दोस्तो, हल्द्वानी के MBPG कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के बीच ऐसा हंगामा क्यों मचा? वोटिंग के दौरान छात्राओं के दो गुट आमने-सामने क्यों आ गए? क्या वजह थी कि बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई? और आखिर कॉलेज परिसर में पुलिस को मोर्चा क्यों संभालना पड़ा? दोस्तो अब तक आपने सुना होगा कि छात्रसंघ चुनावों में लड़के लाठी-डंडे लेकर आते हैं, हुड़दंग करते हैं और हवा में तमंचे लहराते हैं। लेकिन आज देवभूमि उत्तराखंड के सबसे बड़े कॉलेज एमबीपीजी डिग्री कॉलेज हल्द्वानी से जो शर्मनाक तस्वीरें सामने आई हैं, उसे देखकर आप भी अपना माथा पीट लेंगे! यहां छात्रसंघ चुनाव की वोटिंग के दौरान किसी नीति, विकास या छात्र हितों पर बहस नहीं हो रही थी। बल्कि यहां छात्राओं के दो गुट आपस में ही ‘गुत्थमगुत्था’ हो गए! एक-दूसरे के बाल पकड़कर खींचे गए, लात-घूंसे चले और जमकर गाली-गलौज हुई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह पूरा ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ चलता रहा और कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आखिर शिक्षा के मंदिर में क्यों हुआ यह शर्मनाक दंगल। ये कोई गली-मोहल्ले की आम लड़ाई नहीं है और न ही ये किसी सीरियल की शूटिंग है। यह नज़ारा है हल्द्वानी के प्रतिष्ठित एमबीपीजी कॉलेज का। जहां आज छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान चल रहा था। 12 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं के भाग्य का फैसला मतपेटियों में बंद होना था। पुलिस मुस्तैद थी, चेकिंग चल रही थी। लेकिन तभी अचानक लड़कियों के दो गुट आमने-सामने आ गए।
देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि जुबानी जंग खूनी झड़प में बदल गई। छात्राओं ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया, बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा जाने लगा और जमकर लात-घूंसे चले। दोस्तो अब सवाल उठता है कि आखिर ये बवाल हुआ क्यों? दरअसल, वोटिंग के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों और निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थक छात्र-छात्राएं वोटरों को रिझाने में जुटे थे। इसी बीच कॉमर्स फैकल्टी के पास और मुख्य परिसर के भीतर किसी खास प्रत्याशी को वोट दिलाने और कैंपस के भीतर वर्चस्व को लेकर दो गुट की छात्राओं में कहासुनी शुरू हो गई। तंजिया लहजे में कहें तो, जो छात्राएं कल समाज में महिला सशक्तिकरण और शालीनता का उदाहरण बनने वाली हैं, उन्होंने आज चुनाव जीतने के लिए सारी मर्यादाएं ताक पर रख दीं! जब पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो लड़कियां और उग्र हो गईं। दोस्तो छात्राओं के बीच इस भयंकर मारपीट से पूरे एमबीपीजी कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी मच गई। वोट डालने आए आम छात्र डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। माहौल को बिगड़ता देख एसपी सिटी, एसपी क्राइम और भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को कड़ी फटकार लगाई और उपद्रव कर रही छात्राओं और उनके समर्थकों को खदेड़ना शुरू किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि पुलिस को लाठियां फटकार कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। सुरक्षा को देखते हुए छात्रों के जूते तक चेक किए गए ताकि कोई अंदर हथियार न ले जा सके।
दोस्तो हल्द्वानी का यह कॉलेज हर साल छात्रसंघ चुनाव के वक्त रणक्षेत्र बन जाता है। कभी यहां नामांकन के दौरान पिस्टल और तमंचे लहराए जाते हैं, तो कभी रैलियों के नाम पर पूरे शहर को जाम कर दिया जाता है। लेकिन आज छात्राओं के इस खुले दंगल ने यह साबित कर दिया है कि छात्र राजनीति का स्तर कितना नीचे गिर चुका है। चुनाव के नाम पर वैचारिक बहस की जगह अब केवल शारीरिक बल और गुंडागर्दी ने ले ली है। चाहे एबीवीपी हो, एनएसयूआई हो या निर्दलीय गुट, जीत के लिए साम-दाम-दंड-भेद का ऐसा घिनौना प्रदर्शन देवभूमि की साख पर बड़ा बट्टा है। दोस्तो शिक्षा के इस सबसे बड़े मंदिर को अगर राजनेताओं और उपद्रवियों ने अखाड़ा बना दिया है, तो इसके लिए कॉलेज प्रशासन और ढीला सिस्टम पूरी तरह जिम्मेदार है। लड़कियों का इस तरह बीच सड़क पर गुत्थमगुत्था होना यह बताता है कि आज के इन ‘जेन-ज़ी’ युवाओं में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है। पुलिस ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रित कर लिया है और वोटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन यह सवाल जस का तस है कि क्या ऐसे हुड़दंगियों के हाथ में कॉलेज की कमान सौंपी जानी चाहिए? इस पूरे ‘दंगल’ पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।