जी हां एक सवाल ये की गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी कहां, क्या उत्तराखंड की एक कैबिनेट मंत्री का आरोपी पति कानून के लंबे हाथों को ठेंगा दिखाकर देश छोड़कर भाग चुका है? क्या पुलिस की सुस्ती का फायदा उठाकर पप्पू गिरधारी ने भारत की सीमा पार कर नेपाल में शरण ले ली है? देहरादून से लेकर भारत-नेपाल बॉर्डर तक मचे इस महा-हड़कंप की इनसाइड स्टोरी सुनेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे! दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की सबसे हाई-प्रोफाइल घरेलू और कानूनी जंग अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर आ चुकी है, जिसकी कल्पना खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सूबे के पुलिस महानिदेशक ने भी नहीं की होगी! कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े गंभीर SC-ST एक्ट और प्रताड़ना के मामले में फरार चल रहे उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के नेपाल भागने की भयंकर आशंका जताई जा रही है! मै आपको ये पूरी खबर बताउं उससे पहले देखिए कैसे महिला मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू का समर्थन उत्तराखंड के एक बड़़े मंत्री ही कर रहे हैं। दोस्तो सुना आपने तो क्या अपनी सहयोगी मंत्री के दर्द पर ही सवाल उठा रहे हैं मंत्री खजादास, क्या गिरधारी लाल साहू का समर्थन इस बयान को समझा जाए, ये आप तय करना दोस्तो कमेंट कर बताना, लेकिन मै आपको आगे कि खबर बताता हूं जो गिरधारी लाल साहू को लेकर एक बड़ा अपडेड आ रहा है वो।
दोस्तो देहरादून की विशेष अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद दून पुलिस और एसआईटी की टीमें उत्तर प्रदेश के बरेली और कई अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं, लेकिन हर जगह से खाली हाथ लौटने के बाद अब खुफिया तंत्र को जो इनपुट मिला है, उसने पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसका दी है! आशंका है कि पप्पू गिरधारी नेपाल बॉर्डर को पार कर चुका है, जिसके बाद उत्तराखंड से लगती पूरी नेपाल सीमा पर हाई-अलर्ट जारी कर दिया गया है! आखिर कैसे पुलिस की नाक के नीचे से एक हाई-प्रोफाइल आरोपी देश छोड़कर भागने की फिराक में कामयाब हो रहा है? वैसे दोस्तो उत्तराखंड की कानून व्यवस्था और वीआईपी मामलों की जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी को अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका लगा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तार करने का दावा करने वाली पुलिस अब खुद बैकफुट पर आ चुकी है। देहरादून की विशेष अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से फरार चल रहे पप्पू गिरधारी के बारे में खुफिया तंत्र को एक बेहद चौंकाने वाला इनपुट मिला है। इनपुट यह है कि पुलिस की मुस्तैदी को धता बताते हुए आरोपी गिरधारी लाल साहू भारत-नेपाल सीमा के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में है या शायद सीमा पार भी कर चुका है! इस इनपुट के मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने आनन-फानन में उत्तराखंड से लगती तमाम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर हाई-अलर्ट जारी कर दिया है।
दोस्तो समझने वाली बात है कि आखिर पुलिस की इस पूरी घेराबंदी में चूक कहाँ हुई। शनिवार को जब देहरादून की कोर्ट ने यह कहकर अग्रिम जमानत खारिज कर दी कि आरोपी ने स्टाफ के सामने मंत्री को जातिसूचक शब्द कहे थे, तभी से पप्पू गिरधारी अंडरग्राउंड हो गया था। पुलिस की एक विशेष टीम उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित उसके पैतृक आवास और व्यापारिक ठिकानों पर दबिश देने पहुंची, लेकिन वहां केवल सन्नाटा मिला। दोस्तो आरोपी ने चालाकी दिखाते हुए अपने सभी मोबाइल नंबर बंद कर दिए, जिससे उसका सर्विलांस लोकेशन ट्रैक करना नामुमकिन हो गया। रणनीतिकारों का मानना है कि पप्पू गिरधारी जानता था कि मंत्री पत्नी के राजनीतिक रसूख के कारण उत्तराखंड में छिपना मुमकिन नहीं है, इसलिए उसने सीधे नेपाल का ‘सेफ पैसेज’ चुनने की खतरनाक स्क्रिप्ट पर काम करना शुरू कर दिया। दोस्तो गिरधारी साहू के नेपाल भागने की इस आशंका ने सीमांत जिलों की पुलिस की रातों की नींद उड़ा दी है। ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों के कप्तानों को सीधे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल से जुड़ी सीमाओं पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) और लोकल पुलिस के साथ-साथ लोकल इंटेलिजेंस यूनिट यानी एलआईयू को भी मुस्तैद कर दिया गया है। सीमा पार जाने वाली हर गाड़ी, हर बस और पैदल यात्रियों के पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच की जा रही है। पप्पू गिरधारी की तस्वीरें और हुलिया बॉर्डर चौकियों पर चस्पा कर दिया गया है ताकि हुलिया बदलकर भी वो सीमा पार न कर सके। लेकिन सवाल यह है कि अगर वो पहले ही सीमा लांघ चुका है, तो इस अलर्ट का क्या फायदा?
दोस्तो यह मामला सिर्फ एक पति-पत्नी के घरेलू झगड़े का नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा बारूद बन चुका है। पप्पू गिरधारी ने अपनी मंत्री पत्नी पर 210 करोड़ रुपये के महा-भ्रष्टाचार का लाइव वीडियो आरोप लगाया था। ऐसे में एक ऐसे शख्स का देश छोड़कर भाग जाना, जिसके पास कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कई गोपनीय दस्तावेज और वित्तीय राज होने का दावा किया जा रहा है, धामी सरकार की साख को पूरी तरह मटियामेट कर सकता है। विपक्ष अब हमलावर है और पूछ रहा है कि क्या किसी बड़े घोटाले के राज को दबाने के लिए खुद सिस्टम ने ही पप्पू गिरधारी को नेपाल भागने का रास्ता दिया है? दोस्तो नेपाल भागने की इस आशंका ने एसआईटी की जांच पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या दून पुलिस नेपाल सीमा पार करने से पहले पप्पू गिरधारी को सलाखों के पीछे ला पाती है, या फिर यह हाई-प्रोफाइल आरोपी अंतरराष्ट्रीय सीमा का फायदा उठाकर कानून को ठेंगा दिखा देगा.. दोस्तो इसे कहते हैं कानून और व्यवस्था का पूरी तरह से फेल होना। जब एक कैबिनेट मंत्री खुद शिकायतकर्ता हो, एसआईटी जैसी बड़ी जांच एजेंसी पीछे लगी हो, उसके बावजूद आरोपी का मोबाइल बंद करके नेपाल भागने की आशंका पैदा हो जाए, तो आम जनता का पुलिसिया इकबाल से भरोसा उठना लाजमी है। क्या पप्पू गिरधारी नेपाल पुलिस की मदद से पकड़ा जाएगा या वो भारत की सीमा लांघकर हमेशा के लिए इस पूरे 210 करोड़ के राज को दफन कर देगा?