दोस्तो सोचिए, सामने आसमान साफ है, धूप खिली है, नदी बिल्कुल शांत बह रही है। लोग अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में मशगूल हैं, लेकिन पहाड़ के ऊपर कुछ और ही कहानी लिखी जा रही है।ऊंचाई पर बादल फटता है। पानी और मलबे का सैलाब अचानक नीचे की तरफ दौड़ता है और देखते ही देखते वही शांत नदी खौफनाक फ्लैश फ्लड में बदल जाती है और आज वो खौफनाक तस्वीरें नेपाल की हैं, जहां कुछ ही पलों में पानी ने घर, सड़कें और पुल कई सौ लोगों की जिंदगी को खत्म कर दिया। दोस्तो नेपाल से सामने आईं ये तस्वीरें किसी डरावने मंजर से कम नहीं हैं..भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। कहीं पुल बह गए, कहीं सड़कें पानी में समा गईं, तो कहीं लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ऊंचाई की तरफ भागते दिखाई दिए और सबसे डराने वाली बात ये है कि इस तबाही का अंदाजा नदी के शांत बहाव को देखकर शायद ही किसी को हुआ होगा। नदी बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रही है। मौसम भी ऐसा नहीं लग रहा कि कुछ ही देर में हालात इतने बिगड़ जाएंगे, लेकिन पहाड़ों में बारिश का असर अक्सर उस जगह नहीं दिखता, जहां नदी बह रही होती है। ऊंचाई पर हुई तेज बारिश और बादल फटने के बाद पानी अचानक नीचे की ओर आता है, और फिर जिस नदी को कुछ पल पहले लोग सामान्य समझ रहे थे, वही नदी देखते ही देखते अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को चुनौती देने लगती है। दोस्तो नेपाल की भोटेकोशी नदी का ये मंजर बेहद डराने वाला है।तेज रफ्तार से आता पानी, उसके साथ बहता मलबा और नदी के किनारे मौजूद इलाकों पर बढ़ता खतरा त्रिशूली और धुंगे कस्बों में फ्लैश फ्लड से नुकसान की तस्वीरें सामने आई हैं।कई घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। पहाड़ों में पुल सिर्फ पुल नहीं होते, ये एक गांव को दूसरे गांव से जोड़ने वाली जीवनरेखा होते हैं।लेकिन जब नदी का पानी इन पुलों को ही बहा ले जाए तो पूरा इलाका एक झटके में संपर्क से कट सकता है।
दरअसल दोस्तो नेपाल में तबाही का ये सैलाब पहुंचने से पहले ही ऊपरी इलाकों में पानी ने अपना खौफनाक असर दिखाया।तस्वीरों में तबाही का पैमाना साफ दिखाई देता है।पानी की ताकत ने रास्तों और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया, यानी ये सिर्फ एक नदी का उफान नहीं बल्कि पहाड़ी इलाकों में अचानक बदलते मौसम और तेज बहाव के खतरे की एक बड़ी तस्वीर है। दोस्तो रसुवा जिले में त्रिशूली नदी पर पावर प्रोजेक्ट के पास मजदूर काम कर रहे थे। इन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में नदी का पानी इतना खतरनाक रूप ले सकता है, जैसे ही फ्लैश फ्लड का पानी मुहाने तक पहुंचा। अफरा-तफरी मच गई, लोग चिल्लाने लगे और मजदूरों को वहां से बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। दोस्तो सैलाब के बाद चुनौती खत्म नहीं होती, कई लोग अलग-अलग जगहों पर फंस जाते हैं, रास्ते टूट जाते हैं, पुल बह जाते हैं और राहत एवं बचाव टीमों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। दोस्तो फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई और प्रभावित इलाकों तक मदद पहुंचाने का काम जारी रहा। लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ चुनौती बढ़ती जाती है, क्योंकि पहाड़ों में मौसम कब फिर करवट ले इसका भरोसा नहीं। लेकिन दोस्तो आपदा के बीच सामने आई ये तस्वीर परेशान करने वाली है या बाढ़ में बहकर आए सामान को निकालने के लिए कुछ लोग तेज बहाव वाली नदी में उतरते दिखाई दे रहे हैं। आपदा के बाद राहत और सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत होती है, लेकिन ऐसी स्थिति में नदी में उतरना बेहद जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि पानी का बहाव ऊपर से शांत दिखाई दे, तब भी अचानक तेज हो सकता है। दोस्तो इधर नेपाल से जुड़ी एक और बड़ी चिंता पर्यटकों को लेकर सामने आई है।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के हवाले से 384 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं।विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा रही है। अगर ये आंकड़े आगे की जांच में पुष्ट होते हैं, तो ये आपदा के असर का बेहद गंभीर संकेत होगा। वहीं दोस्तो दूसरी नेपाल का पहाड़ी इलाका पहले से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। कई दूरदराज के गांवों और कस्बों को जोड़ने के लिए झूला पुल और पहाड़ी सड़कें बेहद अहम हैं, लेकिन त्रिशूली नदी का उफान इन पुलों को भी अपने साथ बहा ले गया। एक पुल टूटता है तो सिर्फ लोहे और तार का ढांचा नहीं टूटता। उसके साथ लोगों का संपर्क टूटता है, आवाजाही रुकती है और राहत पहुंचाने का रास्ता भी मुश्किल हो जाता है। और दोस्तो अंत में एक बार फिर देखिए भोटेकोशी नदी का ये मंजर।कुछ देर पहले तक सामान्य दिखने वाली नदी और फिर वही पानी इतना विकराल कि आसपास मौजूद हर शख्स के लिए खतरा बन गया। पहाड़ों में बारिश ऊपर होती है, लेकिन उसका असर कई किलोमीटर दूर, अचानक और बेहद तेज दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि पहाड़ी नदियों के आसपास रहने वाले इलाकों में अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड का खतरा हमेशा गंभीर रहता है। दोस्तो नेपाल की ये तस्वीरें सिर्फ एक आपदा की कहानी नहीं हैं, ये उस खतरे की तस्वीर हैं, जिसमें आसमान साफ होने के बावजूद कुछ किलोमीटर दूर पहाड़ पर हुई बारिश जिंदगी बदल सकती है।शांत नदी, अचानक उफान, टूटते पुल, बहती सड़कें और जान बचाने के लिए भागते लोग फ्लैश फ्लड कुछ मिनटों में वो तबाही ला सकता है, जिसकी कल्पना शायद कुछ पल पहले तक किसी ने नहीं की थी। नेपाल में आई इस आपदा ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पहाड़ों में अचानक आने वाली ऐसी आपदाओं के लिए हमारी तैयारी पर्याप्त है?