लिवाड़ी में आज भी ‘डंडी-कांडी’ का सहारा! 12 KM पैदल… कब मिलेगी सड़क की सुविधा? | Uttarakhand News

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उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड के सीमांत लिवाड़ी गांव में आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सड़क सुविधा न होना सिस्टम की बड़ी नाकामी को बयां करता है। हाल ही में गाँव के एक 21 वर्षीय बीमार युवक की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उसे ‘डंडी-कांडी’ (कंधे पर डोली) के सहारे करीब 12 किलोमीटर के बेहद जर्जर और खतरनाक रास्तों से पैदल ले जाना पड़ा। उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल पूरे होने के बाद भी सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य आपातकाल के समय एम्बुलेंस के बजाय ग्रामीणों का डोली पर निर्भर होना बेहद चिंताजनक और दर्दनाक स्थिति को दर्शाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि लिवाड़ी गांव को जोड़ने वाली इस सड़क परियोजना को वर्ष 2013 में ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन लोनिवि और ठेकेदारों की घोर लापरवाही के कारण 13 साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। जगह-जगह से क्षतिग्रस्त और झाड़ियों से पटे पैदल रास्तों पर जान जोखिम में डालकर मरीज को जखोल मुख्य मार्ग तक पहुंचाने वाले स्थानीय लोग अब सरकार के खिलाफ बेहद आक्रोशित हैं।