जी हां दोस्तो, चुनाव क्या आ रहा है उत्तराखंड बीजेपी में सिरफुटोबल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। बीजेपी में घमासान इस कदर की विकास पर अपनों के सवाल तमाम है.. पूर्व विधायक बीजेपी के ही वर्तमान विधायक को कहते हैं कुभकर्ण से भी बड़े शयनवीर हैं वो तो। दोस्तो चमोली बीजेपी में आखिर अपनों के बीच ये कैसी जंग छिड़ गई है? पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल पर ऐसा तीखा तंज क्यों कसा कि सियासी गलियारों में हलचल मच गई? क्या कर्णप्रयाग में वाकई विकास कार्यों को लेकर नाराजगी है, या 2027 के टिकट की लड़ाई अभी से तेज हो गई है? और क्या बीजेपी की ये अंदरूनी कलह विपक्ष के लिए नया मुद्दा बनेगी? दोस्तो भारतीय जनता पार्टी खुद को दुनिया की सबसे अनुशासित पार्टी कहती है, लेकिन जब सत्ता का नशा और टिकट की जंग अपनों के बीच ही तलवारें खिंचवा दे, तो अनुशासन के सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं! उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से बीजेपी के भीतर वो खूनी सांगठनिक युद्ध छिड़ गया है, जिसे देखकर खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हैरान हैं! दोस्तो बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने अपनी ही पार्टी के वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल पर हमला बोलते हुए मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। नेगी ने सरेआम कह डाला कि— ‘त्रेतायुग में कुंभकर्ण तो फिर भी छह महीने में एक बार जाग जाता था, लेकिन हमारे वर्तमान विधायक पिछले पांच साल से गहरी नींद में सोए हुए हैं!’ एक पूर्व विधायक द्वारा अपनी ही सरकार के सिटिंग एमएलए को कुंभकर्ण बता देना साफ कर रहा है कि चमोली बीजेपी में ‘ऑल इज नॉट वेल’ नहीं, बल्कि ‘ऑल इज बर्बाद’ की स्थिति है। आखिर इस बयान के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी क्या है? क्योंकि कोई भी ऐसे ही बोलता इतनी बड़ी बात।
दोस्तो उत्तराखंड बीजेपी में इन दिनों बड़बोलेपन और आंतरिक कलह का वो मौसम चल रहा है, जहां विपक्ष को हमला करने की जरूरत ही नहीं पड़ रही; बीजेपी के नेता खुद ही अपनी सरकार और अपने विधायकों की लुटिया डुबोने में लगे हैं। ताजा मामला चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा का है। यहां बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने अपनी ही पार्टी के वर्तमान विधायक अनिल नौटियाल के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला है कि पूरी पार्टी सन्न रह गई है। नेगी ने तंज कसते हुए कहा— “रामायण काल में कुंभकर्ण छह महीने सोता था और छह महीने जागता था, लेकिन हमारे कर्णप्रयाग के विधायक तो कुंभकर्ण के भी बाप निकले। वे पूरे पांच साल से ऐसे सोए हैं कि जनता त्रस्त है और विकास पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।– दोस्तो पूर्व विधायक का यह गुस्सा सिर्फ एक जुबानी तंज नहीं है, बल्कि इसके पीछे छुपा है साल 2027 के टिकट की दावेदारी का वो खूनी संघर्ष जो अब सार्वजनिक हो चुका है। सुरेंद्र सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि अनिल नौटियाल ने विधायक बनने के बाद क्षेत्र की सुध लेना पूरी तरह छोड़ दिया। सड़कों की हालत खस्ता है, स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं और जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भटक रही है। दोस्तो नेगी का दावा है कि वर्तमान विधायक की इसी निष्क्रियता के कारण जनता के बीच बीजेपी सरकार के खिलाफ भारी एंटी-इंकंबेंसी यानी नाराजगी पैदा हो रही है। एक पूर्व विधायक द्वारा अपनी ही सरकार के सिटिंग एमएलए के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाना साफ करता है कि चमोली में संगठन के भीतर सब कुछ बिखर चुका है। दोस्तो इस पूरे अंतर्कलह के राजनीतिक मायनों को समझिए। चमोली जिला कोई आम जिला नहीं है, यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का गृह जनपद है। जब प्रदेश अध्यक्ष के अपने ही घर में पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक आपस में लट्ठम-लट्टा हो रहे हों, तो यह साफ संदेश जाता है कि सूबे में संगठन पर से कमान ढीली हो चुकी है।
दोस्तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरेंद्र सिंह नेगी साल 2027 में कर्णप्रयाग सीट से दोबारा अपनी मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर अनिल नौटियाल को दोबारा टिकट मिला तो सीट हाथ से निकल सकती है, इसलिए वे अभी से नौटियाल की राजनीतिक जमीन को बंजर करने के प्लान पर काम कर रहे हैं। लेकिन इस चक्कर में उन्होंने अपनी ही सरकार के ‘विकास के दावों’ की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। इधर, दोस्तो बीजेपी के इस आंतरिक विस्फोट से कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है। हाल ही में रामशरण नौटियाल को अपने पाले में खींचकर पछवादून में बीजेपी को चित करने वाली कांग्रेस अब चमोली के इस गृहयुद्ध को लपकने के लिए तैयार बैठी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि— “हमें तो कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है, बीजेपी के पूर्व विधायक खुद ही अपनी सरकार का सच बयां कर रहे हैं कि उनके विधायक पांच साल से सोए हुए हैं।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बीजेपी की जमकर किरकिरी हो रही है, और दून मुख्यालय में बैठे रणनीतिकार अब डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आ गए हैं। दोस्तो अब कुंभकर्ण वाले इस बयान ने कर्णप्रयाग की सियासी वादियों में जो आग लगाई है, उसकी तपन 2027 के चुनाव परिणामों तक महसूस की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या प्रदेश संगठन सुरेंद्र सिंह नेगी पर अनुशासनहीनता का हंटर चलाता है या फिर अनिल नौटियाल अपनी इस ‘नींद’ को तोड़कर पूर्व विधायक को कोई करारा कानूनी या राजनीतिक जवाब देते हैं। दोस्तो सियासत में जब महत्वाकांक्षाएं हावी हो जाती हैं, तो मर्यादा के सारे बांध टूट जाते हैं। सुरेंद्र सिंह नेगी ने अनिल नौटियाल को कुंभकर्ण बताकर न सिर्फ उनका अपमान किया है, बल्कि कर्णप्रयाग में बीजेपी के ‘विकास’ के गुब्बारे की हवा भी निकाल दी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के गृह जनपद में लगी यह आग आने वाले दिनों में क्या नया गुल खिलाएगी।