दोस्तो क्या किसी बेकसूर को परदेस की धरती पर तड़पने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए? एक ऐसा बेटा, एक ऐसा पति, जो अपने बूढ़े मां-बाप का सहारा बनने सात समंदर पार गया था। आज वहां की सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी की भीख मांग रहा है! जी हां, दोस्तो मै बात कर रहा हूं उत्तरकाशी के इंद्रमणि नौटियाल की। वैसे दोस्तो जब उम्मीद की सारी किरणें धुंधली हो चुकी थीं, तब उत्तराखंड के एक सुपरस्टार और सूबे के मुखिया ने कुछ ऐसा किया है, जिसने इस मुहिम को आंदोलन बना दिया है! आखिर क्या है सऊदी अरब की वो खौफनाक दास्तान, और कैसे जुबिन नौटियाल से लेकर मुख्यमंत्री धामी तक देवभूमि के बेटे की जान बचाने के लिए एक हो गए हैं? बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो पहले आप सुनिए मामाल क्या है और कैसे गुहार पर गुहार लगाई जा रही है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी का एक छोटा सा गांव, और उस गांव के एक घर में पिछले कई महीनों से चूल्हा ठीक से नहीं जला है। वजह? घर का कमाऊ बेटा इंद्रमणि नौटियाल, जो अपने परिवार को गरीबी के दलदल से निकालने सऊदी अरब गया था, आज वहां अपनों से दूर, एक बेहद मुश्किल हालात में फंसा हुआ है। दिन बीत रहे हैं, रातें कट रही हैं, लेकिन बूढ़ी आंखों के आंसू और पत्नी का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। जब उत्तरकाशी के इस लाल की बेबसी सोशल मीडिया पर गूंजी, तो देवभूमि के ही एक और लाल का दिल पसीज गया। देश और दुनिया के दिलों पर राज करने वाले उत्तराखंड के मशहूर गायक जुबिन नौटियाल इस इंसानियत की मुहिम में आगे आए। जुबिन ने सिर्फ सहानुभूति नहीं जताई, बल्कि इंद्रमणि के परिवार को मजबूती देने के लिए ₹1 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता भेजी। जुबिन के इस कदम ने न सिर्फ परिवार के आंसू पोंछे, बल्कि पूरे देश को संदेश दिया कि जब अपना कोई मुसीबत में हो, तो पीछे नहीं हटते। दोस्तो मामला सिर्फ पैसों का नहीं था, मामला था अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का, कानूनी पेचीदगियों का। वैसे दोस्तो परेशानी बड़ी है इधर इंद्रमणि नौटियाल की बेटी लगातार दर दर के चक्कर काट कर अपने पिता की वतन वापसी में मदद की गुहार लगा रही है। वैसे दोस्तो जब बात उत्तराखंड के किसी नागरिक के स्वाभिमान और जान की हो, तो सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी शांत कैसे बैठ सकते हैं? मुख्यमंत्री धामी ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया। सबसे पहले मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पीड़ित परिवार को ₹2 लाख की आर्थिक मदद मंजूर की गई, लेकिन सबसे बड़ा कदम उठाना अभी बाकी था।
सीएम धामी ने सीधे देश के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक कड़ा और भावुक पत्र लिखा। धामी ने मांग की है कि भारत सरकार तुरंत सऊदी अरब प्रशासन से बात करे और इंद्रमणि नौटियाल को सकुशल भारत वापस लाने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक रास्ते का इस्तेमाल करे। दोसतो ये लड़ाई अब सिर्फ एक परिवार की नहीं रही। जुबिन नौटियाल का ₹1 लाख और मुख्यमंत्री धामी का ₹2 लाख और वो सरकारी पत्र, ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। ये उस उम्मीद की संजीवनी हैं, जो एक मां को विश्वास दिलाती है कि उसका बेटा मरेगा नहीं। ये एक पत्नी को भरोसा देती है कि उसका सिंदूर उजड़ेगा नहीं और बेटी को ये बताने के लिए काफी हैं कि उसका पिता एक दिन जरुर देवभूमि लौटेगा। दोस्तो इस मुहीम के साथ पूरा उत्तराखंड आज एकजुट होकर इंद्रमणि नौटियाल की सुरक्षित घर वापसी के लिए खड़ा दिखाई दे रहा है दोस्तो इधर सरकार प्रयास कर रही है, कलाकार साथ दे रहे हैं, और जनता प्रर्थना कर रही है। इंद्रमणि नौटियाल बहुत जल्द अपने घर लौटेंगे, अपने बच्चों को गले लगाएंगे—यही हम सबकी सामूहिक प्रार्थना है, लेकिन इस मुहिम में आपका एक शेयर भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि यह आवाज और बुलंद हो सके।