दोस्तो देश की राजनीति में ‘चाय वाले’ प्रधानमंत्री का नैरेटिव तो आपने सौ बार सुना होगा, लेकिन क्या आपने उत्तराखंड के उस कद्दावर नेता की कहानी सुनी है जो राजनीति के शिखर पर पहुंचने से पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर चाय और चाट की रेहड़ी लगाता था? जी हां, उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने एक ऐसा चटकारेदार बयान दे दिया है, जिसने दिल्ली से लेकर देहरादून तक की राजनीति का स्वाद बिगाड़ दिया है! आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डी.के. पाल को कांग्रेस में शामिल कराते हुए हरक सिंह रावत ने खुद को हरिद्वार स्टेशन का ‘चाट वाला’ घोषित कर दिया है। आखिर हरक सिंह रावत ने बीजेपी के किस ‘झूठ’ का पर्दाफाश किया है और क्यों उनका ये बयान इस समय सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी सुर्ख़ियों में है? चलिए बताता हूं आपको, दोस्तो हरक सिंह रावत की इस कहानी के बारे में आपको बताने के लिए आया हूं तोड़ा गौर कीजिएगा। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. हरक सिंह रावत इन दिनों पूरे एक्शन मोड में हैं। संगठन को मजबूत करने के लिए वे लगातार जमीन पर पसीना बहा रहे हैं और विरोधी खेमों में लगातार बड़ी सेंधमारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में देहरादून में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, जहां आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे डी.के. पाल ने आम आदमी पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली। हरक सिंह रावत ने खुद गर्मजोशी से डी.के. पाल का कांग्रेस संगठन में स्वागत किया। लेकिन इस जॉइनिंग से ज्यादा चर्चा हरक सिंह रावत के उस बयान की है जिसने पूरी महफिल लूट ली।
हरक ने कहा, ‘हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर खुद मैंने भी चाय और चाट बेचने का काम किया है। मैंने जिंदगी का वो दौर देखा है जब पेट पालने के लिए सड़कों पर रेहड़ी लगानी पड़ती थी।’ लेकिन हरक यहीं नहीं रुके, उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए आगे कहा, ‘मैंने भी बहुत संघर्ष किया है, लेकिन मैं उस संघर्ष को झूठ बोलकर या रो-रोकर जनता के सामने वोट बटोरने के लिए नहीं लाता। उन्होंने बीजेपी पर तीखा निशाना साधते हुए चुनावी राजनीति के सबसे बड़े नैरेटिव पर हमला बोला। हरक सिंह रावत ने कहा कि चुनाव आते ही कुछ लोग जनता को बहकाने और सहानुभूति बटोरने के लिए सफेद झूठ का सहारा लेते हैं। कोई खुद को चाय बेचने वाला बताता है, तो कोई खुद को जमीन से जुड़ा हुआ दिखाता है। हरक ने साफ शब्दों में कहा कि संघर्ष केवल उन्होंने ही नहीं किया, बल्कि जमीन से उठकर संघर्ष करने वाले लोग हर पार्टी में मौजूद हैं। आगे देखिए हरक सिंह रावत ने क्या कहा, दोस्तो अपने संघर्ष की अनसुनी कहानी को सामने लाते हुए हरक सिंह रावत ने मंच से वो खुलासा किया जिसने सबको चौंका दिया। अपने इस चटकारेदार और आक्रामक बयान के आखिरी में हरक सिंह रावत ने कार्यकर्ताओं और जनता को एक बड़ा चुनावी मंत्र भी दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में चेहरा चाहे कोई भी हो, प्रत्याशी कोई भी खड़ा हो, हमें आपसी मतभेदों और चेहरों को भूल जाना है। हमें केवल और केवल ‘हाथ के पंजे’ का निशान देखकर वोट करना है। हरक सिंह रावत का यह बयान साफ करता है कि वह आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को खत्म कर इस बार एकजुटता के साथ बीजेपी को कड़ी चुनौती देने के मूड में हैं। दोस्तो हरक सिंह रावत के इस ‘चाट वाले’ बयान ने उत्तराखंड की सियासत का पारा गरमा दिया है। एक तरफ बीजेपी का राष्ट्रवाद और चाय वाले का पुराना नैरेटिव है, तो दूसरी तरफ हरक सिंह रावत का यह जमीनी और आक्रामक अंदाज। अब देखना होगा कि जनता इस चुनावी जंग में किसके नैरेटिव को पसंद करती है। आपको क्या लगता है, क्या हरक सिंह रावत का यह बयान कांग्रेस को मजबूती देगा? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।