उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा पारिवारिक व कानूनी विवाद अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट से गिरधारी लाल साहू को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। Minister Rekha Arya Controversy न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई के बाद, इसे आगे विचार के लिए दूसरी पीठ को रेफर कर दिया है। इससे पहले निचली अदालत (SC/ST कोर्ट) से भी साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, जिसके बाद पुलिस की 9-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) साक्ष्यों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।
इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं। मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति पर शादी के समय धोखा देने, फर्जी हस्ताक्षर कर जालसाजी करने, मारपीट और जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करने के तहत मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी शामिल हैं। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू के वकील ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत बताया है। साहू का दावा है कि उन्होंने रेखा आर्या द्वारा मंत्री पद पर रहते हुए अर्जित की गई कथित अवैध संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी, जिसके प्रतिशोध में उन पर यह कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और एसआईटी की जांच जारी है।