दोस्तो, मंच पर गूंज रही थी दलेर मेहंदी की आवाज़, सामने झूम रही थी जनता, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का पारा चढ़ गया! सवाल उठा—क्या दलेर मेहंदी सच में लाइव गा रहे थे या सिर्फ रिकॉर्डेड गाने पर होंठ हिला रहे थे? विवाद बढ़ा तो अब दलेर मेहंदी के भाई हरजीत मेहंदी भी भावुक होकर सामने आए और संगीत की कसम खाते हुए अपने भाई का बचाव किया। आखिर उस मंच पर ऐसा क्या हुआ था, जिसने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को बड़े विवाद में बदल दिया? मंत्री के आरोप, एंकर का दावा और परिवार की सफाई—सब कुछ बताउंगा आपको। दोस्तो क्या आपने कभी सोचा है कि जिस आवाज के दीवाने करोड़ों लोग हैं, जिसके एक सुर पर पूरी दुनिया झूम उठती है, उसी सुरों के सरताज पर सरेआम एक बड़ा आरोप लग जाए? और आरोप लगाने वाला कोई साधारण शख्स नहीं, बल्कि सूबे के एक रसूखदार कैबिनेट मंत्री हों! जी हां, देवभूमि उत्तराखंड के एक बड़े मेले के मंच से एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने संगीत जगत से लेकर राजनीति के गलियारों तक भूचाल ला दिया है। एक तरफ जनता के हक की बात करने वाले मंत्री हैं, तो दूसरी तरफ सुरों के बेताज बादशाह दलेर मेहंदी का परिवार, जो अब संगीत की कसम खाकर रो पड़ा है। आखिर उस रात मंच पर ऐसा क्या हुआ कि मंत्री जी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया? क्या वाकई दलेर मेहंदी लाइव गाने के बजाय सिर्फ लिप-सिंक कर रहे थे? दोस्तो वो आवाज, जिसके बिना देश का हर बड़ा जश्न अधूरा माना जाता है वो नाम, जिसने पॉप और भांगड़ा म्यूजिक को एक नई ऊंचाई दी यानी दलेर मेहंदी! लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के एक सांस्कृतिक मंच पर जो कुछ हुआ, उसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और मशहूर गायक दलेर मेहंदी के बीच का यह टकराव अब सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ चर्चा का विषय बन चुका है। जनता के दबाव और स्थानीय मेले की साख को लेकर उठा यह सवाल अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। दोस्तो विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंच पर परफॉर्म कर रहे दलेर मेहंदी को लेकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भड़क गए। सुबोध उनियाल ने अब इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए साफ किया है कि दलेर मेहंदी एक बहुत बड़े गायक हैं और इसी बड़ी शख्सियत के नाते उन्हें मेले में आमंत्रित किया गया था। लेकिन शो के दौरान उन्हें लगा कि दलेर मेहंदी खुद लाइव गाने के बजाय केवल ‘लिप-सिंक’ कर रहे हैं, यानी सिर्फ गाने पर होंठ हिला रहे हैं। सुबोध उनियाल का कहना है कि वे स्थानीय प्रतिनिधि हैं और मेला कमेटी के जिम्मेदार सदस्य हैं, इसलिए जनता की तरफ से उन पर यह दबाव था कि वे इस पर आपत्ति जताएं और आयोजकों से सवाल करें। दोस्तो सुना आपने मंत्री जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि दूर-दूर से आई जनता दलेर मेहंदी की लाइव आवाज सुनने आई थी, न कि उनकी टीम या उनके पीछे बज रहे ट्रैक को। उनका साफ कहना था कि ऐसी स्थिति में इतने बड़े कलाकार को खुद लाइव गाना चाहिए था। इसी बीच इस विवाद में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब खुद एंकर ने मंत्री को बताया कि शो के दौरान सभी संगीतकारों को बकायदा निर्देश दिए गए थे कि वे केवल हाथों से वाद्ययंत्र बजाने का एक्शन करते रहें और बैकग्राउंड में गाना चलता रहे। यानी पूरा शो पहले से रिकॉर्डेड ट्रैक पर आधारित था, जिसने मंत्री के शक को यकीन में बदल दिया।
दोस्त्तो एक तरफ जहां मंत्री जी अपने स्टैंड पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ दलेर मेहंदी पर लगे कुछ अन्य आरोपों ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बड़े भाई के समर्थन में अब दलेर मेहंदी के छोटे भाई हरजीत मेहंदी खुलकर सामने आ गए हैं। हरजीत मेहंदी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि उनके भाई पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत हैं। उन्होंने सीधे संगीत की पवित्रता की कसम खाते हुए कहा—”हम संगीत की कसम खाकर कहते हैं कि मेरे बड़े भाई दलेर मेहंदी शराब को हाथ तक नहीं लगाते, वे शराब नहीं पीते। दोस्तो हरजीत मेहंदी ने बेहद दुखी मन से कहा कि एक सच्चे और समर्पित कलाकार पर इस तरह के आरोप लगाना उनके पूरे परिवार के लिए बेहद दुखद और पीड़ादायक है। एक ऐसा कलाकार जिसने दशकों तक देश-विदेश में भारत का नाम रोशन किया, उस पर सरेआम इस तरह की बयानबाजी से उनका दिल टूट गया है। अब यह लड़ाई सिर्फ एक परफॉर्मेंस की नहीं रही, बल्कि एक कलाकार के आत्मसम्मान और उसकी साख की बन चुकी है। दोस्तो एक तरफ जनता के पैसों और उम्मीदों की दुहाई देते कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल हैं, जो लिप-सिंक को जनता के साथ धोखा मान रहे हैं। तो दूसरी तरफ सुरों की कसम खाकर भाई की बेगुनाही साबित करता एक भावुक परिवार है। इस पूरे विवाद ने मनोरंजन जगत के ‘लाइव शो’ और ‘ट्रैक शो’ के पीछे के सच को भी जनता के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। देखना होगा कि देवभूमि से शुरू हुआ यह विवाद अब क्या नया मोड़ लेता है दोस्तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपनी जगह डटे हैं कि जनता को लाइव परफॉर्मेंस मिलनी चाहिए थी, तो वहीं दलेर मेहंदी का परिवार इस विवाद और आरोपों से बेहद आहत है। एक नेता का जनता के प्रति कर्तव्य और एक कलाकार का संगीत के प्रति समर्पण—इस टकराव ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिन पर बहस होना लाजिमी है।