Devbhoomi ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’ | CM Dhami | Namaz Controversy | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की एक बयान और फैसले की चर्चा आज कल खूब हो रही है और देवभूमि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि—कानून से ऊपर कोई नहीं। अब सवाल ये है कि नए फैसले का असर किन नियमों और व्यवस्थाओं पर देखने को मिलेगा, और किस तरह से यह राज्य में कानून के पालन को और मजबूत करेगा? मुस्लिम समाज की नमाज को लेकर दिए धामी के बयान के बाद कैसे सरकार को मिल रहा साधु संतों का साथ बताउँगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में सार्वजनिक सड़कों को धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से बाधित करने की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी। आस्था का सम्मान सभी को है, लेकिन कानून और व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं हो सकता। दोस्तो सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में चारधाम यात्रा चल रही है और लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे में राज्य का वातावरण शांत, व्यवस्थित और अनुशासित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सड़कें आम जनता की आवाजाही के लिए हैं, उन्हें अवरोध या प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा। दोस्तो मुख्यमंत्री ने कहा कि नमाज मस्जिदों, ईदगाहों और निर्धारित स्थानों पर ही पढ़ी जानी चाहिए। सार्वजनिक मार्गों को बाधित कर लोगों को परेशानी में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग वोट बैंक की राजनीति के लिए सड़क पर नमाज़ का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है। दोस्तो मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों को बंधक बनाकर अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि देवभूमि की शांति, संस्कृति और अनुशासन से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी तथा राज्य में कानून का राज सर्वोपरि रहेगा।

इधर दोस्तो सीएम धामी के इस साफ संदेश के बाद महामंडलेश्वर स्वामी गर्भ गिरी महाराज ने कहा कि संत समाज लंबे समय से इस मांग को उठा रहा था कि सड़कें आम जनता और यातायात के लिए होती हैं, धार्मिक आयोजन के लिए नहीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिसे नमाज पढ़नी है वह मस्जिद या अपने घर में पढ़े, लेकिन सड़क पर नमाज पढ़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी धर्मों के लिए समान है और चाहे संत समाज हो या मुस्लिम समुदाय, सभी को यातायात नियमों और कानून का पालन करना चाहिए। तभी देश और समाज सुचारू रूप से आगे बढ़ सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में बयानबाजी तेज हो गई है। सरकार जहां कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों पर अनुशासन को सर्वोपरि बता रही है, वहीं साधु-संत समाज भी इस फैसले के समर्थन में खुलकर सामने आ रहा है। सरकार का साफ संदेश है कि उत्तराखंड में कानून से ऊपर कोई नहीं होगा और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी। अब देखना होगा कि इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में ज़मीनी स्तर पर क्या बदलाव देखने को मिलते हैं.. फिलहाल मामला चर्चा में है और बयानबाजी का दौर जारी है।