Haridwar अचानक Umesh Kumar ने छोड़ी विधायकी! । Khanpur । Resignation । Uttarakhand News

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गैरसैंण से बड़ी खबर! खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे की पुष्टि कर दी है और आगे की कार्रवाई के लिए इसे प्रभारी सचिव को भेज दिया गया है। आखिर उमेश कुमार ने यह बड़ा कदम क्यों उठाया? दोस्तो इस वक्त उत्तराखंड की राजनीति से एक बहुत बड़ी और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है! गैरसैंण के भराड़ीसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के बीच, हरिद्वार की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जी हां, वही उमेश कुमार जो सदन से लेकर सड़क तक हमेशा अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने आज अपने इस बड़े फैसले से पूरी उत्तराखंड सरकार और विपक्ष दोनों के होश उड़ा दिए हैं! दोस्तो इस इस्तीफे की पुष्टि खुद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने मीडिया के सामने आकर की है। स्पीकर ऋतु खंडूरी का कहना है कि उन्हें उमेश कुमार का पत्र मिल चुका है और उन्होंने विधानसभा सचिव को आगामी वैधानिक कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। आखिर क्यों साढ़े चार साल तक जनता की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले इस निर्दलीय विधायक का मन अचानक खिन्न हो गया? क्या रही पद छोड़ने की असली वजह और क्या है उमेश कुमार का अगला मास्टर प्लान? दोस्तो मै आपको बड़ी बताने जा रहा हूं, साथ क्या कहा विधायकी छोड़ने के बाद खुद उमेश कुमार ने।

दोस्तो उत्तराखंड की पहाड़ी राजनीति में इस वक्त भूचाल आ चुका है। भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र के बीच खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधायकी की सदस्यता से इस्तीफा देकर हर किसी को हैरान कर दिया है। कयास लगाए जा रहे थे कि यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी है, लेकिन उमेश कुमार ने अपना लिखित पत्र विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी को सौंप कर सारे कयासों पर विराम लगा दिया। स्पीकर ऋतु खंडूरी ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए साफ कहा कि—“उमेश कुमार की तरफ से इस्तीफा पत्र आया है, जिसे मैंने अपने सचिवालय भेज दिया है और आगामी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। दोस्तो आगे की कार्रवाई चल पड़ी है फिर दोस्तो आखिर इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे की असली कहानी क्या है? खुद उमेश कुमार ने इसका बेहद आक्रामक अंदाज में खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह से व्यथित और दुखी हो चुके हैं। उमेश कुमार ने मुख्य रूप से प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “खानपुर की जनता ने मुझे एक निर्दलीय के रूप में चुनकर भेजा था। साढ़े चार साल तक विपक्ष के हर आंदोलन में, चाहे वह धरना हो या विधानसभा के वेल में रात बिताना, मैं हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। लेकिन जब हरिद्वार के किसानों की फसलें बर्बाद हुईं और मुझे उनके हक की लड़ाई के लिए विपक्ष के साथ की जरूरत थी, तो पूरा विपक्ष पीछे हट गया।

दोस्तो सुना आनपे विपक्ष के इस रुख से नाराज उमेश कुमार ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा कि विपक्ष का हाल यह हो गया है कि वह चाहता है कि—’भगत सिंह सिर्फ पड़ोसी के घर में पैदा होना चाहिए’। उन्होंने कहा कि सदन में जब कोई अकेला निर्दलीय विधायक भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ या किसानों के लंबित भुगतानों को लेकर खड़ा होता है, तो बेंच थपथपाने और समर्थन करने के बजाय विपक्ष मूकदर्शक बना रहता है। ऐसे में इस दिखावे की राजनीति और सदन का हिस्सा बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। दोस्तो इस इस्तीफे के बाद उत्तराखंड के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या उमेश कुमार किसी बड़ी पार्टी का दामन थामने वाले हैं? लेकिन अपने आगे के प्लान पर उमेश कुमार ने खुलकर और बेहद कड़े अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने साफ घोषणा की कि वह न तो कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं। उन्होंने स्वाभिमान की बात करते हुए कहा, “मैं भाजपा या कांग्रेस में जाकर उन नेताओं की जिंदाबाद के नारे कभी नहीं लगा सकता, जो कल तक मेरे खुद के दरवाजे पर आकर बैठते थे।” उन्होंने साफ कर दिया कि वह जनता के बीच रहकर बिना किसी पार्टी के दबाव के अपनी नई और स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति पर काम करेंगे। इस सवाल का जवाब तो फिलहाल सिर्फ उमेश कुमार के पास है। दोस्तो उमेश कुमार के इस इस्तीफे ने उत्तराखंड की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। चुनाव से ठीक पहले एक मजबूत निर्दलीय विधायक का इस्तीफा देना और दोनों मुख्य दलों को ललकारना क्या हरिद्वार की राजनीति का पूरा समीकरण बदल देगा? क्या विपक्ष वाकई जनमुद्दों पर कमजोर साबित हुआ है या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी अंदरूनी खिचड़ी पक रही है? उमेश कुमार के इस बेहद आक्रामक कदम और उनके दावों पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखकर बताएं।