Election2027 Candidates UKD का चुनावी शंखनाद!। Surendra Kukreti। BJP। Congress । Uttarakhand News

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उत्तराखंड की सियासत में 2027 के चुनाव का पहला बड़ा दांव किसने चल दिया? जब भाजपा और कांग्रेस की चुनावी तैयारियां जारी हैं, तब उत्तराखंड क्रांति दल यानी UKD ने 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। पिथौरागढ़ से काशी सिंह ऐरी की वापसी हो या द्वाराहाट से पुष्पेश त्रिपाठी पर भरोसा—इस सूची में कई पुराने और नए चेहरे शामिल हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या UKD इस बार सिर्फ टिकटों का ऐलान कर रही है या पहाड़ की राजनीति में तीसरा विकल्प खड़ा करने की तैयारी है? आखिर प्रत्याशियों के चयन में कौन सा फॉर्मूला अपनाया गया और किन सीटों पर पार्टी ने बड़ा दांव खेला है? दोस्तो, उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बज चुका है, और इस चुनावी समर में वो हो गया है जिसकी उम्मीद बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को भी नहीं थी! भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियाँ जब तक अपनी रणनीतियों के ताने-बाने बुनतीं, तब तक उत्तराखंड के अपने क्षेत्रीय दल—उत्तराखंड क्रांति दल यानी UKD ने बाजी मार ली है! दोस्तो उक्रांद ने अपने 16 दिग्गज प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर राज्य की सियासत में खलबली मचा दी है। पार्टी के सबसे कद्दावर नेता और राज्य आंदोलन के जननायक काशी सिंह ऐरी एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट पिथौरागढ़ से चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती का दावा है कि इस बार टिकट बांटने में ‘फाइव-लेयर’ फॉर्मूला अपनाया गया है, जिसमें केवल जमीन से जुड़े और उत्तराखंड के हितों के लिए लड़ने वाले आंदोलनकारियों को ही मौका मिला है। तो दोस्तो क्या इस बार उक्रांद उत्तराखंड में तीसरे विकल्प के रूप में उभर पाएगा या फिर राष्ट्रीय दलों का किला ढहाना नामुमकिन होगा?

दोस्तो उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में बहुत बड़ा उलटफेर! चुनाव की तारीखों के एलान और राष्ट्रीय दलों के मंथन से पहले ही उत्तराखंड क्रांति दल ने अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। प्रदेश की सभी 70 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का संकल्प लेने वाली उक्रांद ने अपने 16 योद्धाओं की पहली सूची जारी कर दी है। इस कदम ने भाजपा और कांग्रेस के भीतर खलबली मचा दी है, क्योंकि क्षेत्रीय मुद्दों की आंच अब सीधी चुनावी जमीन पर पहुंचने वाली है दोस्तो इस सूची में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम है उत्तराखंड के कद्दावर नेता काशी सिंह ऐरी का, जो अपनी पारंपरिक सीट पिथौरागढ़ से एक बार फिर चुनावी दंगल में उतर चुके हैं। UKD का चुनावी शंखनाद!, चार बार के पूर्व विधायक और राज्य आंदोलन के जननायक ऐरी की मैदान में वापसी ही उक्रांद के आक्रामक इरादों को साफ कर देती है। वहीं, अल्मोड़ा की द्वाराहाट सीट से पूर्व विधायक और उक्रांद के कद्दावर चेहरा पुष्पेश त्रिपाठी को मैदान में उतारकर पार्टी ने कुमाऊं क्षेत्र में अपनी दावेदारी को बेहद मजबूत कर दिया है। वहीं दोसतो कुमाऊं के बाद अब बात गढ़वाल की, जहाँ उक्रांद ने बेहद सधे हुए चेहरों पर दांव खेला है। UKD का चुनावी शंखनाद! देवप्रयाग से जुझारू नेता पूरण सिंह कठैत को टिकट दिया गया है, तो टिहरी की प्रतापनगर सीट से पंकज व्यास राष्ट्रीय दलों को चुनौती देंगे। UKD का चुनावी शंखनाद!

चमोली की हॉट सीट कर्णप्रयाग से युवा और सक्रिय चेहरा आशीष नेगी उक्रांद के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा, दोस्तो UKD का चुनावी शंखनाद! टिहरी सीट से डी०डी० पंत और अल्मोड़ा की जागेश्वर सीट से दिनेश कुंजवाल को प्रत्याशी घोषित किया गया है। दोस्तो साफ है कि पार्टी इस बार पहाड़ के कोर वोट बैंक पर पूरी तरह फोकस कर रही है। दोस्तो उक्रांद ने इस बार केवल पहाड़ों पर ही नहीं, बल्कि मैदानी और तराई इलाकों में भी मजबूत किलाबंदी की है। UKD का चुनावी शंखनाद! देहरादून की राजपुर रोड (SC) सीट से देव चंद उत्तराखंडी को उतारा गया है, जबकि देहरादून कैंट की बेहद महत्वपूर्ण सीट से सेवानिवृत्त कमांडेंट राजेन्द्र सिंह नेगी को प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। हरिद्वार की चर्चित खानपुर सीट से रितु कंडियाल जुयाल और धनोल्टी से चंदन सिंह राणा को चुनावी समर में उतारा गया है। वहीं, तराई की बात करें तो काशीपुर से प्रदीप चंद, नानकमत्ता (ST) से कैलाश सिंह पांगती और रामनगर से भुवन चंद्र उक्रांद के टिकट पर ताल ठोकेंगे। इसके अलावा दोस्तो अल्मोड़ा की सल्ट सीट से प्रताप सिंह और बागेश्वर की कपकोट से वरुण चंदोला को टिकट देकर उक्रांद ने अपनी पहली सूची के 16 नाम पूरे कर लिए हैं। दोस्तो उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती का दावा है कि इन सभी प्रत्याशियों का चयन ‘फाइव-लेयर सिस्टम’ के तहत किया गया है। इसका मतलब है कि उम्मीदवार की संगठन के प्रति निष्ठा, क्षेत्र में उसकी सक्रियता, जनता के बीच छवि और उत्तराखंड के मूल निवास, सख्त भू-कानून जैसे मुद्दों पर उसके संघर्ष को ही एकमात्र पैमाना बनाया गया है। उक्रांद का कहना है कि उनकी दूसरी सूची भी बहुत जल्द सामने आएगी। राज्य गठन के आंदोलन से निकले उत्तराखंड क्रांति दल के सामने साल 2027 का यह चुनाव अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से पाने का सबसे बड़ा और आखिरी मौका है। लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस की नीतियों से त्रस्त जनता के सामने उक्रांद खुद को ‘तीसरे और असली पहाड़ी विकल्प’ के रूप में पेश कर रहा है। टिकट घोषित करने की इस रेस में बाजी मारकर उक्रांद ने मनोवैज्ञानिक बढ़त तो बना ली है, लेकिन क्या ये 16 सूरमा राष्ट्रीय दलों के धनबल और बाहुबल के सामने टिक पाएंगे? यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।