Jaunsar-Bawar Chakrata -त्यूनी में जमीन पर संग्राम | Rudra Sena | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो, जौनसार-बावर में जमीन को लेकर ऐसा संग्राम छिड़ा कि चकराता से त्यूनी तक प्रदर्शन की गूंज सुनाई दी! रुद्रसेना ने 700 बीघा विवादित जमीन का मुद्दा उठाते हुए कब्जामुक्त कराने की मांग की है। अवैध कब्जा साबित होने पर बुलडोजर चलाने की चेतावनी भी दी गई है। आखिर इस जमीन का पूरा विवाद क्या है? जनजातीय क्षेत्र में भूमि कानूनों को लेकर इतना बड़ा आंदोलन क्यों खड़ा हुआ? देखिए, इस पूरे विवाद की कहानी! दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत और शांत जौनसार-बावर क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी, सबसे विस्फोटक और झकझोर देने वाली खबर आ रही है! चकराता और त्यूनी की सड़कों पर हज़ारों का हुजूम एक ही नारे के साथ उतर आया है— ‘आज नहीं तो कल तुमको जाना होगा! दोस्तो जौनसार-बावर की लगभग 700 बीघा पवित्र जनजातीय भूमि को घुसपैठियों के अवैध कब्ज़े से मुक्त कराने की जंग अब अपने सबसे निर्णायक और आक्रामक चरण में पहुँच चुकी है। रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसरों को घेरकर सीधे प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है कि ‘अगर वक़्त रहते इन घुसपैठियों को बाहर नहीं खदेड़ा गया, तो इस क्षेत्र को कश्मीर बनते देर नहीं लगेगी!’ जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश के बाद उपजिलाधिकारी त्यूनी की कोर्ट में धारा 211 के तहत बेदखली के नोटिस पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। आखिर कैसे देवभूमि की इस वीर भूमि पर 700 बीघा ज़मीन का इतना बड़ा लैंड जिहाद या अवैध कब्ज़ा हो गया? क्यों जनता इन अवैध मकानों पर सीधे बुलडोज़र चलाने की मांग पर अड़ गई है? देवभूमि उत्तराखंड के शांत पहाड़ों में इस वक्त गुस्से का वो लावा फूटा है जिसकी तपन देहरादून के शासन तक महसूस की जा रही है। चकराता और त्यूनी की वादियां आज जयकारों और घुसपैठियों के ख़िलाफ़ नारों से दहल उठीं। रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के कोर कमेटी के पदाधिकारी और हज़ारों स्थानीय लोग चकराता और त्यूनी तहसील में लाठियां और झंडे लेकर कोर्ट परिसर में डट गए।

मामला सीधे जौनसार-बावर की अस्मिता से जुड़ा है, जहाँ लगभग 700 बीघा बहुमूल्य जनजातीय भूमि को कथित तौर पर बाहरी और अवैध घुसपैठियों ने अपने कब्ज़े में ले लिया है। संगठन ने दो टूक कह दिया है कि अब बातचीत का वक़्त खत्म हो चुका है, अब सीधे एक्शन का वक़्त है! चलिए दोस्तो अब समझते हैं कि आख़िर इस महा-संग्राम की असली वजह क्या है और क्यों ये मामला कोर्ट की चौखट तक पहुँचा है। रुद्रसेना के लंबे संघर्ष के बाद जिलाधिकारी देहरादून ने कड़ा रुख अपनाते हुए उपजिलाधिकारी त्यूनी को उत्तर प्रदेश ज़मींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 211 के अंतर्गत बेदखली की कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए थे। इसी निर्देश के बाद प्रशासन ने अवैध कब्ज़ेदारों को न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किए थे, और आज इसी प्रकरण में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट में तलब किया गया था। लेकिन रुद्रसेना के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट परिसर के बाहर ही चक्रव्यूह रच दिया और साफ कर दिया कि दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर पहाड़ों की ज़मीन हड़पने का यह खेल अब और नहीं चलेगा। दोस्तो रुद्रसेना और जौनसार-बावर के लोगों ने प्रशासन के सामने 5 ऐसी मांगें रख दी हैं जिन्होंने भू-माफियाओं और अवैध घुसपैठियों की रातों की नींद उड़ा दी है। पहली मांग, 700 बीघा विवादित भूमि के अभिलेखों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जाँच हो और ज़मीन को तुरंत राज्य सरकार में निहित किया जाए। दूसरी मांग, भूमि हस्तांतरण के सभी मामलों का नियमानुसार अति-शीघ्र निस्तारण हो।

तीसरी मांग, जनजातीय अनुसूचित क्षेत्र (ST Area) में ज़मीन की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण के नियमों का अक्षरशः सख्ती से पालन हो ताकि कोई बाहरी व्यक्ति यहाँ ज़मीन न हड़प सके। चौथी और सबसे आक्रामक मांग, जैसे ही कोर्ट में अवैध कब्ज़ा प्रमाणित होता है, वैसे ही प्रशासन ज़्यादा वक़्त न देखे; तुरंत इन सभी अवैध मकानों पर योगी मॉडल की तर्ज पर बुलडोज़र चलाकर इन्हें तत्काल देवभूमि की सीमा से बाहर खदेड़ा जाए। पांचवीं माग,
संगठन के पदाधिकारियों के साथ हुई अभद्रता की भी निष्पक्ष जाँच की मांग की गई है। दोस्तो इस आंदोलन की सबसे गंभीर और डराने वाली चेतावनी यह है कि स्थानीय जनता का मानना है कि यदि आज इस 700 बीघा ज़मीन को मुक्त नहीं कराया गया, तो कल को बाहरी तत्वों की जनसांख्यिकी (Demography) इस कदर बदल जाएगी कि इस शांत पर्वतीय क्षेत्र को कश्मीर बनते देर नहीं लगेगी। दोस्तो जौनसार-बावर एक संवेदनशील जनजातीय क्षेत्र है जिसकी अपनी अनूठी संस्कृति और मर्यादा है। यदि यहाँ सुनियोजित तरीके से घुसपैठ कर ज़मीनें दबाई जा रही हैं, तो यह सीधे तौर पर उत्तराखंड की सुरक्षा और अस्मिता पर बहुत बड़ा हमला है। यही वजह है कि रुद्रसेना ने साफ़ कर दिया है कि जब तक आख़िरी इंच ज़मीन कब्जामुक्त नहीं होती, यह आंदोलन और भी ज़्यादा उग्र और हिंसक रूप अख्तियार कर सकता है। दोस्तो आज चकराता और त्यूनी की अदालतों में हुई यह हलचल महज़ एक कानूनी कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की माटी को बचाने का एक महा-आह्वान है। अब देखना यह होगा कि धामी सरकार का बुलडोज़र इन ७०० बीघा के कथित घुसपैठियों पर कब गरजता है और प्रशासन कितनी जल्दी इस विवाद का अंतिम निस्तारण करता है। तो दोस्तो जौनसार-बावर की जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देवभूमि की छाती पर अवैध कब्ज़े और जनसांख्यिकीय परिवर्तन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धारा 211 का हंटर चल चुका है, नोटिस बांटे जा चुके हैं, और अब जनता को सिर्फ एक ही चीज़ का इंतज़ार है— और वो है घुसपैठियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र का चलना! अगर इस मामले में ज़रा भी ढिलाई बरती गई, तो यह आंदोलन उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा जनांदोलन बन सकता है। पहाड़ों में बढ रहे ज़मीन विवाद और इस महा-विवाद पर क्या कहेंगे आप।