उत्तराखंड में कुदरत की दो अलग-अलग चुनौतियां और मोर्चे पर रेस्क्यू टीमें! एक तरफ उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर भारी बर्फबारी और एवलांच ने रास्ता रोक दिया है, जहां आठ लोग अब भी फंसे हुए हैं। दूसरी तरफ हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज से पानी का प्रवाह बढ़ने के बाद गंगा के टापू पर करीब 35 लोग फंस गए। हालांकि SDRF और जल पुलिस की टीम ने सभी 35 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।एक तरफ आठ लोगों तक पहुंचने की जद्दोजहद जारी है, तो दूसरी तरफ 35 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत मिली है। आखिर दोनों जगह रेस्क्यू टीमों के सामने कैसी चुनौतियां आईं? बर्फीले पहाड़ से उफनती गंगा तक, देखिए उत्तराखंड में रेस्क्यू ऑपरेशन की ये पूरी तस्वीर। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड में इस वक्त कुदरत का दोहरा प्रहार देखने को मिला है, एक तरफ पहाड़ों पर बर्फ का जलजला है, तो दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में नदियों का उफान! लेकिन इस आसमानी और जमीनी आफत के बीच अगर कोई देवदूत बनकर खड़ा है, तो वो है हमारी जांबाज रेस्क्यू टीमें! उत्तराखंड के दो अलग-अलग कोनों से दो ऐसी दिल दहला देने वाली खबरें सामने आई हैं, जिसने पूरे राज्य के आपदा प्रबंधन महकमे को हाई-अलर्ट पर डाल दिया है। पहली खौफनाक खबर उत्तरकाशी के दुर्गम ‘केदारताल ट्रेकिंग रूट’ से है, जहां एवलांच यानी बर्फ के तूफान ने रास्ता रोक दिया है और शून्य से नीचे तापमान के बीच 8 ट्रैकर्स जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
वहीं, दूसरी रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर धर्मनगरी हरिद्वार के भीमगोड़ा बैराज से आई है, जहां अचानक पानी छोड़े जाने से गंगा के बीच बने टापू पर 35 जिंदगियां काल के गाल में समाने वाली थीं! लेकिन फिर शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा ‘महा-रेस्क्यू ऑपरेशन’! कैसे हमारी SDRF, NDRF और पुलिस के जवानों ने मौत को मात देकर इन जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकाला। दोस्तो इन तस्वरों को देख रहे हैं कुदरत का ऐसा खौफनाक मंजर जिसने हर किसी की सांसें थाम दीं! एक तरफ चिलचिलाती ठंड में जमी बर्फ की चट्टानें, तो दूसरी तरफ लहरों का वो रौद्र रूप जो पल भर में सबकुछ निगलने के लिए बेताब था। लेकिन जब-जब उत्तराखंड में आफत आई है, तब-तब हमारी रेस्क्यू टीमों ने अपनी जान हथेली पर रखकर नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाया है। उत्तरकाशी से लेकर हरिद्वार तक, इस वक्त राज्य में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे आक्रामक महा-रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है! दोस्तो सबसे पहले बात करते हैं उत्तरकाशी की उस आसमानी आफत की, जिसने गंगोत्री के पहाड़ों में हाहाकार मचाया है। 7 ट्रेकर्स और 6 सपोर्ट स्टाफ समेत 13 लोगों का एक ग्रुप केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। लेकिन मौसम ने ऐसी करवट बदली कि केदारताल ट्रेकिंग रूट पर भारी एवलांच यानी बर्फ का तूफान आ गया। रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया, भारी बर्फबारी और ग्लेशियरों के खिसकने से यह ग्रुप ‘भोज खड़क’ के आगे फंस गया। जब तय वक्त पर ग्रुप वापस नहीं लौटा, तो जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और तुरंत NDRF, SDRF और वन विभाग की टीमों को डेंजर जोन में उतारा गया!
दोस्तो इधर दुर्गम रास्तों और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच रेस्क्यू टीमों को पहली बड़ी कामयाबी ‘कच्ची ढांग’ के पास मिली, जहां 3 पोर्टर और 1 कुक समेत 4 लोगों को सकुशल ढूंढ निकाला गया। लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है! ‘भोज खड़क’ के उस पार अभी भी 8 जिंदगियां फंसी हुई हैं। रास्ता बंद है, मौसम लगातार खराब हो रहा है और खड़ी पहाड़ियों पर चलना मौत को दावत देने जैसा है। उत्तरकाशी जिला प्रशासन इस वक्त पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहा है और अब इन 8 लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद लेने की तैयारी की जा रही है! दोस्तो जहां पहाड़ पर बर्फ का तूफान था, तो मैदानी इलाके हरिद्वार में पानी का तांडव! भीमगोड़ा बैराज से अचानक पानी का प्रवाह बढ़ा दिया गया। जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग के ठीक पीछे बने एक सूखे टापू पर मौजूद करीब 35 लोग चारों तरफ से उफनती गंगा के पानी से घिर गए! पानी की लहरें लगातार टापू की जमीन को निगल रही थीं और वहां फंसे लोगों की चीखें गूंज रही थीं। आपदा कंट्रोल रूम को जैसे ही सूचना मिली, बिना एक सेकंड गंवाए SDRF की 40वीं वाहिनी PAC और जल पुलिस की संयुक्त टीम मौत की लहरों के बीच कूद पड़ी! दोस्तो गंगा का बहाव इतना तेज था कि नाव का संतुलन बनाना मुश्किल था, लेकिन हमारे जांबाजों के हौसले इन लहरों से भी ज्यादा ऊंचे थे। SDRF और जल पुलिस के जवानों ने एक बेहद समन्वित और आक्रामक रणनीति बनाई। रस्सियों और हाई-टेक लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे उफनती लहरों को चीरते हुए जवान टापू तक पहुंचे। एक-एक करके, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों समेत सभी 35 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया! जवानों की इस तत्परता ने एक बहुत बड़े और दर्दनाक हादसे को टाल दिया, जिसके बाद किनारे पर मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। दोस्तो उत्तरकाशी के बर्फीले तूफान से लेकर हरिद्वार की उफनती लहरों तक, उत्तराखंड की इस आपदा ने साबित कर दिया है कि पहाड़ पर जिंदगी जितनी खूबसूरत है, उतनी ही खतरनाक भी। लेकिन सैलानियों और स्थानीय लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि जब तक हमारी रेस्क्यू टीमें मुस्तैद हैं, मौत छूकर भी निकल जाएगी। हरिद्वार में 35 जिंदगियां सुरक्षित हैं और उत्तरकाशी में फंसे बाकी 8 लोगों को भी बहुत जल्द सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।