सुबह-सबह विदेश में भारत का बड़ा ऑपरेशन!| Nepal Flash Flood | Rescue | Uttarakhand News

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दोस्तो बाढ़ के सैलाब में लापता हो गए सैकड़ों भारतीय सरकार को को रातों रात उतारनी पड़ी सेना कैसे विदेशी जमीन पर भारत के बड़े ऑपरेशन की दुनिया में हो रही है चर्चा बताउंगा आपको पूरी खबर। प्रकृति के सबसे शांत और खूबसूरत माने जाने वाले हिमालयी क्षेत्र में अचानक मौ’त का सैलाब उमड़ पड़ा, तिब्बत के जिलोंग प्रांत में आए एक भीषण भूकंप के बाद ग्लेशियर टूटने (GOLF) से भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में ऐसी भयानक बाढ़ आई, जिसने देखते ही देखते सब कुछ तबाह कर दिया। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में अब तक सौकड़ों लोगों की जान जाने की खबर हैं। हजारों लोग लापता हैं। दोस्तो इस महाप्रलय की चपेट में आकर न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि सैकड़ों सैलानी भी फंस गए। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इलाके से 384 विदेशी पर्यटक लापता हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या 105 भारतीय तीर्थयात्रियों की है। यह सभी श्रद्धालु पवित्र कैलाश-मानसरोवर यात्रा और हिमालयन ट्रेकिंग रूट पर थे। संकट सिर्फ पर्यटकों पर नहीं है; रसुवा जिले के टिमुरे बाजार से नेपाल पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के 41 जवान भी लापता हैं, जिनकी चौकियां इस सैलाब में पूरी तरह बह गईं। वहीं दोस्तो देखिए कैसे ‘ऑपरेशन संकटमोचक’ और भारत की बड़ी मदद ने दुनिया को दिखा दिया कि वो हमेशा अपने लोगों और दूसरे देश आई बड़ी आफत में सहारा बनाता है। दोस्तो नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत एक बार फिर ‘सच्चा पड़ोसी’ बनकर सामने आया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया। भारतीय वायुसेना के C-130 हरक्यूलिस और C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री, टेंट, दवाइयां और खाना लेकर उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा दोस्तो ग्राउंड जीरो पर उतरने के लिए भारत की NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) और SSB की टीमें स्टैंडबाय पर हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने पल-पल की जानकारी के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए। इधर दोस्तो हिमालय से उठे इस पानी का खतरा अब भारत के मैदानी इलाकों पर भी मंडरा रहा है। नेपाल की इन उफनती नदियों का पानी आगे चलकर भारत की गंडक नदी में मिलता है। इसी को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में हाई-रिस्क अलर्ट जारी कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों के संपर्क में है ताकि सीमावर्ती गांवों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके। दोस्तो कुदरत के इस कहर ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण के संतुलन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को सुरक्षित ढूंढने और पीड़ितों तक मदद पहुंचाने की है। भारत और नेपाल की एजेंसियां मिलकर इस ‘महाऑपरेशन’ में जुटी हैं।