Ankita Bhandari Case में पुलिस पर एक्शन!| LIU Inspector | Justice For Ankita | Uttarakhand News

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दोस्तो अंकिता केस में बड़ी कार्रवाई हई है, ये सुन कर आपको लग रहा होगा कि अब न्याय जल्द मिल जाएगा, लेकिन आप यहां गलत हैं। जो कार्रवाई हुई है उसको देखेंगे सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे। अंकिता भंडारी के माता-पिता के दिल्ली जाने से आखिर पुलिस महकमे में क्यों मचा हड़कंप? पौड़ी गढ़वाल के LIU इंस्पेक्टर पर निलंबन की कार्रवाई क्यों हुई? क्या खुफिया तंत्र की बड़ी चूक सामने आई है? और इंडिया गेट पर धरने के बाद अब इस कार्रवाई के क्या मायने हैं? देखिए, पूरी खबर! दोस्तो दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में अंकिता के बेबस माता-पिता देहरादून से सीधे दिल्ली के इंडिया गेट पहुंच गए, वहां धरना दे दिया, पुलिस ने उनके पोस्टर तक छीन लिए, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड पुलिस के खुफिया तंत्र यानी लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की पोल खोलकर रख दी है.. दोस्तो इतने संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार पौड़ी गढ़वाल से दिल्ली पहुंच गया और हमारी एलआईयू सोती रही! इस भयंकर इनपुट फेलियर को शासन और पुलिस मुख्यालय ने बेहद गंभीरता से लिया है। पौड़ी गढ़वाल के एलआईयू इंस्पेक्टर सरदेव सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड यानी निलंबित कर दिया गया है! आखिर कैसे फेल हुआ खुफिया विभाग? क्या यह सिर्फ एक इंस्पेक्टर की लापरवाही है या सिस्टम की कोई बड़ी चूक? दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नामजद होने और उसे राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ उपजा जनाक्रोश अब पूरी तरह से प्रशासनिक रार में तब्दील हो चुका है। दिल्ली के इंडिया गेट पर हुए विरोध प्रदर्शन की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उत्तराखंड पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ गई।

पौड़ी गढ़वाल के लोकल इंटेलिजेंस यूनिट यानी एलआईयू के इंस्पेक्टर सरदेव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस कप्तानों और आला अधिकारियों के निर्देश पर यह गाज इसलिए गिरी है क्योंकि इतने संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार पौड़ी से दिल्ली कूच कर गया और स्थानीय एलआईयू को इसकी कानों-कान भनक तक नहीं लग। यहां दोस्तो आपको बताते हैं कि इस निलंबन के पीछे की असली क्रोनोलॉजी क्या है। दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद से ही पूरे उत्तराखंड में उबाल था। अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली जाकर इंडिया गेट पर सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ धरना देने का गुपचुप प्लान बनाया। नियमतः स्थानीय एलआईयू का काम होता है कि वह ऐसे हर संवेदनशील मूवमेंट की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों और शासन को दे ताकि समय रहते डैमेज कंट्रोल किया जा सके, लेकिन दोस्तो सरदेव सिंह की अगुवाई वाली एलआईयू टीम पूरी तरह फेल साबित हुई। माता-पिता दिल्ली पहुंच गए, वहां हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, पुलिस को बलप्रयोग कर पोस्टर छीनने पड़े, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की किरकिरी हुई। जब दिल्ली से फोन देहरादून के पुलिस मुख्यालय में खड़का, तब जाकर सो रहे खुफिया विभाग की नींद टूटी।

दोस्तो राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस सस्पेंशन को लेकर अब नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस पूरे राष्ट्रीय बवाल का ठीकरा फोड़ने के लिए एक इंस्पेक्टर को बकरा बनाया गया है, या फिर वाकई यह राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया इनपुट के लिहाज से अक्षम्य कोताही थी? पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक, संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने की नीति के तहत यह कड़ा एक्शन लिया गया है। इस सस्पेंशन से पूरे सूबे के एलआईयू और इंटेलिजेंस विंग में हड़कंप मच गया है और अब हर छोटे-बड़े आंदोलनकारी की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। दोस्तो अंकिता भंडारी केस में न्याय की लड़ाई सड़कों से होते हुए अब खुफिया तंत्र की कुर्सियां हिलाने लगी है। इंस्पेक्टर सरदेव सिंह का निलंबन यह साफ करता है कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी घबराई हुई है और किसी भी कीमत पर इस आंदोलन को और बड़ा नहीं होने देना चाहती। लेकिन देखना यह होगा कि इस प्रशासनिक हंटर के बाद अंकिता के माता-पिता का गुस्सा शांत होता है या इंसाफ की यह जंग और उग्र रूप अख्तियार करती है। दोस्तो खुफिया विभाग का काम सरकार की आंख और कान बनना होता है, लेकिन जब आंखें मूंद ली जाएं और कान बंद कर लिए जाएं, तो ऐसे ही सस्पेंशन ऑर्डर जारी होते हैं। पौड़ी के एलआईयू इंस्पेक्टर सरदेव सिंह पर गिरी यह गाज साफ संदेश है कि अंकिता भंडारी केस से जुड़े हर एक एक्शन पर सरकार की कितनी पैनी और संवेदनशील नजर है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद इंटेलिजेंस कितनी मुस्तैद होती है और दिल्ली से शुरू हुई यह रार देहरादून में क्या नया रंग लाती है।