय के लिए भगवान के दर पर ही हुंकार भरी जाती है।

दोस्तो कांग्रेस के प्रदेश सचिव अमरेंद्र बिष्ट ने साफ शब्दों में सरकार को चेतावनी दे दी है कि 8 दिनों तक चलने वाली यह न्याय यात्रा महज़ एक राजनीतिक रैली नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने का एक महा-आंदोलन है। दोस्तो दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के रूप में हुई इस विवादित एंट्री ने कांग्रेस को 27 के महासमर से पहले वो सबसे बड़ा राजनीतिक नैरेटिव थमा दिया है जिसकी तलाश विपक्ष को लंबे समय से थी। बद्रीनाथ से लेकर गोल्ज्यू महाराज के दरबार तक गूंजने वाली कांग्रेस की यह न्याय यात्रा उत्तराखंड की राजनीति का भूगोल बदल पाती है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन 22 अक्टूबर से देवभूमि की सड़कों पर एक बहुत बड़ा सियासी संग्राम शुरू होने जा रहा है। दोस्तो जब सत्ता जनभावनाओं के खिलाफ फैसले लेने लगे, तो विपक्ष का सड़कों पर उतरना लाजिमी हो जाता है। दुष्यंत गौतम की इस नियुक्ति ने आग में घी का काम किया है, और कांग्रेस ने बद्रीनाथ धाम व गोल्ज्यू महाराज के दरबार से यात्रा शुरू करके यह साफ कर दिया है कि 22 अक्टूबर से उत्तराखंड की राजनीति पूरी तरह से आंदोलित होने जा रही है। क्या गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य और करण माहरा का यह संयुक्त चक्रव्यूह धामी सरकार के लिए 2027में काल साबित होगा?