Kedarnath चढ़ावे का पैसा कहां गया? | BKTC | Badrinath | RTI | Corruption | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या श्रद्धा और आस्था के नाम पर चढ़ाया गया दान अब सवालों के घेरे में है? क्या केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का चढ़ावा सच में मंदिर हित में खर्च हो रहा है या फिर VIP मेहमाननवाजी का जरिया बन गया है? RTI से सामने आए बड़े खुलासे ने BKTC यानी बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मंदिर कोष से VIP अतिथियों के आवास, भोजन और हेली सेवाओं पर लाखों रुपये खर्च किए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—चढ़ावे का पैसा आखिर गया कहां? पूरी खबर बताउंगा आपको कैसे एक बड़े खुलासे मच गई खलबली। दोस्तो मेरा सवाल ये कि क्या श्रद्धा और आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम अब भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरते जा रहे हैं? क्या भक्तों द्वारा चढ़ाया गया हर एक रुपया सच में मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च हो रहा है या फिर VIP मेहमाननवाजी और राजनीतिक प्रबंधन का जरिया बन चुका है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत सामने आए दस्तावेजों ने एक बार फिर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोस्तो अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी, जो लंबे समय से BKTC में कथित वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने में लगे हैं, उन्होंने एक और बड़ा खुलासा किया है। दोस्तो नेगी दावा है कि बीते यात्राकाल में मंदिर समिति ने कई ऐसे लोगों के आवास, भोजन और हेलीकॉप्टर टिकट पर लाखों रुपये खर्च किए, जिनका मंदिर प्रबंधन या तीर्थ व्यवस्था से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था, तो क्या मंदिरों के चढ़ावे का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए? दोस्तो अधिवक्ता नेगी के अनुसार, यह केवल सामान्य खर्च नहीं बल्कि “सिस्टमेटिक फाइनेंशियल मिसमैनेजमेंट” का मामला है। आरोप है कि मंदिर समिति ने कथित तौर पर कुछ विशिष्ट लोगों को “अतिथि” दिखाकर उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था मंदिर कोष से की, इनमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी का नाम भी सामने आया है।

इसके अलावा दोस्तो ये दावा किया किया जा रहा है कि 30 अप्रैल से 1 मई 2025 के बीच केदारनाथ धाम में उनके दो दिन के आवास और भोजन पर करीब 60 हजार रुपये मंदिर समिति ने खर्च किए। दोस्तो अब सवाल यह है कि क्या यह खर्च नियमों के तहत था? या फिर श्रद्धालुओं के चढ़ावे से VIP व्यवस्था का हिस्सा बन गया?इसी तरह रिपोर्ट में कई अन्य नामों और खर्चों का भी जिक्र किया गया है— गौर कीजिएगा जैसे

  • केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल — लगभग 37,500 रुपये
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी — लगभग 22,000 रुपये
  • आरएसएस से जुड़े प्रकाश और निरंजन — लगभग 20,000 रुपये
  • BJP जिला अध्यक्ष भारत भूषण भट्ट और अन्य कार्यकर्ता — लगभग 24,000 रुपये
  • BKTC अध्यक्ष के निजी सहायक अजय श्रीवास्तव — लगभग 23,000 रुपये

दोस्तो इन सभी खर्चों को मंदिर कोष से किए जाने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल इस बात का भी क्या मंदिर कोष का उपयोग केवल तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए है? या फिर यह VIP मेहमाननवाजी और प्रभावशाली लोगों की आवभगत का माध्यम बन गया है? इसके अलावा रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, बीकेटीसी अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी के नाम पर भी कई अन्य अतिथियों के आवास और भोजन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। दोस्तो इसके साथ ही हेलीकॉप्टर टिकटों के भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दोस्तो RTI में मिले विवरण के अनुसार, बीकेटीसी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के अतिथियों के हेली टिकट भी मंदिर कोष से भुगतान किए गए तो क्या साहब हेली सेवाएं भी अब VIP सुविधा का हिस्सा बन चुकी हैं? हेली किराए में लाखों रुपये खर्च होने के दावे ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। इधर दोस्तो अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने साफ कहा है कि यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ का मामला है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है। दोस्तो केदारनाथ और बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यहां किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ये दावे होते रहते हैं लेकिन आज अम जन ये पूछ रहा है कि — क्या मंदिरों के दान का सही उपयोग हो रहा है? क्या व्यवस्था में पारदर्शिता है? या फिर आस्था के नाम पर सिस्टम में बड़ा खेल चल रहा है? दोस्तो गौर करने वाली बात ये भी है कि ये पहला मामला नहीं है। विकेश सिंह नेगी इससे पहले भी BKTC से जुड़े कई गंभीर खुलासे कर चुके हैं—BKTC के उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण पर भी आरोप लगाए थे कि उन्होंने अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखाकर वेतन लिया और रुद्रप्रयाग में घर को कार्यालय दिखाकर भुगतान प्राप्त किया। इसके अलावा दोस्तो केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों को मंदिर कोष से 11 लाख रुपये बांटने का मामला भी उन्होंने उजागर किया था। इन तमाम आरोपों के बाद अब एक बार फिर BKTC सवालों के घेरे में है।अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है—क्या जांच होगी?या फिर यह मामला भी सिर्फ आरोपों और बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाएगा? फिलहाल, मंदिर समिति पर उठे इन गंभीर सवालों ने प्रशासन और व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।