दोस्तो, हाल में दिल्ली में 80 साल बाद एक बड़ा फैसाला हुआ एक नहीं कई राज्यों को लेकर वो था किशाऊ बांध का महा-समझौता, लेकिन अब दिल्ली में हुए इस समझौते पर पहाड़ में सवालों का सैलाब क्यों आ गया? छह राज्यों को बिजली-पानी मिलेगा, तो डूब क्षेत्र के गांवों का क्या होगा? क्वानू से हिमाचल तक ग्रामीणों का विरोध। बच्चों को लेकर सड़क पर उतरने की आखिर नौबत क्यों आई? जमीन, मकान और अपनी जड़ों की चिंता, क्या विकास की कीमत पहाड़ के लोगों को चुकानी पड़ेगी? देखिए पूरी खबर! दोस्तो जहां किशाऊ बांध परियोजना को लेकर दिल्ली के एसी कमरों में बैठे हुक्मरानों ने तालियां तो खूब बजा दीं! 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने करोड़ों के फायदे गिनाते हुए एमओयू पर दस्तखत भी कर दिए! लेकिन क्या किसी ने उन इंसानों की चीखें सुनीं, जिनकी पुश्तैनी जमीनों पर यह महा-डैम बनने जा रहा है? किशाऊ बांध के विरोध में स्थानीय लोगों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच चुका है!
एक तरफ दिल्ली और हरियाणा की प्यास बुझाने का जश्न है, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर बसे गांवों में मातम जैसा सन्नाटा है! लोग बच्चों को गोद में लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। दोस्तो आज सवाल सीधा है—किशाऊ बांध के बनने से कौन-कौन से इलाके डूब क्षेत्र में समा जाएंगे? और अपनी उपजाऊ जमीन और मकान खोने वाले इन स्थानीय लोगों को आखिर बदले में क्या मिलेगा? क्या इन्हें सिर्फ कागजी मुआवजा मिलेगा या टिहरी बांध की तरह एक और अंतहीन विस्थापन का दंश? वीडियो में बने रहिएगा अंत तक, बहुत कुछ समझ पाएंगे आप। दोस्तो सालों से फाइलों में अटकी राष्ट्रीय महत्व की किशाऊ बांध परियोजना को जैसे ही रफ्तार मिली, टोंस घाटी के पहाड़ों में विरोध की बारूद सुलग उठी है। देहरादून के चकराता से लेकर हिमाचल के सिरमौर तक ग्रामीण इस 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट बांध के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि 6 राज्यों को बिजली और पानी से रोशन करने वाले इस प्रोजेक्ट की कीमत देवभूमि के गरीब ग्रामीणों को अपनी आजीविका और पहचान देकर चुकानी पड़ रही है। दोस्तो आखिर वो कौन सी जगहें हैं जो इस महा-बांध के जलाशयों में जलमग्न हो जाएंगी?
किशाऊ परियोजना की डीपीआर के मुताबिक, दोस्तो इस बांध के बनने से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुल 17 गांव पूरी तरह या आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। इसमें उत्तराखंड के देहरादून जिले के क्वानू, साम्बरा, समाल्टा, डामटा और इसके आसपास के करीब 9 गांव शामिल हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिल्ला, बोहरड़ समेत 8 गांव इसकी जद में हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा इलाका टोंस घाटी की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता है, जहाँ नगदी फसलों से ग्रामीण अपनी आजीविका चलाते हैं इसी को लेकर लोग अब सवाल कर रह हैं। दोस्तो अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपनी जमीन इस बांध की वेदी पर चढ़ाने वाले स्थानीय लोगों को सरकार क्या दे रही है? हालांकि, पुनर्वास नीति के तहत भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार मुआवजा देने की बात कही जा रही है, जिसमें जमीन की सरकारी दर के हिसाब से रकम और विस्थापित परिवारों को अन्य जगहों पर बसाने का प्रावधान है। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा इसी बात को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टिहरी बांध के विस्थापित आज भी अपने हक के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, ऐसे में किशाऊ के प्रभावितों को सिर्फ खोखले वादों के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सिर्फ जमीन का पैसा नहीं, बल्कि जमीन के बदले उपजाऊ जमीन, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बांध से पैदा होने वाली बिजली-पानी में मुफ्त हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, इसलिए ये हंगामा है।
दोस्तो इस आंदोलन को राजनीतिक हवा भी मिल चुकी है। चकराता से कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर साफ चेतावनी दी है कि जनता की मर्जी के बिना एक इंच जमीन भी अधिग्रहित नहीं होने दी जाएगी। दोस्तो इधर पर्यावरणविदों का भी मानना है कि यह अत्यधिक संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र (Zone 5) है, जहाँ इतना बड़ा बांध बनाना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है। यही वजह है कि ग्रामीणों का गुस्सा अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोस्तो विकास की चमक तब फीकी पड़ जाती है जब उसकी नींव में इंसानों के आंसू और उजाड़े गए आशियाने शामिल हों। किशाऊ बांध से दिल्ली और हरियाणा की प्यास तो बुझ जाएगी, लेकिन क्या सरकार उत्तराखंड और हिमाचल के इन 17 गांवों के दर्द को समझ पाएगी? क्या इन ग्रामीणों को उनका सही हक और सुरक्षित भविष्य मिलेगा या फिर ये भी विस्थापन के दलदल में खो जाएंगे? सरकार को तुरंत टेबल पर बैठकर स्थानीय लोगों की इन जायज मांगों का हल निकालना होगा, वरना पहाड़ का यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े उग्र आंदोलन में बदल सकता है।इस पूरे बांध और डूब क्षेत्र के मुद्दे पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।