एक फोन कॉल और उत्तराखंड की सियासत में मचे बवाल को शांत करने की कोशिश! आखिर दलेर मेहंदी और मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुद क्यों उतरना पड़ा? क्या दलेर मेहंदी की नाराजगी दूर करने के लिए CM धामी का फोन काफी था? और सबसे बड़ा सवाल—क्या मुख्यमंत्री की इस पहल से सरकार की छवि पर उठ रहे सवाल थम जाएंगे, या फिर सुबोध उनियाल के लिए अब भी माफी का सवाल बरकरार है? देखिए, नरेंद्रनगर मेले के विवाद में धामी के फोन कॉल की पूरी कहानी! दोस्तो जब सरकार का कोई सिपहसालार अपने गुस्से से विवाद की आग सुलगा दे, तब एक कुशल कप्तान की असली परीक्षा होती है। सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर संकटमोचक की भूमिका निभाकर अपनी राजनैतिक परिपक्वता साबित कर दी है? सवाल यह भी है कि जिस मामले को लेकर पूरी फिल्म इंडस्ट्री देवभूमि की सरकार के खिलाफ लामबंद हो रही थी, उसे मुख्यमंत्री ने सिर्फ एक फोन कॉल से कैसे शांत कर दिया? दोस्तो नरेंद्रनगर के मेले में मंत्री सुबोध उनियाल और सिंगर दलेर मेहंदी के बीच जो हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, उसने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया था। लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले मीका सिंह और फिर खुद दलेर मेहंदी को सीधे फोन मिलाकर न सिर्फ उनका कुशलक्षेम जाना, बल्कि ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा का हवाला देते हुए विवाद की इतिश्री कर दी।
दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की साख पर आंच आने से पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फ्रंट फुट पर आकर कमान संभाल ली है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा मंच पर दलेर मेहंदी को खरी-खोटी सुनाए जाने के बाद जब बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे विरोध में उतर आए, तो मुख्यमंत्री ने खुद मामले को शांत करने की पहल की। सीएम धामी ने सीधे दलेर मेहंदी को फोन मिलाया। उन्होंने बहुत ही विनम्रता के साथ गायक से बातचीत की और कहा कि उत्तराखंड में कला और कलाकारों का हमेशा सर्वोच्च सम्मान होता है, लिहाजा पुरानी बातों को पीछे छोड़कर सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सीएम धामी ने एक्स पर लिखा,”दलेर मेहंदी जी से फोन पर वार्ता कर उनका कुशलक्षेम जाना। हमारा प्रयास है कि इस घटनाक्रम को पीछे छोड़कर आपसी संवाद, सौहार्द और सकारात्मकता की भावना के साथ आगे बढ़ा जाए।”
दोस्तो इस फोन कॉल का असर भी तुरंत देखने को मिला। मुख्यमंत्री की इस सहजता और सम्मानजनक दृष्टिकोण की तारीफ खुद दलेर मेहंदी के भाई मीका सिंह ने भी की है। हालांकि, मीका सिंह अभी भी मंत्री सुबोध उनियाल से एक व्यक्तिगत माफी की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि कलाकार की प्रतिष्ठा को लगी चोट पर पूरी तरह से मरहम लग सके। लेकिन धामी के इस बड़े राजनैतिक कदम ने यह साफ कर दिया कि जब सरकार के किसी फैसले या व्यवहार पर सवाल उठते हैं, तो एक परिपक्व नेतृत्व कैसे आगे बढ़कर डैमेज कंट्रोल करता है। दोस्तो इधर राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो धामी का यह कदम महज एक शिष्टाचार कॉल नहीं था, बल्कि यह सरकार की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल होने से बचाने की एक सोची-समझी रणनीति थी। आगामी राजनैतिक समीकरणों को देखते हुए भी सरकार किसी विवाद को लंबा नहीं खींचना चाहती थी। सुबोध उनियाल के तीखे तेवरों से उपजे इस पूरे बवंडर को शांत कर मुख्यमंत्री ने साबित कर दिया है कि एक बड़ा नेता वही होता है जो विवादों को बढ़ावा देने के बजाय उन्हें अपनी सूझबूझ से सुलझाना जानता है। फिलहाल, दलेर मेहंदी विवाद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फोन पर बातचीत ने सुलह की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं। क्या मुख्यमंत्री की पहल से इस पूरे विवाद पर विराम लग जाएगा? क्या मंत्री सुबोध उनियाल की ओर से भी माफी की मांग पर कोई कदम उठाया जाएगा? और क्या इस घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड सरकार कलाकारों के सम्मान को लेकर कोई स्पष्ट संदेश देगी?क्योंकि सवाल सिर्फ एक कलाकार की नाराजगी का नहीं, बल्कि देवभूमि की मेहमाननवाजी और सार्वजनिक मंच पर जनप्रतिनिधियों के व्यवहार का भी है। अब देखना होगा कि धामी की पहल विवाद को कितना सुलझा पाती है।