वाण से होमकुंड तक… मां नंदा की रहस्यमयी विदाई!। Nanda Raj Jat । Roopkund । Uttarakhand News

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दोस्तो एक तरफ विरोध की सुलगती चिंगारी, असमंजस में डूबा प्रशासन और दूसरी तरफ वो बेकाबू आस्था, जो हिमालय के सबसे ऊंचे शिखरों को लांघने के लिए बेताब थी! जी हां, मै बात कर रहूं हूं देवभूमि उत्तराखंड की सबसे कठिन और रहस्यों से भरी ‘मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा’ की। Kumaon Nanda Devi Festival हर कोई डरा हुआ था कि क्या इस बार वाण गांव में मां नंदा की डोली का स्वागत होगा? लेकिन जैसे ही मां नंदा की डोली ने वाण गांव की धरती पर कदम रखा, जो नजारा दिखा। उसने इतिहास रच दिया। दोस्तो उत्तराखंड के चमोली जिले का आखिरी इंसानी पड़ाव यानी वाण गांव। जहां पिछले कुछ दिनों से यात्रा को लेकर विरोध की खबरें आ रही थीं। लेकिन आस्था के सामने हर विरोध तिनके की तरह बह गया। बधाण और दशोली क्षेत्र से आई देव-डोलियां जब वाण गांव पहुंचीं, तो वहां साक्षात देवलोक उतर आया। जब मां नंदा की डोली का अन्य डोलियों से पारंपरिक ‘डोली मिलन’ हुआ, तो पूरा क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा।

दोस्तो बूढ़े, बच्चे, महिलाएं हर किसी की आंखें छलक आईं। चौफुला और झूंठो गीतों के बीच ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा से मां का स्वागत कर यह साबित कर दिया कि मां नंदा के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को कोई विवाद डिगा नहीं सकता। लेकिन दोस्तों, यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह दुनिया की सबसे लंबी, लगभग 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा है, जो अपने भीतर ऐसे रहस्य समेटे हुए है जिसे विज्ञान भी आज तक नहीं सुलझा पाया है! रहस्य नंबर 1 चार सींगों वाला खाडू (चौसिंग्या खाडू) मां नंदा की इस यात्रा की अगुवाई कोई इंसान नहीं, बल्कि चार सींगों वाला एक रहस्यमयी भेड़ (खाडू) करता है। दोस्तो, हैरानी की बात यह है कि दलमीर गांव में पैदा होने वाला यह खाडू यात्रा के समय अपने आप सामने आ जाता है और निर्जन चोटियों को पार करते हुए अंत में ‘होमकुंड’ के पास जाकर अकेले ही आगे बढ़ जाता है, जहां से वो कभी लौटकर नहीं आता!

रहस्य नंबर 2, रूपकुंड का कंकाल तंत्र मां नंदा की इसी यात्रा के मार्ग में आती है रहस्यमयी ‘रूपकुंड झील’। 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झील में आज भी सैकड़ों मानव कंकाल तैरते हुए दिखते हैं। दोस्तो लोक कथाओं के अनुसार, मां नंदा के प्रकोप के कारण कन्नौज के राजा और उनके सैनिकों की यहां बर्फबारी में मौत हो गई थी। रहस्य नंबर 3 वाण गांव के आगे लाटू देवता की पाबंदी, वाण गांव से आगे बढ़ते ही ‘लाटू देवता’ का मंदिर है। यहां पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं। दोस्तो माना जाता है कि वाण गांव के बाद आम इंसान या पर्यटकों के लिए मां नंदा की इस गुप्त यात्रा के नियम और भी सख्त हो जाते हैं। दोस्तो इतर विरोध की तमाम आशंकाओं को दरकिनार कर वाण गांव में हुआ यह डोली मिलन इस बात का प्रतीक है कि जब बात पहाड़ों की संस्कृति और मां नंदा की विदाई की आती है, तो पूरा पहाड़ एक हो जाता है। वाण गांव से अब यह डोली आगे के दुर्गम पड़ावों, यानी बेदनी बुग्याल और रूपकुंड होते हुए होमकुंड की तरफ बढ़ेगी, जहां मां नंदा को उनके मायके से ससुराल (कैलाश) के लिए विदा किया जाएगा। दोस्तो धन्य है यह धरा और धन्य है यह अटूट आस्था! मां नंदा देवी की इस पावन यात्रा से जुड़े रहस्य आपको कैसे लगे, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।