दोस्तो क्या उत्तराखंड के पहाड़ों पर सरकारों की बड़ी-बड़ी घोषणाएं सिर्फ कागजों पर ही दम तोड़ देती हैं? दो-दो मुख्यमंत्रियों के ऐलान और स्थानीय विधायक के बार-बार के वादों के बावजूद। क्या टिहरी की जनता के साथ कोई बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है? जी हां, नई टिहरी जिला मुख्यालय के पास ईणिया में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को लेकर अब देवभूमि के पहाड़ों में एक नया सियासी और जन-आंदोलन सुलग उठा है! रविवार को जब पूरा देश छुट्टी मना रहा था, तब टिहरी-बौराड़ी के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर थे। बाजार पूरी तरह बंद थे और गणेश चौक पर ‘गर्जने’ के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है! आखिर क्यों आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इस कदर सड़कों पर आना पड़ा? और इस आंदोलन के पीछे मंत्रियों और विधायकों की कौन सी अंदरूनी खींचतान छिड़ी हुई है? चलिए आपको बताता हूं गौर कीजिएगा। दोस्तो नई टिहरी जिला मुख्यालय में अब आर-पार की जंग शुरू हो चुकी है। ईणिया में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जनता का धैर्य अब जवाब दे चुका है। रविवार को मेडिकल कॉलेज निर्माण संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर नई टिहरी-बौराड़ी बाजार पूरी तरह से बंद रहे। बौराड़ी स्टेडियम से शुरू हुई जन-गर्जना रैली मोलधार और गीता भवन होते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ गणेश चौक पहुंची। ये सिर्फ एक रैली नहीं थी, बल्कि यह सरकार की बेरुखी के खिलाफ टिहरी की जनता का सीधे तौर पर शंखनाद था। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, इससे पहले 31 जुलाई को जिला मुख्यालय में एक विशाल जन आक्रोश रैली निकाली गई थी, जिसके बाद 15 अगस्त तक शहर और ग्रामीण इलाकों में व्यापक जन जागरण अभियान चलाया गया।
श्रीदेव सुमन पार्क में मोर्चा पिछले 16 दिनों से लगातार सत्याग्रह आंदोलन कर रहा था, लेकिन जब शासन, प्रशासन और सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, तो आंदोलनकारियों ने अपना रुख और कड़ा कर लिया। अब गणेश चौक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है, और पहले ही दिन नागरिक मंच के 10 प्रमुख सदस्य धरने पर बैठ गए हैं। संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. राकेश भूषण गोदियाल ने सीधे तौर पर व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाए हैं। दोस्तो इस आंदोलन ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल इस मेडिकल कॉलेज को गजा क्षेत्र में ले जाना चाहते हैं। जनता का आरोप है कि इस कॉलेज को टिहरी और नरेंद्रनगर के बीच बांटकर राजनीति चमकाने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ स्थानीय विधायक का दावा और दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का यह रुख। इस आपसी खींचतान में अगर किसी का नुकसान हो रहा है, तो वो है टिहरी की आम जनता, जो सालों से एक अच्छे अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की उम्मीद लगाए बैठी है। दोस्तो इस मुहिम को अब कांग्रेस और अन्य सामाजिक संगठनों का भी खुला समर्थन मिल रहा है।
संघर्ष मोर्चा के संयोजक भगवान सिंह रावत और कांग्रेस नेता नरेंद्र चंद रमोला ने साफ चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि यह धरना तो सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने ईणिया में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर तुरंत कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में चक्का जाम, क्रमिक अनशन और उग्र भूख हड़ताल जैसे कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। दोस्तो पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी भले ही पहाड़ के काम न आ रही हो, लेकिन अब पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बचाने के लिए बुजुर्गों से लेकर युवा तक सड़कों पर हैं। देखना होगा कि सरकार इस जन-आक्रोश के बाद क्या फैसला लेती है। इस खबर पर आपकी क्या राय है? क्या मेडिकल कॉलेज ईणिया में ही बनना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय ज़रूर दें और टिहरी के लोगों की इस आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने के लिए वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।