Kunjapuri Mela Daler Mehndi विवाद में 35 लाख की फीस पर सवाल! | Subodh Uniyal | Uttarakhand News

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दोस्तो, देहरादून से उठे दलेर मेहंदी विवाद में अब अभिनेता रजा मुराद की एंट्री! 35 लाख रुपये की फीस, मंच पर मंत्री सुबोध उनियाल की नाराजगी और पहाड़ी कलाकारों को मौका देने की बहस—इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रजा मुराद ने आखिर ऐसा क्या कहा कि विवाद को नया मोड़ मिल गया? क्या ये कलाकार के सम्मान का सवाल है, जनता के पैसे का मुद्दा या फिर स्थानीय बनाम बाहरी कलाकारों की बहस? दोस्तो ‘बोला तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाओगे?’ देवभूमि उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध कुंजापुरी मेले के मंच से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के इन चंद शब्दों ने पूरे देश के कला जगत में एक ऐसी आग लगा दी है जो अब बुझने का नाम नहीं ले रही है! जहाँ एक तरफ 35 से 40 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लेने के बाद भी मंच पर ‘लिप-सिंक’ करने और ठीक हालत में न होने का आरोप सिंगर पर लगाया गया, तो वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों में एक नया नेरेटिव शुरू हो गया है कि जनता का यह पैसा किसी पहाड़ी कलाकार को क्यों नहीं दिया गया? लेकिन इन सब के बीच, इस महासंग्राम में एंट्री हुई है बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेताओं में से एक—रजा मुराद की! रजा मुराद ने इस पूरे विवाद पर एक ऐसा पक्ष रखा है जिसने मंत्री जी के रसूख को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या वाकई दलेर मेहंदी के बहाने पहाड़ों में बाहरी बनाम पहाड़ी कलाकारों का एक एजेंडा चलाया जा रहा है, या फिर यह सीधे-सीधे एक लेजेंड कलाकार का सरेआम अपमान है? दोस्तो उत्तराखंड के नरेंद्रनगर में चल रहे ऐतिहासिक और प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां कुंजापुरी मेले के दौरान रविवार की शाम को जो कुछ भी हुआ, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मंच सज चुका था, सामने हजारों की भीड़ थी और माइक पर थे सुरों के बेताज बादशाह दलेर मेहंदी। लेकिन तभी अचानक सूबे के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर चढ़ते हैं और लाइव शो के बीच में ही सिंगर की जमकर क्लास लगा देते हैं।

मंत्री जी का गुस्सा सातवें आसमान पर था और उनका सीधा आरोप था कि करीब 35 से 40 लाख रुपये की मोटी फीस देने के बाद भी कलाकार मंच पर ठीक हालत में नहीं था और ओरिजनल गाने की बजाय केवल लिप-सिंक कर रहा था। इधर दोस्तो इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद पर अब फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने खुलकर अपना पक्ष रखा है। दलेर मेहंदी के समर्थन में आते हुए रजा मुराद ने कहा कि, ‘दलेर मेहंदी सिर्फ एक सिंगर नहीं, बल्कि देश की एक बड़ी धरोहर और लेजेंड हैं। अगर किसी परफॉर्मेंस को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति थी भी, तो उसे मंच के पीछे या अकेले में सुलझाया जाना चाहिए था।’ रजा मुराद ने मंत्री सुबोध उनियाल के तरीके पर तीखा ऐतराज जताते हुए साफ किया कि किसी भी कलाकार को भरी सभा में इस तरह सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाना और अपमानित करना बेहद निंदनीय है, क्योंकि कला और कलाकार का सम्मान किसी भी रसूख से ऊपर होता है। दोस्तो लेकिन बात सिर्फ रजा मुराद या बॉलीवुड के बयानों तक सीमित नहीं है। इस विवाद के बाद उत्तराखंड के सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में एक नया और तीखा ‘नेरेटिव वार’ छिड़ गया है। पहाड़ों के कुछ लोगों का कहना है कि हमारे पहाड़ में बेहद सीधे और भोले-भाले लोग रहते हैं, और किसी ने यह नैरेटिव फैला दिया कि 35 लाख जैसी बड़ी रकम दलेर मेहंदी को देने के बजाय अगर उत्तराखंड के ही किसी स्थानीय पहाड़ी कलाकार को मौका दिया जाता, तो वह कहीं बेहतर होता।

दोस्तो हालांकि, इस नैरेटिव का जवाब देते हुए संस्कृति और संगीत के जानकारों का एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। उनका साफ कहना है कि दलेर मेहंदी से बड़ा पहाड़ों में इस वक्त कोई सिंगर नहीं है। इस मेले में स्थानीय और पहाड़ी कलाकारों को भी पूरा मौका दिया गया था और वे भी अपनी प्रस्तुतियां देने आए थे, लेकिन कुछ लोगों को सच्चाई से कोई सरोकार नहीं है; उन्हें सिर्फ एक नकारात्मक नैरेटिव खड़ा करना है। दलेर मेहंदी एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड हैं और उन्हें सुनने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ती है, ऐसे में स्थानीय कलाकारों के साथ उनकी तुलना करके केवल राजनीति चमकाने की कोशिश की जा रही है। दोस्तो एक तरफ जहां मंत्री सुबोध उनियाल का दावा है कि वे जनता के पैसे की बर्बादी और मां कुंजापुरी के दरबार में मर्यादा टूटने को लेकर नाराज थे, तो वहीं दलेर मेहंदी के भाई और संगीत जगत के दिग्गजों का कहना है कि दलेर पाजी की तबीयत ठीक नहीं थी और वे कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाते। अब यह पूरी बहस इस बात पर टिक गई है कि क्या एक मंत्री का रवैया सही था या फिर एक अंतरराष्ट्रीय कलाकार की पेशेवर लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाना जायज था? देवभूमि से शुरू हुआ यह विवाद अब कला, राजनीति और क्षेत्रीय अस्मिता के बीच एक बेहद पेचीदा मोड़ ले चुका है। दोस्तो रजा मुराद ने इसे कलाकार की गरिमा पर चोट बताया है, तो वहीं मंत्री सुबोध उनियाल अपने इस स्टैंड पर अडिग हैं कि जनता के पैसे और मां के दरबार के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। पहाड़ों में स्थानीय बनाम बाहरी कलाकारों को लेकर छिड़ी यह बहस भी अब एक नई दिशा ले रही है।