आफत की बारिश से फिर बढ़ा खतरा! देखिए रिपोर्ट | Heavy Rain | Flash Flood | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड में बारिश अब सिर्फ बारिश नहीं रह गई है, ये पहाड़ों के लिए आफत बनती जा रही है! नैनीताल से लेकर चंपावत और रामनगर तक ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिन्हें देखकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर पहाड़ों में ये हो क्या रहा है?कहीं नदी का पानी अचानक उफान पर है, कहीं पहाड़ सड़क पर टूटकर गिर रहा है। कहीं मकान बारिश की मार झेल रहा है और कहीं सड़क पर उफनता नाला गाड़ियों की रफ्तार रोक रहा है। दोसतो क्या उत्तराखंड में बारिश का खतरा अभी और बढ़ने वाला है?क्योंकि नैनीताल में कोसी और शिप्रा जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, भीमताल के पास लैंडस्लाइड सामने आया है और हालात को देखते हुए प्रशासन को स्कूल तक बंद करने पड़े हैं।तो चलिए आपको एक-एक करके दिखाते है। बारिश के कहर की वो तस्वीरें, जो इस वक्त उत्तराखंड की चिंता बढ़ा रही हैं। दोस्तो सबसे पहले नैनीताल के कैंची धाम से, दोस्तो ये शांत नजर आने वाली शिप्रा नदी है, लेकिन भारी बारिश के बाद इसका बहाव किस तरह बदल गया है, तस्वीरें खुद इसकी गवाही दे रही हैं। पिछले 24 घंटे की बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ा और पानी का बहाव लगातार तेज होता दिखाई दिया।यानी पहाड़ों में बारिश का असर अब सीधे नदी-नालों के मिजाज में नजर आ रहा है। कोसी और शिप्रा नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के बीच दोनों नदियां उफान पर हैं।हालात को देखते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी ने एहतियात के तौर पर 2 सितंबर को जिले के स्कूल बंद रखने के आदेश दिए हैं। सवाल ये है कि जब नदी का पानी लगातार बढ़ रहा हो और बारिश थमने का नाम न ले रही हो तो आगे हालात किस करवट जाएंगे? और सिर्फ नदी ही नहीं बारिश पहाड़ों को भी कमजोर कर रही है। नैनीताल के भीमताल के पास लैंडस्लाइड की तस्वीरें सामने आई हैं। भारी बारिश के बीच पहाड़ी से मलबा खिसका और रास्ते पर खतरा बढ़ गया। उधर धारी इलाके में नैनीताल-धनाचूली रोड किनारे एक मकान को भी बारिश से भारी नुकसान पहुंचा है।यानी एक तरफ नदी का बढ़ता जलस्तर, दूसरी तरफ पहाड़ों पर भूस्खलन और तीसरी तरफ रिहायशी इलाकों पर मंडराता खतरा। लेकिन खतरा सिर्फ नैनीताल तक सीमित नहीं है।

चंपावत के सुआल इलाके में भारी बारिश के बीच एक बार फिर लैंडस्लाइड हुआ। अचानक पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ गिरा और कुछ देर के लिए आवाजाही थम गई।हालांकि प्रशासन ने मलबा हटाकर कुछ घंटों में यातायात बहाल कर दिया, लेकिन ये तस्वीर एक सवाल जरूर छोड़ जाती है—बारिश के मौसम में ऐसे डेंजर जोन आखिर कब तक लोगों के लिए खतरा बने रहेंगे? अब ये तस्वीरें रामनगर-हल्द्वानी मार्ग की हैं।भारी बारिश के बाद बेलगढ़ नाला अचानक उफान पर आ गया और पानी सड़क पर तेज बहाव के साथ दौड़ने लगा।दोनों तरफ वाहन फंस गए और आवाजाही प्रभावित हो गई।ये तस्वीर बताती है कि पहाड़ों में बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह बदल सकते हैं। और इसी खतरे को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने भी लोगों से साफ अपील की है—उफनती नदियों, नालों और जलभराव वाली सड़कों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें, क्योंकि तेज बहाव और पानी की गहराई का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है। और अगर आपको लगता है कि नैनीताल में बारिश का असर सिर्फ नदी और सड़क तक है, तो मुक्तेश्वर की ये बारिश के आंकड़े देखिए। मुक्तेश्वर में 128 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि कोश्याकुटौली में 94 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी बारिश कितनी तेज है, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। और इसी भारी बारिश के बीच भीमताल के पास लैंडस्लाइड की तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन बारिश और आपदा की इन तस्वीरों के बीच हिमाचल से भी एक तस्वीर सामने आई है, जो चिंता बढ़ाने वाली है।

करसोग के परलोग पुल के पास सतलुज नदी में गिरी एक गाड़ी को आज गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया, हालांकि गाड़ी मिलने के बावजूद लापता लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। तेज बहाव, खराब मौसम और मुश्किल परिस्थितियों के बीच रेस्क्यू टीम लगातार तलाश में जुटी हुई है। दोस्तो, इन सभी तस्वीरों को अगर एक साथ देखें तो तस्वीर बेहद साफ है—उत्तराखंड में बारिश का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है।नदियां उफान पर हैं, पहाड़ दरक रहे हैं, लैंडस्लाइड रास्ते रोक रहे हैं, मकानों को नुकसान पहुंच रहा है और जगह-जगह आवाजाही प्रभावित हो रही है। लेकिन इन हालात में सबसे जरूरी है सावधानी।बारिश के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचिए। उफनते पानी में सड़क पार करने की कोशिश मत कीजिए और लैंडस्लाइड संभावित इलाकों में सफर करने से पहले मौसम और प्रशासन की एडवाइजरी जरूर देखिए। क्योंकि पहाड़ों में मौसम कब करवट ले ले, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है और इन तस्वीरों की सबसे बड़ी सीख भी यही है—बारिश रुकने का इंतजार मत कीजिए, खतरे को समझकर पहले से सतर्क रहिए।