Ankita केस छवि की चिंता या न्याय के सवाल? | Rekha Arya | Dushyant Gautam | Uttarakhand News

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दोस्तो, पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग के बीच अब उत्तराखंड की सियासत में एक नया सवाल खड़ा हो गया है! कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य दुष्यंत कुमार गौतम के समर्थन में उतरी हैं। उनका कहना है कि जानबूझकर किसी की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।लेकिन सवाल है—जब अंकिता के माता-पिता न्याय की मांग कर रहे हैं, तब इस पूरे मामले में छवि और सियासत की चर्चा क्यों? क्या मंत्री के बयान से उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा? और क्या पीड़ित परिवार की मांगों पर सरकार स्पष्ट जवाब देगी?आखिर अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में अब बयानबाजी क्यों तेज हो गई है?” दोस्तो स्वागत है आपका देवभूमि के उस ‘अद्भुत और जादुई’ न्याय सिस्टम में, जहाँ इंसाफ मांगने की एक बहुत ही अनोखी परिभाषा तय की गई है! अगर आपकी बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी जाए, और आप 4 साल तक रोते-बिलखते हुए देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर सिर्फ ये गुहार लगाने बैठ जाएं कि साहिब—‘जब तक जांच चल रही है, तब तक संदिग्धों को बड़े पदों से मत नवाज़ो’ तो हमारा महान सिस्टम क्या करता है? वो आधी रात को भारी-भरकम पुलिस भेजकर, उस बूढ़ी माँ को सड़क पर घसीटते हुए अपराधियों की तरह वैन में ठूंसकर हिरासत में ले लेता है! और ठीक उसी वक़्त, उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य देहरादून में एक बेहद ‘अजब-गजब’ और दिव्य तर्क लेकर मीडिया के सामने अवतरित होती हैं! मंत्री जी का फरमान है कि अंकिता के माता-पिता ही गलत हैं, और दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर हुई शाही नियुक्ति बिल्कुल सही है! वाह मंत्री जी, वाह! क्या गज़ब का विज़न है! यह इंडिया गेट की वो पावन धरती है, जहाँ शहीदों के सम्मान में ज्योतियां जलती हैं, लेकिन उसी रोशनी के नीचे एक अभागन माँ की आंसुओं से भीगी आस्तीन को दिल्ली पुलिस के बूट कुचल रहे थे।

अंकिता भंडारी के बुजुर्ग माता-पिता का कसूर सिर्फ इतना था कि वे अपनी बेटी की मौत के वीआईपी चेहरे को बेनकाब करने की जिद पर अड़े थे। बुधवार को जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनसे मिलने पहुंचे, तो मानो हुक्मरानों के सिंहासन डोल गए. फिर क्या था? ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’ का परिचय देते हुए, आधी रात के सन्नाटे में पुलिसिया तंत्र जागा और अपराधियों को पकड़ने में सुस्त रहने वाली खाकी ने इन लाचार बुजुर्गों को उठाकर हवालात के मुहाने पर खड़ा कर दिया. गजब का इंसाफ है—बेटी गंवाने वाले सलाखों के पीछे हैं, और जिन पर उंगलियां उठ रही हैं, उनके स्वागत में रेड कार्पेट बिछाए जा रहे हैं! दोस्तो दिल्ली में जब यह शर्मनाक तमाशा चल रहा था, ठीक उसी वक़्त देहरादून में उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने एक बेहद ‘ज्ञानवर्धक’ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री जी का विभाग वैसे तो ‘महिला सशक्तिकरण’ का है, लेकिन उनके तर्क सुनकर अंकिता की आत्मा भी हैरान रह गई होगी। मंत्री जी ने बहुत ही तंजिया लहजे में कांग्रेस और अंकिता के माता-पिता को लपेटते हुए कहा—‘जब सीबीआई (CBI) जांच चल रही है, तो जांच के निष्कर्ष का इंतजार क्यों नहीं करते? जांच पर भरोसा क्यों नहीं करते?’ वाह! क्या गज़ब की सीख है! ४ साल से जो माता-पिता कोर्ट-कचहरी की धूल फाँक रहे हैं, उन्हें मंत्री जी समझा रही हैं कि थोड़ा और सब्र रखो, हड़बड़ी मत मचाओ! जनता पूछ रही है मंत्री जी, कि क्या यही वो महिला सशक्तिकरण है, जिसकी कसमें खाकर आप इस कुर्सी पर बैठी हैं? दोस्तो मंत्री जी के तर्कों का पिटारा यहीं बंद नहीं हुआ। जब मीडिया ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उठ रहे बवंडर पर सवाल किया, तो मंत्री जी ने बहुत ही कैजुअल अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा कि—‘राज्यपाल बनाना तो एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया है, इस पर इतना हल्ला-गुल्ला और शोर क्यों मचाया जा रहा है?’ जी हां! मंत्री जी के लिए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मर्डर मिस्ट्री के वीआईपी एंगल से जुड़े नाम को देश के सर्वोच्च और सुरक्षित राजभवन की मलाईदार कुर्सी पर बैठा देना महज़ एक ‘रूटीन वर्क’ है! इसे कहते हैं वीआईपी सुरक्षा का वो अभेद्य किला, जहां रसूखदारों को ‘शाही सम्मान’ का कवच पहना दिया जाता है और इंसाफ मांग रहे गरीबों की आवाज़ को ‘शोर-शराबा’ बताकर खारिज कर दिया जाता है।

दोस्तो जब देश के शीर्ष विपक्षी नेता सड़कों पर उतरकर इस गरीब परिवार के आंसू पोंछते हैं, तो सरकार को उसमें सिर्फ और सिर्फ ‘राजनीति’ नज़र आती है। मंत्री रेखा आर्य ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कांग्रेस पर इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण करने का ठीकरा फोड़ दिया। लेकिन जनता यह तीखा सवाल पूछ रही है कि अगर विपक्ष राजनीति कर रहा है, तो सरकार क्या कर रही है? क्या आधी रात को माता-पिता को जेल भेजना ‘राजधर्म’ है? अंकिता भंडारी को ऐसे कैसे न्याय मिलेगा, जब न्याय की पहली सीढ़ी पर चढ़ते ही पीड़ितों को खाकी के जूतों से कुचल दिया जाए? यह अजब-गजब तर्क देवभूमि की जनता कभी नहीं भूलेगी। दस्ोत मंत्री जी के इस दिव्य ज्ञान और दिल्ली पुलिस के इस ‘महा-पराक्रम’ ने यह साफ़ कर दिया है कि सत्ता के नशे में चूर हुक्मरानों को अब जनता के आंसुओं की कोई परवाह नहीं है। लेकिन याद रखिएगा, जब एक माँ की कराह और पिता का आक्रोश सड़कों पर बिखरता है, तो बड़े-बड़े राजमहलों की दीवारें दरक जाती हैं। मंत्री रेखा आर्य के इस ‘अजब-गजब’ तर्क और माता-पिता की इस शर्मनाक गिरफ्तारी पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं।